ओडिशा में नक्सल मुठभेड़: क्या हुआ?

ओडिशा में नक्सल मुठभेड़: क्या हुआ?
ओडिशा के कंधमाल जिले के घने जंगलों में भारी सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ बुधवार से शुरू हुई जो अगले दिन तक जारी रही। इस ऑपरेशन में बैन की गई माओवादी संगठन के ऊँचे दर्जे के नेता सहित कई नक्सली ढेर कर दिए गए।
घटना मुख्य रूप से रंभा जंगल (Rambha forest range) में हुई, जो कंधमाल और गंजम जिलों की सीमा पर है। सुरक्षा बलों ने इलाके में बड़ी संख्या में नक्सलियों की उपस्थिति की नज़र रखते हुए विशेष अभियान चलाया।
इस मुठभेड़ को दो दिनों का संयुक्त ऑपरेशन माना जा रहा है जिसमें ओडिशा पुलिस, CRPF, और BSF की टीमों ने भाग लिया।
मुख्य नक्सली नेता गणेश उइके — ढेर
सबसे बड़ा तूफ़ान तब आया जब चौकीदारी और तलाशी के दौरान सुरक्षा बलों ने सीपीआई (माओवादी) के वरिष्ठ नेता गणेश उइके को मार गिराया।
उइके कौन थे?
गणेश उइके (जिसे पक्का हनुमंतु, राजेश तिवारी या चमरु जैसे नामों से भी जाना जाता था) करीब 69 वर्ष के थे।
वह सीपी (माओवादी) के केंद्रीय समिति सदस्य और ओडिशा ऑपरेशन्स के प्रमुख थे।
उन पर कुल ₹1.1 करोड़ से अधिक का इनाम था — जिसमें अलग-अलग राज्यों को दी गई अलग-अलग इनाम राशियाँ शामिल थीं।
वे लगभग 40 वर्षों से भूमिगत थे और नक्सल आंदोलन के एक अनुभवी नेता माने जाते थे।
उनकी हत्या को माओवादी संरचना में एक बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि वे संगठन के दिशा-निर्देशन और भर्ती रणनीति के मुख्य प्रेरक रहे हैं।
कुल नुकसान और हथियार बरामद
शुरूआती जानकारी के अनुसार, इस मुठभेड़ में:
गणेश उइके के अलावा कुल 6 नक्सली ढेर किए गए हैं।
इस संख्या में दो महिला माओवादी भी शामिल हैं।
सुरक्षा बलों ने घटनास्थल से दो INSAS राइफलें और एक .303 राइफल सहित हथियार भी बरामद किए।
हालांकि, अभी तक अन्य नक्सलियों की पहचान पूरी तरह से नहीं हो पाई है। जाँच जारी है।
मुठभेड़ के पीछे खुफ़िया इनपुट
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई सुरक्षा बलों को प्राप्त खुफ़िया इनपुट के कारण सफल हुई। कई surrendered Maoists (नक्सलियों) से मिली जानकारी ने अधिकारियों को संभावित नक्सल ठिकानों और रूटों तक पहुँचने में मदद दी।
वास्तव में, कुछ दिन पहले ही मलकानगिरी जिले में 22 नक्सलियों के आत्मसमर्पण से पुलिस को काफी हथियार, गोला-बारूद और नई जानकारियाँ मिली थीं।
सुरक्षा बलों की भूमिका और रणनीति
इस अभियान में कुल मिलाकर:
20 विशेष संचालन समूह (SOG) यूनिट्स
दो CRPF बटालियनों
एक BSF इकाई
ने मिलकर रणनीतिक रूप से नक्सलियों पर घेराबंदी और पीछा किया।
सुरक्षा बलों ने आज सुबह सवेरे ही तलाशी और दक्षिणी दिशा से हमला शुरू किया, जिससे नक्सलियों के पास कोई बड़ा बचाव नहीं बचा।
सरकार और अधिकारियों की प्रतिक्रिया
केंद्रीय गृहमंत्री का बयान
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि यह ऑपरेशन “नक्सल विरोधी अभियान में एक बड़ी सफलता” है। उन्होंने घोषणा की कि भारत को 31 मार्च 2026 तक नक्सल-निरस्त करने का लक्ष्य सरकार कायम रखे हुए है।
ओडिशा डीजीपी का बयान
ओडिशा के डीजीपी वाय.बी. खुरानिया ने इसे सुरक्षा बलों के लिए एक “महान उपलब्धि और बड़े झटके” के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे वरिष्ठ नक्सली नेताओं के ढेर होने से राज्य में शासन-व्यवस्था मजबूत होगी और आम नागरिकों को सुरक्षा का भरोसा मिलेगा।
स्थिति और असर
यह महत्वपूर्ण है कि:
गणेश उइके के मरने से ओडिशा में नक्सल आंदोलन की संरचना कमजोर हुई है।
वह अब तक सक्रिय शीर्ष नेतृत्व में से एक थे, और उनकी मौत से संगठन को क्षेत्रीय नेतृत्व में भारी कमी का सामना करना पड़ता है।
विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम राज्य को नक्सल प्रभावित जिलों से मुक्त करने की दिशा में निर्णायक साबित हो सकता है, खासकर कंधमाल, मलकानगिरी और नक्सल प्रभावित दूसरे जिलों में।
पृष्ठभूमि — नक्सल आंदोलन की कहानी
नक्सलवाद भारत के कुछ जंगलों और ग्रामीण इलाकों में दशकों से सक्रिय है, जिसमें आदिवासी इलाकों में असमानता, आर्थिक व सामाजिक मुद्दों के कारण विद्रोह खड़ा किया गया। ओडिशा में यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ी, खासकर कंधमाल, मलकानगिरी, और कलेहांदी जैसे जिलों में। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों की सक्रियता, आत्मसमर्पण योजनाएँ और स्थानीय समर्थन ने इसे कठिन स्थिति में ला दिया है।
क्या यह नक्सल समस्या का अंत है?
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी सफलताएँ सुरक्षा बलों को मजबूती तो देती हैं, लेकिन पूरी तरह से नक्सलवाद का अंत तत्काल संभव नहीं है। संगठन के बचे हुए सदस्यों, स्थानीय समस्याओं और क्षेत्रीय समर्थन नेटवर्क को समझना आवश्यक है ताकि लंबे समय तक स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।
📰 संक्षेप में
➡️ ओडिशा के कंधमाल जंगल में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच एंटी-नक्सल ऑपरेशन हुआ।
➡️ वरिष्ठ माओवादी नेता गणेश उइके सहित कम से कम 6 नक्सली मारे गए।
➡️ हथियार बरामद किए गए और व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया।
➡️ सरकार और अधिकारियों ने इसे नक्सलवाद विरोधी बड़ी सफलता बताया।
