
Election Commission of India ने मतदाता सूची संशोधन (SIR) की समय-सीमा बढ़ाई — 12 राज्यों में मतदाता सूची के विशेष संशोधन की समय सीमा अब एक हफ्ते बढ़ा दी गई है।
चुनाव आयोग ने 12 राज्यों में मतदाता सूची संशोधन (SIR) की समय सीमा बढ़ाई
भारत में आगामी विधानसभा और अन्य चुनावों की तैयारियों के बीच, चुनाव प्रबंधन को सुगम और विश्वसनीय बनाने के लिए चुनाव आयोग ने एक अहम कदम उठाया है। ECI ने 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही मतदाता सूची के “विशेष गहन पुनरीक्षण” (SIR) — जिसमें मतदाता नामों की पुष्टि, नये मतदाताओं का पंजीकरण, मृत, स्थान-परिवर्तित या दोहरे नाम हटाने आदि शामिल हैं — की समय-सीमा एक सप्ताह बढ़ा दी है।
किन राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में SIR चल रही है
SIR की यह प्रक्रिया निम्न 12 राज्यों/संघ-शासित प्रदेशों में जारी है:
- उत्तर प्रदेश
- मध्य प्रदेश
- राजस्थान
- तमिलनाडु
- केरल
- पश्चिम बंगाल
- गुजरात
- गोवा
- छत्तीसगढ़
- पुडुचेरी
- अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह
- लक्षद्वीप ([PTC News][2])
ये राज्य/प्रांत उन क्षेत्रों में आते हैं जहाँ आगामी 1–3 वर्षों में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए मतदाता सूची को ताज़ा और सटीक बनाना आवश्यक था।
नया शेड्यूल — अब क्या संशोधित हुआ है?
पिछले शेड्यूल के अनुसार, मतदाता नामांकन फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि 4 दिसंबर 2025 थी। हर वर्ष की तरह, बूथ-स्तरीय अधिकारियों (BLOs) द्वारा घर-घर जाकर फॉर्म वितरित किए जाते थे, जिन्हें मतदाताओं द्वारा भरा जाना था।
लेकिन अब:
- फॉर्म जमा करने की नई अंतिम तिथि 11 दिसंबर 2025 निर्धारित की गयी है।
- मतदान केंद्र (Polling Stations) की पुनः व्यवस्था / rationalisation भी इसी तिथि तक पूरी की जाएगी।
- उसके बाद, नियंत्रण तालिकाओं (Control Table) का अपडेट व ड्राफ्ट मतदाता सूची (Draft Electoral Roll) की तैयारी 12–15 दिसंबर 2025 के बीच होगी।
- ड्राफ्ट मतदाता सूची 16 दिसंबर 2025 को प्रकाशित होगी — जो कि पहले 9 दिसंबर तय थी।
- फिर, मतदाता नामों पर दावे (claims) या आपत्तियाँ (objections) 16 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक दाखिल हो सकेंगी।
- पंजीकरण कार्यालय (EROs) इन दावों व आपत्तियों की सुनवाई व सत्यापन करेंगे, और यह प्रक्रिया 7 फरवरी 2026 तक चलेगी।
- अंत में, मतदाता सूची के स्वास्थ्य (roll health) मानकों की समीक्षा के बाद, अंतिम सूची को 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस प्रकार, अप्रैल में घोषित पुराने शेड्यूल के मुकाबले कुल मिलाकर लगभग एक सप्ताह की देरी हुई है — लेकिन यह देरी समय-चयन, सत्यापन और अधिक समावेशिता सुनिश्चित करने के लिए देखी जा रही है।
क्यों किया गया यह विस्तार — चुनाव आयोग ने क्या बताया?
चुनाव आयोग ने यह विस्तार कई कारणों से किया है:
- पहले से जारी समय सीमा में, कई मतदाताओं और विशेषकर युवा, पहली बार मतदान के लिए नाम जोड़ने वाले लोगों को पर्याप्त समय न मिल पा रहा था। विस्तार से यह सुनिश्चित होगा कि वे सही दस्तावेजों के साथ अपना नाम दर्ज करा सकें।
- इसके अलावा, बूथ-स्तरीय अधिकारियों (BLOs) और मतदान केंद्रों (Polling Stations) की rationalisation और पुनर्गठन की प्रक्रिया में अधिक समय देने से, त्रुटियों की संभावना कम होगी।
- ECI ने यह घोषणा उन राज्यों में की है, जिनकी राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हैं — इसलिए सूची की स्वच्छता और नामों की सही जानकारी चुनावी प्रक्रिया के विश्वसनीयता हेतु जरूरी थी।
- साथ ही, यह कदम मतदाता जागरूकता और लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ावा देता है — क्योंकि हर योग्य मतदाता को मतदान का अधिकार सुनिश्चित किया जा सकेगा।
ECI के अनुसार, यह विस्तार “समावेशिता, पारदर्शिता, और सभी योग्य मतदाताओं को वोट देने का बराबर अवसर” देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
मतदाताओं के लिए क्या सबक — आपको क्या करना चाहिए?
