रूस-यूक्रेन तनाव के बीच कीव पर बड़े हमले की खबरें, हालात फिर गंभीर

रूस-यूक्रेन तनाव के बीच कीव पर बड़े हमले की खबरें, हालात फिर गंभीर
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को लगभग तीन वर्ष होने जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद तनाव कम होने के बजाय और अधिक गहराता दिखाई दे रहा है। हाल के दिनों में यूक्रेन की राजधानी कीव पर बड़े पैमाने पर हमले की खबरें सामने आई हैं, जिसने न केवल यूक्रेन बल्कि पूरे यूरोप और वैश्विक राजनीति में चिंता की लहर पैदा कर दी है। इन हमलों को रूस-यूक्रेन संघर्ष के अब तक के सबसे गंभीर चरणों में से एक माना जा रहा है।
कीव पर हमले की खबरें: क्या है स्थिति?
यूक्रेनी अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कीव और उसके आसपास के क्षेत्रों में मिसाइल और ड्रोन हमलों की तीव्रता अचानक बढ़ गई है। कई इलाकों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं, जिससे आम नागरिकों में भय का माहौल बन गया। कीव प्रशासन ने एहतियातन हवाई हमले का अलर्ट जारी किया और लोगों से बंकरों व सुरक्षित स्थानों में जाने की अपील की।
हालांकि हमलों से हुए वास्तविक नुकसान और हताहतों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि राजधानी को निशाना बनाना रूस की रणनीति में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।
रूस की रणनीति में बदलाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि कीव पर हमले रूस की बदली हुई सैन्य रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। पहले जहां रूस का फोकस पूर्वी यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र तक सीमित माना जा रहा था, वहीं अब राजधानी पर हमले यह दर्शाते हैं कि रूस राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
कीव न केवल यूक्रेन की राजनीतिक राजधानी है, बल्कि यह देश की प्रशासनिक, आर्थिक और प्रतीकात्मक शक्ति का केंद्र भी है। ऐसे में राजधानी पर हमला यूक्रेनी नेतृत्व और जनता के मनोबल को तोड़ने की रणनीति मानी जा रही है।
यूक्रेन की प्रतिक्रिया
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि रूस जानबूझकर नागरिक ठिकानों को निशाना बना रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अधिक सैन्य और मानवीय सहायता की मांग दोहराई।
यूक्रेनी सेना का दावा है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही मार गिराया, लेकिन कुछ हमले रिहायशी इलाकों के करीब भी हुए, जिससे बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा।
आम नागरिकों पर प्रभाव
कीव पर बढ़ते हमलों का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। स्कूल, अस्पताल और सार्वजनिक परिवहन बार-बार बाधित हो रहे हैं। कई परिवारों ने एक बार फिर शहर छोड़कर सुरक्षित इलाकों या पड़ोसी देशों की ओर पलायन करने का फैसला किया है।
मानवीय संगठनों के अनुसार, सर्द मौसम, बिजली कटौती और लगातार हमलों के कारण मानवाधिकार संकट और गहराने की आशंका है। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बताई जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
कीव पर हमलों की खबरों के बाद अमेरिका, यूरोपीय संघ और नाटो देशों ने रूस की कड़ी आलोचना की है। कई पश्चिमी देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और युद्ध नियमों का उल्लंघन बताया है।
कुछ देशों ने रूस पर नए प्रतिबंधों की संभावना के संकेत दिए हैं, जबकि अन्य ने यूक्रेन को और उन्नत हथियार प्रणालियाँ देने की बात कही है। वहीं रूस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि वह केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है।
वैश्विक राजनीति पर असर
रूस-यूक्रेन युद्ध का असर केवल इन दो देशों तक सीमित नहीं है। कीव पर हमले की खबरों ने एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार, खाद्य सुरक्षा और भू-राजनीतिक संतुलन को प्रभावित किया है।
तेल और गैस की कीमतों में अस्थिरता देखी जा रही है, जबकि यूरोप में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। कई विश्लेषक इसे नई शीत युद्ध जैसी स्थिति की ओर बढ़ता कदम मान रहे हैं।
शांति वार्ता की संभावनाएं?
इन हमलों के बीच शांति वार्ता की संभावनाएं कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं। हालांकि कुछ देश मध्यस्थता की कोशिशों की बात कर रहे हैं, लेकिन मौजूदा हालात में दोनों पक्षों के रुख काफी सख्त दिख रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक सैन्य दबाव जारी रहेगा, तब तक किसी ठोस समझौते की उम्मीद कम ही है।
निष्कर्ष
कीव पर बड़े हमले की खबरें यह संकेत देती हैं कि रूस-यूक्रेन युद्ध एक बार फिर नए और अधिक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। राजधानी को निशाना बनाना न केवल सैन्य बल्कि राजनीतिक संदेश भी देता है। इस संघर्ष का असर आम नागरिकों, क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक व्यवस्था पर गहराता जा रहा है।
अब पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ते हैं या कूटनीति के जरिए किसी समाधान की राह निकलती है।
