2025 में अमेरिका द्वारा बड़े पैमाने पर निष्कासन

2025 में अमेरिका द्वारा बड़े पैमाने पर निष्कासन (Deportation): अफ़ग़ान, लैटिन अमेरिकी और मध्य-पूर्वी नागरिक सबसे अधिक प्रभावित — आँकड़ों में पाकिस्तान नहीं, सऊदी अरब प्रमुख
वर्ष 2025 में वैश्विक स्तर पर आव्रजन (इमिग्रेशन) और शरणार्थी नीति एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रही। अमेरिका द्वारा अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, सीमा सुरक्षा को मजबूत करने और आव्रजन कानूनों के कठोर प्रवर्तन के चलते बड़े पैमाने पर लोगों को देश से निकाला गया। खास बात यह रही कि निष्कासन (डिपोर्टेशन) के शिकार लोगों में अफ़ग़ान नागरिकों की संख्या उल्लेखनीय रही, लेकिन आँकड़ों में सबसे बड़ा स्रोत देश पाकिस्तान नहीं बल्कि सऊदी अरब सामने आया, जिसने कई विश्लेषकों और नीति-निर्माताओं को चौंका दिया।
- 2025 में अमेरिकी निष्कासन नीति का परिदृश्य
अमेरिका में 2024 के चुनावी वर्ष के बाद 2025 में नई प्रशासनिक प्राथमिकताओं के तहत आव्रजन नीति को और कड़ा किया गया।
अवैध सीमा पार करने वालों पर “ज़ीरो टॉलरेंस” दृष्टिकोण
अस्थायी संरक्षण (Temporary Protected Status – TPS) की समीक्षा
शरण (Asylum) दावों की त्वरित जांच
पुराने निष्कासन आदेशों (Removal Orders) पर सख्त अमल
इन कदमों का सीधा असर उन प्रवासियों पर पड़ा जो वर्षों से अमेरिका में रह रहे थे, लेकिन जिनकी कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं थी।
- अफ़ग़ान नागरिक: विशेष मामला, फिर भी निष्कासन
तालिबान के सत्ता में आने के बाद से अफ़ग़ानिस्तान से लाखों लोग विस्थापित हुए। अमेरिका ने शुरू में हज़ारों अफ़ग़ानों को मानवीय आधार पर प्रवेश दिया, विशेषकर उन लोगों को जिन्होंने अमेरिकी सेना या संस्थानों के साथ काम किया था।
लेकिन 2025 तक आते-आते:
कई अफ़ग़ान नागरिकों का अस्थायी वीज़ा समाप्त हो गया
शरण आवेदन लंबित रहे
TPS की अवधि और दायरे को सीमित किया गया
नतीजतन, बड़ी संख्या में अफ़ग़ान नागरिक निष्कासन की प्रक्रिया में आ गए। मानवाधिकार संगठनों ने इसे “नैतिक और मानवीय संकट” करार दिया, जबकि अमेरिकी प्रशासन का तर्क था कि कानून सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
- सऊदी अरब से सबसे अधिक निष्कासन: क्यों चौंकाने वाला तथ्य?
परंपरागत रूप से माना जाता है कि अमेरिका से सबसे अधिक निष्कासन मैक्सिको, ग्वाटेमाला, होंडुरास, या पाकिस्तान जैसे देशों के नागरिकों का होता है। लेकिन 2025 के आँकड़ों में सऊदी अरब का नाम ऊपर आना कई वजहों से महत्वपूर्ण है।
संभावित कारण:
वर्क वीज़ा उल्लंघन
बड़ी संख्या में सऊदी नागरिक व्यापार, शिक्षा और अल्पकालिक कार्य वीज़ा पर अमेरिका आते हैं। वीज़ा अवधि समाप्त होने के बाद भी रुकने के मामले बढ़े।
वित्तीय और कानूनी जांच
मनी लॉन्ड्रिंग, टैक्स उल्लंघन और अन्य वित्तीय अपराधों की जांच के दौरान कई लोगों की आव्रजन स्थिति संदिग्ध पाई गई।
आतंकवाद-रोधी सख्ती
9/11 के बाद से अमेरिका मध्य-पूर्व से आने वाले नागरिकों की पृष्ठभूमि जांच पर विशेष ध्यान देता रहा है। 2025 में यह प्रक्रिया और कठोर हुई।
नए द्विपक्षीय समझौते
अमेरिका और सऊदी अरब के बीच कानूनी सहयोग और प्रत्यर्पण समझौतों के कारण निष्कासन प्रक्रिया तेज हुई।
- पाकिस्तान क्यों पीछे रहा?