अगर आप उन 12 राज्यों में रहते हैं जहाँ SIR चल रही है (जिनमें आपका राज्य है या नजदीक का राज्य — जैसे कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि), तो:
- सुनिश्चित करें कि आपने अपना फॉर्म (या मौजूदा नाम का सत्यापन) भर कर BLO को 11 दिसंबर 2025 तक सौंप दिया हो।
- यदि आप नया मतदाता हैं, तो आवश्यक दस्तावेज (पहचान, पता, आयु, निवास आदि) तैयार रखें।
- फॉर्म भरते समय ध्यान रखें कि आपकी जानकारी सही और स्पष्ट हो — ताकि आगे किसी विवाद या पुन: जांच की स्थिति न बने।
- अगर आपका नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं दिखे या कोई त्रुटि हो, तो 16 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 के बीच दावा (claim) या आपत्ति (objection) दर्ज करा सकते हैं।
- अपने BLO या स्थानीय निर्वाचन कार्यालय से संपर्क में रहें — और यदि कोई समस्या हो, तो समय रहते उसका समाधान करवाएं।
इस विस्तार के कारण मतदान-पंजीकरण प्रक्रिया में सुधार और अधिक लोग शामिल हो सकेंगे — इसलिए इसे एक अवसर के रूप में देखें।
SIR पर विस्तृत पृष्ठभूमि — यह प्रक्रिया क्या है और क्यों जरूरी है?
SIR (Special Intensive Revision) एक विशेष गहन पुनरीक्षण है, जिसके माध्यम से मतदाता सूची को पूरी तरह से अपडेट करना, obsolete (मृत या स्थान-परिवर्तित) नाम हटाना, नए मतदाताओं का पंजीकरण करना, और दोहराए हुए नामों/गलतियों को दुरुस्त करना शामिल है।
इसका मकसद है कि आगामी चुनावों के लिए वोटर लिस्ट बिल्कुल सटीक, भरोसेमंद और निष्पक्ष हो — ताकि हर नागरिक को एक समान अवसर मिले, और चुनावी प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी या मतदाता सूची की कमियों का फायदा न हो।
ECI ने पिछले कई वर्षों में बहुत से राज्यों में intensive revision नहीं की थी — कई मतदाता सूची दशक पुराने थे। अब, SIR के ज़रिये उन सूची को अपडेट करना और सुनिश्चित करना है कि सबकुछ वर्तमान जानकारी (नवीनतम पते, नाम, उम्र, निवास आदि) पर आधारित हो।
इस उपाय से यह भी सुनिश्चित होगा कि विदेशियों, अवैध प्रवासियों या असत्य मतदाताओं की सूची से पहले ही छुट्टी हो जाए — जिससे चुनाव की विश्वसनीयता बनी रहे।
निष्कर्ष
चुनाव आयोग द्वारा 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही SIR प्रक्रिया की समय-सीमा बढ़ाना — न सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला है, बल्कि यह लोकतंत्र की मजबूती, पारदर्शिता, और अधिक समावेशिता की ओर एक कदम है।
यह विस्तार मतदाताओं को अपनी जानकारी ठीक करने, नाम जोड़ने, या पुराने मतदाता बनने का एक मौका देता है — जिससे हर योग्य व्यक्ति अपना मतदान अधिकार सुरक्षित रख सके।
यदि आप स्वयं या आपके जाने-पहचाने कोई राज्य इस SIR के दायरे में है — तो 11 दिसंबर तक अपना फॉर्म अवश्य जमा करें; यदि नाम ड्राफ्ट सूची में न दिखे, तो समय पर दावा/आपत्ति करें; इस मौके को मतदाता अधिकार सुनिश्चित करने की तरह लें।
इसलिए, इस निर्णय को देखें — न केवल एक तारीख की डेडलाइन बढ़ने के रूप में, बल्कि एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी और नागरिक की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करने के अवसर के रूप में।
