अमेरिका ने नाइजीरिया और सीरिया में आतंकवादी ठिकानों पर सख्त कार्रवाई जारी रखी

अमेरिका ने नाइजीरिया और सीरिया में आतंकवादी ठिकानों पर सख्त कार्रवाई जारी रखी — बड़े ठिकाने ध्वस्त

संयुक्त राज्य अमेरिका ने नाइजीरिया और सीरिया में आतंकवादी समूहों के अड्डों को निशाना बनाते हुए अपनी सख्त सैन्य कार्रवाई को जारी रखा है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह अभियान आतंकवाद के वैश्विक खतरे को कम करने तथा स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इन हवाई हमलों में बड़े-बड़े आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर देने का दावा किया गया है, जिससे आतंकवादी नेटवर्क को भारी क्षति पहुँची है।

नाइजीरिया में अमेरिकी एयरस्ट्राइक — ISIS-संबंधित ठिकानों का ध्वसान

25 दिसंबर 2025 की रात अमेरिका ने नाइजीरिया के उत्तर-पश्चिमी सोकोटो राज्य में ISIS (इस्लामिक स्टेट) के जुड़े ठिकानों पर प्रेसिजन एयरस्ट्राइक किया, जिसमें कम से कम दो बड़े ISIS-संबंधित ठिकानों को निशाना बनाया गया और उन्हें ध्वस्त किया गया। यह हमला अमेरिकी अफ्रीका कमांड (U.S. Africa Command) और नाइजीरियाई सरकार के समन्वय से हुआ।

नाइजीरिया की सूचना मंत्रालय ने बताया कि इन ठिकानों का इस्तेमाल विदेशी ISIS लड़ाकों और स्थानीय सहयोगियों द्वारा बड़े पैमाने पर हमलों की योजना बनाने तथा संसाधन भंडारण के लिए किया जा रहा था। अमेरिकी MQ-9 रिपर ड्रोन से 16 सटीक निर्देशित मिसाइलें दागी गईं और कई आतंकवादी मारे गए, हालांकि किसी नागरिक हानि की आधिकारिक रिपोर्ट नहीं मिली।

ट्रंप के बयान और लक्ष्य

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन एयरस्ट्राइक्स को ISIS और अन्य आतंकवादी समूहों के खिलाफ कठोर संदेश बताया। उन्होंने सामाजिक मीडिया पर कहा कि यह कार्रवाई “ईसाइयों और अन्य धार्मिक समूहों पर हो रही हिंसा को रोकने” के लिए की गई है और अमेरिका किसी भी आतंकी संगठन को अपने क्षेत्र या साझेदार देशों में पनपने नहीं देगा।

नाइजीरियाई राष्ट्रपति बोला टिनूबू ने भी इसका स्वागत किया और कहा कि यह संयुक्त प्रयास देश को सुरक्षित करने और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने बताया कि संयुक्त ऑपरेशन में साझा इंटेलिजेंस और योजना का विशेष योगदान रहा।

सीरिया में ऑपरेशन Hawkeye Strike — ISIS के 70 ठिकानों पर बड़ा हमला

सशस्त्र संघर्ष के लंबे दौर के बीच अमेरिका ने सीरिया में भी आतंकवादी समूहों पर बड़ा अभियान जारी रखा है। ऑपरेशन Hawkeye Strike के तहत अमेरिकी बलों ने सीरिया के मध्य हिस्सों में ISIS के लगभग 70 ठिकानों, हथियार भंडारों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया। यह अभियान उस हमले के बाद शुरू किया गया, जिसमें दिसंबर की शुरुआत में अमेरिकी सैनिकों पर घातक हमला हुआ था।

अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा कि आधुनिक लड़ाकू विमान — एफ-15, ए-10, अपाचे हेलीकॉप्टर्स और HIMARS रॉकेट सिस्टम — का इस्तेमाल कर ISIS के ऑपरेशन केंद्रों को भारी नुकसान पहुँचाया गया। कहा गया कि इस हमले में ISIS सैन्य क्षमता को काफी हानि हुई है और भविष्य में भी ऐसे अभियान संभव हैं।

