
UNHRC में भारत का चुनाव — PMO ने कहा: “यह भारत की लोकतांत्रिक प्रतिष्ठा और संस्थागत मजबूती का प्रतीक”
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में भारत के पुनः चुनाव को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने कहा है कि यह उपलब्धि न केवल भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को सुदृढ़ करती है, बल्कि यह वैश्विक समुदाय द्वारा भारतीय लोकतंत्र, संवैधानिक ढांचे और संस्थागत मजबूती पर जताए गए भरोसे का भी प्रमाण है। भारत को एशिया-प्रशांत समूह की सीट पर अगले कार्यकाल के लिए चुना गया है, जिसके बाद सरकार और कूटनीतिक हलकों में इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
भारत को मिला व्यापक समर्थन
UNHRC के चुनाव में भारत को जिस पैमाने पर समर्थन मिला, वह उल्लेखनीय रहा। सदस्य देशों ने भारत को मानवाधिकारों के संरक्षण, सामाजिक न्याय, समावेशी विकास और वैश्विक शांति प्रयासों में भारत की भूमिका को ध्यान में रखते हुए वोट दिया।
PMO के अनुसार, “यह चुनाव एक बार फिर साबित करता है कि दुनिया भारत को एक जिम्मेदार लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में देखती है, जो मानव अधिकारों को न केवल अपने संविधान में बल्कि व्यवहार में भी सर्वोच्च स्थान देता है।”
भारत ने इससे पहले भी कई बार इस परिषद में सदस्यता हासिल की है और विभिन्न वैश्विक मानवाधिकार मुद्दों पर रचनात्मक भूमिका निभाई है। इस चुनाव ने भारत की उसी निरंतरता और सक्रिय कूटनीति को दोहराया है।
PMO का बयान: लोकतांत्रिक मूल्यों की वैश्विक मान्यता
PMO द्वारा जारी आधिकारिक प्रतिक्रिया में कहा गया कि यह जीत भारत की “लोकतांत्रिक प्रतिष्ठा और संस्थागत सुदृढ़ता” का प्रतिबिंब है।
भारतीय सरकार का मानना है कि दुनिया के कई हिस्सों में लोकतंत्र और मानवाधिकारों को लेकर बढ़ते संकट के बीच भारत एक स्थिर, समावेशी और जिम्मेदार मॉडल के रूप में उभरा है।
PMO ने कहा:
- भारत की स्वतंत्र न्यायपालिका
- पारदर्शी चुनाव प्रणाली
- सक्रिय नागरिक समाज
- एक जीवंत मीडिया
- और संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार
इन सभी ने मिलकर भारत को एक विश्वसनीय लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है। यही कारण है कि UNHRC में भारत की सदस्यता को सहज रूप से स्वीकार किया गया।
कूटनीतिक सफलता और भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका
विदेश मंत्रालय ने भी इस चुनाव को भारत की “कूटनीतिक सफलता” बताया है।
भारत ने पिछले वर्षों में बहुपक्षीय मंचों पर अपनी सक्रियता बढ़ाई है — चाहे वह जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक मुद्दे हों, अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन हों, या फिर मानवाधिकारों पर पहल।
UNHRC में भारत की भूमिका हमेशा से संतुलित रही है। भारत “सार्वभौमिक मानवाधिकारों” का समर्थन करता है, लेकिन साथ ही “संप्रभुता और सांस्कृतिक विविधताओं” का सम्मान करने की वकालत भी करता है। यह संतुलित दृष्टिकोण वैश्विक दक्षिण (Global South) के कई देशों के लिए आकर्षक रहा है, और इसने भारत को व्यापक समर्थन दिलाया है।
2025 के चुनाव में भी भारत ने महिला अधिकारों, बाल संरक्षण, साइबर सुरक्षा में मानवाधिकार, जलवायु परिवर्तन और मानव गरिमा जैसे मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताओं को रेखांकित करके वोट हासिल किया।
भारत का आगामी एजेंडा क्या होगा?
