अफ्रीका में USAID की फंडिंग वापसी: सुरक्षा संकट की नई आशंकाएँ

अफ्रीका के कई कमजोर और संघर्षग्रस्त देशों में अंतरराष्ट्रीय सहायता संस्थाओं का योगदान स्थिरता, विकास और शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। इनमें अमेरिकी विदेश नीति सहायता संस्था USAID (United States Agency for International Development) की भूमिका लंबे समय से निर्णायक रही है। लेकिन हाल ही में USAID ने अफ्रीका के एक राजनीतिक और आर्थिक रूप से कमजोर देश से अपना फंडिंग वापस लेने का निर्णय लिया है, जिसने क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने और आईएसआईएस जैसे चरमपंथी संगठनों की गतिविधियों के विस्तार की आशंकाओं को जन्म दे दिया है।

आर्थिक संकट और स्थानीय संस्थाओं पर प्रभाव

USAID की सहायता केवल वित्तीय ही नहीं होती; यह स्वास्थ्य, शिक्षा, खाद्य सुरक्षा, लोकतांत्रिक संस्थाओं, महिला सशक्तिकरण और मानवाधिकार जैसे क्षेत्रों में भी मूलभूत ढांचा खड़ा करती है। फंडिंग रुकने का सीधा असर उन स्थानीय संस्थाओं पर पड़ता है जो पहले से ही संसाधनों के अभाव में जूझ रही होती हैं।
कई एनजीओ और सामाजिक कार्यक्रम USAID की मदद से ही चल रहे थे—जैसे कि ग्रामीण स्कूलों के लिए शिक्षा सामग्री, महिलाओं के लिए माइक्रो-फाइनेंस, और पोषण योजनाएँ। फंडिंग हटते ही ये कार्यक्रम अचानक ठप पड़ जाते हैं, जिससे सामाजिक असंतोष बढ़ता है और युवाओं में बेरोज़गारी व निराशा गहराती है।

सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर खतरा

अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में पहले से ही आतंकवादी संगठनों की पकड़ मजबूत होती जा रही है। जब सरकारें कमजोर हों, सुरक्षा बल सीमित हों और जनता में नाराजगी बढ़े—तो चरमपंथी गुटों को पनपने का मौका मिल जाता है।
USAID की फंडिंग बंद होने से स्थानीय सुरक्षा परियोजनाएँ, सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम और चरमपंथ-रोधी शिक्षा अभियान रुक सकते हैं। इससे वह खाली स्थान बन जाता है जिसकी तलाश ISIS जैसे संगठनों को रहती है।
ऐसे समूह आमतौर पर गरीबी और असुरक्षा से जूझ रहे युवाओं को आर्थिक लालच देकर अपने साथ मिलाने की कोशिश करते हैं, और यह रणनीति कई बार सफल भी रही है।

राजनीतिक अस्थिरता का खतरा

अचानक की गई फंडिंग वापसी उस देश की राजनीतिक स्थिति को भी झकझोर सकती है। इसमें दो तरह के प्रभाव देखने को मिलते हैं:

  1. सरकार पर बढ़ता दबाव: जनता को मिला बाहरी सहयोग खत्म होते ही सरकार विरोध की आवाजें तेज हो जाती हैं।
  2. विदेशी हस्तक्षेप का बढ़ना: जब एक बड़ी शक्ति पीछे हटती है, तो प्रतिस्पर्धी देश या समूह अपने प्रभाव को बढ़ाने का प्रयास करते हैं — जिससे भू-राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है। आगे का रास्ता क्या है?

USAID का निर्णय चाहे रणनीतिक, राजनीतिक या आर्थिक कारणों से लिया गया हो, लेकिन इसके दुष्परिणाम बेहद जटिल हो सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि:

अफ्रीकी यूनियन और पड़ोसी देश तुरंत सुरक्षा सहयोग बढ़ाएँ।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय संवाद के माध्यम से वैकल्पिक सहायता व्यवस्था तैयार करे।
स्थानीय सरकारें युवाओं को रोजगार और शिक्षा से जोड़ने के लिए त्वरित कदम उठाएँ।

निष्कर्ष

USAID की फंडिंग वापसी केवल एक वित्तीय मुद्दा नहीं है — यह एक व्यापक मानवीय, सामाजिक और सुरक्षा संकट की शुरुआत भी बन सकती है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो अफ्रीका के इस कमजोर देश में आईएसआईएस जैसी गतिविधियों का उभार वैश्विक शांति और क्षेत्रीय स्थिरता दोनों के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है।

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