यह तथ्य भी चर्चा में रहा कि पाकिस्तान, जो पहले निष्कासन सूची में ऊँचे स्थान पर रहता था, 2025 में शीर्ष पर नहीं रहा।
इसके पीछे कारण माने जा रहे हैं:
पहले के वर्षों में बड़े पैमाने पर निष्कासन पहले ही हो चुके थे
नए वीज़ा आवेदनों में गिरावट
छात्र और कुशल श्रमिक वीज़ा पर बेहतर अनुपालन
पाकिस्तान-अमेरिका के बीच काउंसलर और कानूनी समन्वय में सुधार
- अन्य प्रभावित देश
अमेरिकी निष्कासन नीति का असर केवल अफ़ग़ानिस्तान और सऊदी अरब तक सीमित नहीं रहा।
अन्य प्रमुख देश रहे:
मैक्सिको और मध्य अमेरिका (सीमा पार प्रवासन)
वेनेज़ुएला और क्यूबा (राजनीतिक-आर्थिक संकट)
नाइजीरिया और इथियोपिया (वीज़ा उल्लंघन और शरण अस्वीकृति)
- मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया
एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच और अन्य संगठनों ने अमेरिका की 2025 की निष्कासन नीति की आलोचना की।
उनका कहना है:
अफ़ग़ान नागरिकों की वापसी जानलेवा हो सकती है
सामूहिक निष्कासन मानवीय मूल्यों के खिलाफ है
निष्पक्ष सुनवाई और अपील का समय पर्याप्त नहीं दिया जा रहा
वहीं अमेरिकी प्रशासन का जवाब रहा कि:
“हम शरणार्थियों की सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा — दोनों के बीच संतुलन बना रहे हैं।”
- वैश्विक प्रभाव और कूटनीतिक निहितार्थ
अमेरिका की इस नीति का वैश्विक असर भी दिखा:
निष्कासित नागरिकों के पुनर्वास का दबाव मूल देशों पर बढ़ा
सऊदी अरब और अफ़ग़ानिस्तान जैसे देशों के साथ कूटनीतिक संवाद तेज हुआ
यूरोप और कनाडा ने भी अपनी आव्रजन नीतियों की समीक्षा शुरू की
- निष्कर्ष
2025 में अमेरिका द्वारा किया गया बड़े पैमाने पर निष्कासन केवल एक आव्रजन मुद्दा नहीं, बल्कि मानवाधिकार, कूटनीति और वैश्विक राजनीति से जुड़ा प्रश्न बन गया है।
अफ़ग़ान नागरिकों की बढ़ती संख्या ने मानवीय चिंता खड़ी की, जबकि सऊदी अरब से सबसे अधिक निष्कासन ने पारंपरिक धारणाओं को चुनौती दी।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि:
क्या अमेरिका अपनी नीति में मानवीय लचीलापन लाता है
निष्कासित लोगों के लिए वैश्विक पुनर्वास तंत्र कैसे विकसित होता है
और क्या आव्रजन को केवल सुरक्षा के चश्मे से नहीं, बल्कि मानव गरिमा के नजरिए से भी देखा जाएगा
यह मुद्दा 2025 के बाद भी वैश्विक बहस का केंद्र बना रहने वाला है।
