इंडिगो की 67 उड़ानें रद्द

इंडिगो की 67 उड़ानें रद्द, खराब मौसम ने हवाई यात्रा को बुरी तरह प्रभावित किया
नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में अचानक बदले मौसम ने हवाई यातायात को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। घने कोहरे, तेज़ हवाओं और बारिश के कारण देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी इंडिगो (IndiGo) को एक ही दिन में अपनी 67 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। इस फैसले से हजारों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, वहीं एयरपोर्ट्स पर अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला।
मौसम बना बड़ी चुनौती
उत्तर भारत के कई राज्यों—दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान—में घना कोहरा छाया रहा। दृश्यता बेहद कम होने के कारण कई हवाई अड्डों पर उड़ानों का संचालन सुरक्षित नहीं रह गया। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दृश्यता कई बार 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई, जिससे टेक-ऑफ और लैंडिंग में दिक्कतें आईं। इसी तरह पूर्वी और दक्षिणी भारत के कुछ हिस्सों में बारिश और तेज़ हवाओं ने उड़ानों को प्रभावित किया।
इंडिगो का बयान
इंडिगो एयरलाइंस ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि यात्रियों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों के चलते कुछ उड़ानों को रद्द करना पड़ा, जबकि कई उड़ानों में देरी हुई। एयरलाइन ने यात्रियों से अनुरोध किया कि वे अपनी उड़ान की स्थिति की जानकारी एयरलाइन की वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर जांचते रहें।
इंडिगो ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रभावित यात्रियों को वैकल्पिक उड़ानों में समायोजित करने, पूर्ण रिफंड या बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के रीशेड्यूलिंग की सुविधा दी जा रही है।
यात्रियों की परेशानी
उड़ानें रद्द होने की खबर मिलते ही एयरपोर्ट्स पर यात्रियों की लंबी कतारें लग गईं। कई यात्री घंटों तक जानकारी का इंतजार करते रहे। खासतौर पर वे लोग ज्यादा परेशान दिखे जिन्हें शादी, परीक्षा या व्यावसायिक बैठकों के लिए समय पर पहुंचना था।
दिल्ली एयरपोर्ट पर फंसे एक यात्री ने बताया,
“मेरी फ्लाइट सुबह 7 बजे की थी, लेकिन कोहरे के कारण पहले देरी हुई और फिर रद्द कर दी गई। अब मुझे शाम की दूसरी फ्लाइट में शिफ्ट किया गया है, जिससे पूरा दिन बर्बाद हो गया।”
अन्य एयरलाइंस पर भी असर
सिर्फ इंडिगो ही नहीं, बल्कि अन्य घरेलू एयरलाइंस की उड़ानें भी प्रभावित हुईं। कई उड़ानों को डायवर्ट किया गया, जबकि कुछ को घंटों तक रनवे पर ही इंतजार करना पड़ा। हालांकि इंडिगो की उड़ानों की संख्या अधिक होने के कारण असर ज्यादा व्यापक रहा।
एयरपोर्ट्स पर अतिरिक्त इंतज़ाम
मौसम की गंभीरता को देखते हुए एयरपोर्ट प्रशासन ने अतिरिक्त इंतजाम किए। यात्रियों को जानकारी देने के लिए हेल्प डेस्क बढ़ाए गए, वहीं एयरपोर्ट लाउंज में भीड़ बढ़ने से बैठने की व्यवस्था पर दबाव पड़ा। सुरक्षा जांच और इमिग्रेशन काउंटरों पर भी लंबी कतारें देखी गईं।
DGCA और मौसम विभाग की भूमिका
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एयरलाइंस को सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। DGCA ने स्पष्ट किया कि कम दृश्यता की स्थिति में केवल प्रशिक्षित पायलट और विशेष उपकरणों से लैस विमान ही उड़ान भर सकते हैं।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, उत्तर भारत में अगले कुछ दिनों तक कोहरे की स्थिति बनी रह सकती है। विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि सुबह और देर रात के समय दृश्यता बेहद कम रह सकती है, जिससे हवाई, रेल और सड़क यातायात प्रभावित हो सकता है।
आर्थिक असर
उड़ानों के रद्द होने से एयरलाइंस को आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ता है। ईंधन खर्च, ग्राउंड स्टाफ, यात्रियों को रिफंड और वैकल्पिक व्यवस्था—इन सबका सीधा असर एयरलाइन के परिचालन खर्च पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सर्दियों के मौसम में लगातार खराब मौसम एयरलाइंस की समय-सारिणी और मुनाफे पर असर डालता है।
यात्रियों के लिए सलाह
विशेषज्ञों और एयरलाइंस ने यात्रियों को कुछ महत्वपूर्ण सलाह दी है:
यात्रा से पहले उड़ान की स्थिति की जांच करें।
एयरलाइन द्वारा भेजे गए SMS और ईमेल अलर्ट पर ध्यान दें।
एयरपोर्ट समय से पहले पहुंचें।
वैकल्पिक यात्रा योजनाएं तैयार रखें, खासकर सर्दियों में।
भविष्य की तैयारी
एयरलाइन उद्योग लगातार तकनीकी सुधारों पर काम कर रहा है ताकि खराब मौसम के प्रभाव को कम किया जा सके। आधुनिक नेविगेशन सिस्टम, बेहतर प्रशिक्षण और उन्नत रनवे लाइटिंग जैसी सुविधाएं धीरे-धीरे बढ़ाई जा रही हैं। फिर भी, प्राकृतिक परिस्थितियों के सामने पूरी तरह नियंत्रण संभव नहीं है।
निष्कर्ष
इंडिगो की 67 उड़ानों का रद्द होना यह दर्शाता है कि मौसम किस तरह हवाई यात्रा को प्रभावित कर सकता है। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया यह फैसला जरूरी था, लेकिन इससे आम लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। आने वाले दिनों में यदि मौसम की स्थिति नहीं सुधरती, तो हवाई यात्रियों को और सतर्क रहने की आवश्यकता होगी।
खराब मौसम ने एक बार फिर यह याद दिला दिया है कि तकनीक के इस दौर में भी प्रकृति की ताकत के आगे मानव व्यवस्था सीमित है।