UNHRC में नए कार्यकाल के दौरान भारत निम्न बिंदुओं पर ज्यादा फोकस करने की योजना बना रहा है:
- मानवाधिकारों में तकनीक का उपयोग
भारत “डिजिटल मानवाधिकार रक्षा” पर जोर देना चाहता है — जैसे डिजिटल सुरक्षा, AI के नैतिक उपयोग, और साइबरस्पेस में मानव स्वतंत्रता की सुरक्षा।
- महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता
भारत घरेलू नीतियों से लेकर वैश्विक स्तर तक महिला अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में योगदान देगा। भारत ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’, आर्थिक सशक्तिकरण, राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसी पहलों को वैश्विक मंचों पर मॉडल के रूप में प्रस्तुत करेगा।
- जलवायु-मानवाधिकार संबंध
भारत जलवायु संकट को मानवाधिकार संकट के रूप में पेश करने की पहल को और आगे बढ़ाएगा। विकासशील देशों के लिए ‘जलवायु न्याय’ सुनिश्चित करना भी प्राथमिकता में है।
- वैश्विक दक्षिण की आवाज़
भारत इस मंच पर दक्षिणी देशों की आवाज़ को मजबूत करेगा—विशेषकर गरीबी, कुपोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर।
आंतरिक चुनौतियाँ भी रहीं चर्चा का हिस्सा
हालांकि भारत को व्यापक समर्थन मिला, लेकिन कुछ पश्चिमी संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने चुनाव के दौरान भारत की आंतरिक चुनौतियों का भी उल्लेख किया। इनमें शामिल हैं:
- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस
- धार्मिक सद्भाव से जुड़े मुद्दे
- सुरक्षा संबंधी मामलों में कठोर कानूनों का उपयोग
सरकार ने इन आलोचनाओं को “आंशिक एवं संदर्भहीन” बताते हुए कहा कि भारत का लोकतांत्रिक ढांचा इतना मजबूत है कि किसी भी मुद्दे पर सार्वजनिक विमर्श स्वतः ही समाधान तलाश लेता है।
भारत का तर्क है कि उसके संविधान में नागरिक स्वतंत्रताओं की मजबूत सुरक्षा है, और न्यायपालिका व संस्थाओं की सक्रियता इस बात की गारंटी देती है कि अधिकारों का संरक्षण हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने क्यों जताया भरोसा?
- भारत की शांति और विकास आधारित विदेश नीति
शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, बहुपक्षीय सहयोग और विकासोन्मुख वैश्विक व्यवस्था के समर्थन को हमेशा सराहा गया है।
- मानवीय सहायता और आपदा राहत में अग्रणी
COVID-19 महामारी के दौरान ‘Vaccine Maitri’ से लेकर प्राकृतिक आपदाओं में राहत भेजने तक, भारत की मानवीय पहलें कई देशों ने अनुभव की हैं।
- लोकतांत्रिक निरंतरता
75 वर्षों से अधिक समय से सफल और स्थायी लोकतंत्र होना भारत की एक प्रमुख पहचान है।
- वैश्विक दक्षिण का नैचुरल लीडर
एशिया-अफ्रीका-लैटिन अमेरिका के कई देशों ने भारत को अपनी आवाज़ मानकर समर्थन दिया।
UNHRC में भारत की जीत का महत्व
यह जीत भारत के लिए महज एक औपचारिक चुनाव नहीं, बल्कि कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है:
- अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की विश्वसनीयता मजबूत होती है
- भारत की वैश्विक भूमिका और नेतृत्व को स्वीकार्यता मिलती है
- मानवाधिकार क्षेत्र में भारत अपनी नीतियों व मॉडलों को साझा कर सकेगा
- भारत का ‘लोकतांत्रिक नैरेटिव’ वैश्विक विमर्श में और मजबूत होगा
PMO ने स्पष्ट कहा कि “भारत न केवल अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा में प्रतिबद्ध है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर दुनिया को एक अधिक न्यायपूर्ण और समावेशी स्थान बनाने का प्रयास भी करता रहेगा।”
निष्कर्ष
UNHRC में भारत का चुनाव एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि है और यह दिखाता है कि वैश्विक समुदाय भारत की लोकतांत्रिक ताकत, संस्थागत मजबूती और मानवाधिकारों के प्रति समर्पण को गंभीरता से स्वीकार करता है। आने वाला कार्यकाल भारत के लिए अपनी नैतिक और राजनीतिक विश्वसनीयता को और मजबूत करने का अवसर देगा।
