
Indian Air Force और राहत एजेंसियां, तूफान Ditwah प्रभावितों की मदद में श्रीलंकाई–भारत सहयोग
Indian Air Force और राहत एजेंसियां, तूफान Ditwah प्रभावितों की मदद में श्रीलंकाई–भारत सहयोग — भारत ने श्रीलंका में राहत कार्य शुरू किए; एयरफोर्स और राष्ट्रीय बचाव दल (NDRF) सक्रिय हैं।
तूफान Ditwah: तबाही और आपात स्थिति
चक्रवाती तूफान Ditwah ने 28–29 नवंबर 2025 को श्रीलंका में व्यापक तबाही मचाई। भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने कई इलाकों को प्रभावित किया; बांध फटना, नदियों का उफान, तटीय–आंतरिक क्षेत्रों में बाढ़ और घरों के ढहने जैसी घटनाएं हुईं।
केंद्रीय आपदा प्रबंधन केंद्र (DMC) के अनुसार, मौतों की संख्या 200 से ऊपर हो चुकी है और सैकड़ों लोग लापता हैं। प्रभावितों की संख्या लाखों में बताई जा रही है, और अनेक परिवार बेघर हुए हैं।
आपातकाल घोषित कर दिया गया है, वहीं सड़क, पुल, बिजली, संचार व्यवस्थाएं कई स्थानों पर बाधित हो चुकी हैं। राहत-बचाव और पुनर्वास के लिए अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय प्रयास शुरू हो गए।
भारत का जवाब: Operation Sagar Bandhu की शुरुआत
तबाही की तस्वीर देख, भारत ने तुरंत मदद के लिए कदम बढ़ाए। 28–29 नवंबर की रात से ही Operation Sagar Bandhu शुरू किया गया — जिसमें IAF, NDRF, और Indian Navy समेत कई एजेंसियाँ शामिल हैं।
IAF ने Hindan एयरबेस से C-130J और IL-76 जैसे बड़े ट्रांसपोर्ट विमान रवाना किए, जिनके जरिए पहले 21 टन राहत सामग्री श्रीलंका के कोलंबो पहुंचाई गई। इसमें रेशन, तम्बू, टारपाल, कंबल, हाइजीन किट, तैयार खाने की चीजें (ready-to-eat meals) शामिल थीं।
साथ ही NDRF की दो विशेष urban search-and-rescue टीमें — लगभग 80 जवान और चार कुत्तों सहित — को भी IL-76 से भेजा गया। इनके पास inflatable boats, हाइड्रोलिक cutting/ breaching tools, मेडिकल किट, संचार उपकरण आदि थे, जो बाढ़, मलबा व ढही संरचनाओं में राहत-बचाव के लिए ज़रूरी थे।
इसके अलावा, भारतीय नौसेना के युद्धपोत भी पहले से श्रीलंका के पास थे। INS Vikrant और INS Udaygiri से भी राहत सामग्री — राशन, तम्बू आदि — भेजी गई।
IAF और भारतीय नौसेना के हेलिकॉप्टर (Mi-17, Chetak) भी तैनात किए गए, ताकि बाढ़-प्रभावित इलाकों में एयरलिफ्ट, बचाव और राहत कार्य तेज़ी से हो सकें।
भारत की मदद न सिर्फ सामान तक सीमित रही — IAF ने कई भारतीय नागरिकों और अन्य फंसे हुए लोगों को भी सुरक्षित निकालने (evacuation) में मदद की।
राहत, बचाव और नागरिकों की पुनर्वास — ground operations
NDRF की टीमें, IAF हेलिकॉप्टर व विमान, और नौसेना विमान और जहाज़ मिलकर ground-level बचाव कार्य कर रही हैं। बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को खोजने, सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने और प्राथमिक जरूरतों — रेशन, पानी, तम्बू, दवाई — उपलब्ध कराने का काम जारी है।
कोलंबो के हवाई अड्डे (Bandaranaike International Airport) पर 24×7 इमरजेंसी हेल्प-डेस्क स्थापित की गई है, जहाँ फंसे हुए भारतीय नागरिकों को खाना-पानी, सूचना और सुरक्षित निकासी की सुविधा दी जा रही है।
रत ने अब तक लगभग 27 टन तक राहत सामग्री भेजी है — वायु तथा समुद्री मार्ग से — और आगे भी मदद भेजने की प्रक्रिया जारी है।