सैन्य और राजनीतिक प्रतिक्रिया

अमेरिका के रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह अभियान किसी पूर्ण युद्ध की शुरुआत नहीं बल्कि आतंकवाद के खिलाफ एक निर्णायक कदम है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने सैनिकों और नागरिकों को निशाना बनाने वाले आतंकवादियों को नहीं बख्शेगा और दुनिया भर में कहीं भी उन्हें ढूँढकर निष्क्रिय करेगा।

सीरियाई सरकार ने कहा कि आतंकवादी समूहों के खिलाफ कार्रवाई आवश्यक है, लेकिन साथ ही अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बेहतर रणनीतियों की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया। सीरिया ने यह दावा किया कि वह आईएसआईएस को अपने देश में सुरक्षित ठिकाना नहीं देगा।

स्थानीय स्थिति और नागरिक सुरक्षा प्रभाव

नाइजीरिया में सोकोटो और आसपास के इलाकों में हवाई हमलों के बाद मलबा और उड़ते शोलों के कारण स्थानीय निवासियों में चिंता की स्थिति बनी। हालांकि, सरकारी बयान में नागरिकों को शांत रहने की अपील की गई और कहा गया कि यह कार्रवाई देश की सुरक्षा के लिए आवश्यक थी।

साइरियाई क्षेत्रों में भी हवाई हमलों का असर स्थानीय स्थिति पर पड़ा है। कई इलाके बुनियादी ढांचे से क्षतिग्रस्त हुए और स्थानीय नागरिकों के लिए सुरक्षा तथा राहत सेवाओं की आवश्यकता बढ़ गई है। इन हमलों के कारण बेस से भागे आतंकवादी समूह अन्य इलाकों में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे आगे की अस्थिरता का खतरा बना हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और समर्थन

अंतरराष्ट्रीय समुदाय में नाइजीरिया और सीरिया दोनों मामलों पर मिश्रित प्रतिक्रिया है। कुछ देशों ने अमेरिका की आतंकवाद-विरोधी कार्रवाई का समर्थन किया और इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण बताया। वहीं कुछ समूहों ने चेतावनी दी कि स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा और आकस्मिक परिणामों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

विश्लेषकों का कहना है कि ISIS और अन्य आतंकी संगठनों का नेटवर्क अब भी महामारी की तरह फैल रहा है और वैश्विक साझेदारी तथा संयुक्त सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पहले से अधिक है।

भविष्य की राह — सुरक्षा चुनौतियाँ और रणनीति

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी कार्रवाई आतंकवादियों के आधारभूत ढाँचे को कमजोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, लेकिन व्यापक स्थिरता केवल सैन्य कार्रवाई से नहीं आ सकती। स्थानीय सरकारों, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, सामाजिक-आर्थिक विकास और सुरक्षा सुधार कार्यक्रमों की भी आवश्यकता होगी।

नाइजीरिया और सीरिया दोनों देश पहले से ही हिंसा, अस्थिरता और संघर्ष से जूझ रहे हैं। ISIS और इसके सहयोगी समूह व्यापक इलाकों में सक्रिय हैं, लेकिन संयुक्त कार्रवाई से उनके संचालन में बाधा उत्पन्न हो रही है।

निष्कर्ष

संयुक्त राज्य अमेरिका ने नाइजीरिया और सीरिया में आतंकवादी ठिकानों पर अपनी कार्रवाई को जारी रखते हुए बड़े-बड़े अड्डों को निशाना बनाया है। इन अभियानों का उद्देश्य आईएसआईएस जैसे उग्रवादी समूहों के नेटवर्क को कमजोर करना और स्थानीय नागरिकों के जीवन को सुरक्षित बनाना है। हवाई हमलों के परिणामस्वरूप बड़े ठिकानों का ध्वसान हुआ और आतंकवादी समूहों की क्षमताओं में कमी आई, लेकिन युद्ध के मैदान की व्यापक चुनौतियाँ और मानवीय प्रभाव अभी भी कड़े मोड़ पर हैं।

इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है और आगे भी संयुक्त रणनीतियों तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता बनी रहेगी।

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