घायल, असहाय, वृद्ध, बच्चे — सभी के लिये प्राथमिक चिकित्सा, सुरक्षा और पुनर्वास की कोशिश जारी है। स्थानीय प्रशासन, श्रीलंकाई अधिकारियों, भारतीय दलों और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के संपर्क में राहत-कार्यों का समन्वय हो रहा है।
नागरिकों की निकासी और पुनर्वतन
IAF ने विशेष उड़ानों के माध्यम से श्रीलंका से फंसे भारतीय नागरिकों की निकासी शुरू की — शुरुआती दिन में ही सैकड़ों को सुरक्षित भारत लाया गया।
उदाहरण के लिए, एक IL-76 विमान रविवार शाम को थिरुवनंतपुरम पहुँचा, जिसमें 237 केरल निवासी (Keralites) फंसे हुए थे।
इसके अलावा, अन्य sorties द्वारा दिल्ली और अन्य शहरों के लिए यात्रियों को एयरलिफ्ट किया गया। कई भारतीयों के अलावा, कुछ विदेशी नागरिक और श्रीलंकाई स्थानीय लोग भी बचाए गए।
भारत की उच्चायोग (High Commission) ने फंसे हुए लोगों के लिए हेल्प-डेस्क, व्हाट्सऐप हेल्पलाइन नंबर जारी किया है, ताकि उन्हें मदद और जानकारी मिल सके।
क्या यह भारत-श्रीलंका सहयोग का नया अध्याय है? — चुनौतियाँ, सराहना और आगे की राह
सहयोग की मिसाल
- Operation Sagar Bandhu से स्पष्ट हुआ कि भारत, क्षेत्रीय आपदाओं पर सिर्फ सीमांत देशों में ही नहीं, बल्कि पड़ोसी मित्र देशों में भी राहत पहुंचा सकता है।
- IAF, NDRF, नौसेना — तीनों शाखाओं का संयुक्त, त्वरित और समन्वित प्रयास — एक मजबूत संदेश है कि आपदा के समय मानवता संविधान से आगे है।
- राहत सामग्री, बचाव दल, नागरिकों की निकासी, प्राथमिक सुविधा — सब एक साथ भेज कर भारत ने ‘First Responder’ की भूमिका निभाई है। चुनौतियाँ और जटिलताएँ
- श्रीलंका में प्रभावित इलाकों में बाढ़, भूस्खलन, सड़क अवरोध, बिजली–पानी का अव्यवस्थित होना — राहत और बचाव को बेहद कठिन बना रहा है।
- लोगों की संख्या लाखों में है; मलबा, जलमग्न इलाके, ढही संरचनाएँ — इन सबका सामना करना मुश्किल है।
- समय, संसाधन, और मौसम की अप्रत्याशितता — राहत-कार्य को निरंतर चुनौती दे रही है। आगे क्या — सुझाव एवं ज़रूरतें
- राहत कार्यों को और अधिक व्याप्त किया जाए — खाद्य, पानी, दवाई, चिकित्सा, तम्बू, संक्रमण नियंत्रण, और पुनर्वास पर ध्यान।
- प्रभावितों की पुनरायोग्यता (rehabilitation) — ताकि वे सिर्फ बचाए न जाएँ, बल्कि घर/स्वास्थ्य/आजीविका वापस पा सकें।
- पुनर्निर्माण और बाढ़/भूस्खलन-रोधी संरचनाओं का निर्माण — दीर्घकालीन रणनीति ज़रूरी।
- बेहतर आपदा पूर्व चेतावनी व्यवस्था, जल-प्रबंधन, और क्षेत्रीय सहयोग — ताकि ऐसे प्राकृतिक आपदाओं से बचाव संभव हो।
निष्कर्ष
चक्रवाती तूफान Ditwah ने श्रीलंका को बेहद प्रभावित किया है — बाढ़, भूस्खलन, लाखों प्रभावित, सैकड़ों मृत व लापता। इस संकट के बीच भारत ने न केवल कूटনৈতিক चेहरे पर बल्कि मानवता और आपसी भाईचारे के आधार पर सहायता भेजी। Operation Sagar Bandhu के तहत IAF, NDRF, नौसेना और अन्य संस्थाओं का समन्वित प्रयास एक सकारात्मक उदाहरण है, जो यह दिखाता है कि आपदा-प्रबंधन में सहयोग और आपसी समर्थन कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
लेकिन राहत — केवल शुरुवात है। अब एक लंबा और कठिन सफर बचाव, पुनर्वास और पुनर्निर्माण का है। अगर यह संयुक्त प्रयास निरंतर बने रहे, और दीर्घकालीन रणनीति अपनाई जाए — तो प्रभावितों को सिर्फ जीवन ही नहीं, बल्कि उम्मीद भी लौट सकती है।
