देश भर में मनमोहन सिंह की पुण्यतिथि पर यादें ताज़ा

26 दिसंबर 2025, आज भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि है। देश भर में राजनीतिक नेता, समाजसेवी, आर्थिक विशेषज्ञ और आम नागरिक उनके योगदान को याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। वरिष्ठ राजनीतिज्ञ से लेकर युवा कार्यकर्ता तक सब उनकी विनम्रता, दूरदर्शी नेतृत्व और शांति-प्रिय राजनीति को याद कर रहे हैं।

मनमोहन सिंह का निधन 26 दिसंबर 2024 को नई दिल्ली के AIIMS में हुआ था, जब वे 92 वर्ष के थे। उनके निधन के बाद देश में सात दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया था तथा उन्हें पूर्ण राज्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई थी।

आज की पुण्यतिथि के अवसर पर देश के राजनीतिक नेताओं से लेकर विद्वानों तक, कई संगठनों और आम लोगों ने सोशल मीडिया, सार्वजनिक भाषण और कार्यक्रमों में उन्हें याद किया।

कांग्रेस का भावभीना श्रद्धांजलि

कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने आज सुबह से ही मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि दी। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा, तथा अन्य वरिष्ठ नेताओं ने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर उनके जीवन, व्यक्तित्व और नेतृत्व को याद किया।

कांग्रेस पार्टी ने कहा कि मनमोहन सिंह के नेतृत्व ने भारत की अर्थव्यवस्था और लोकतंत्र को मजबूती दी थी, और उनकी निस्वार्थ सेवा, दूरदर्शिता, विनम्रता और शोध-आधारित नीति-निर्माण को हमेशा याद रखा जाएगा।

खड़गे ने कहा कि मनमोहन सिंह एक सत्यनिष्ठ, दृढ़ निश्चयी और साहसी व्यक्तित्व थे, जिन्होंने देश की प्रगति में अमिट योगदान दिया। प्रियंका गांधी ने उन्हें “भारत की प्रगति के लिए समर्पित एक गरिमामय राजनेता” कहा।

विरोधी दलों और अन्य राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

आज देश के विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं ने मनमोहन सिंह को याद किया। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि “देश हमेशा उनके योगदान को याद रखेगा और उन्हें श्रद्धा-सुमन अर्पित करेगा।”

कांग्रेस विरोधी नेताओं की यादें भी आज खूब साझा हुईं। Times Now की रिपोर्ट के अनुसार कुछ राजनैतिक हस्तियों ने उनके शांत स्वभाव और आर्थिक योगदान को मुख्य रूप से याद किया।

सशक्त अर्थव्यवस्था और लोकतंत्र का योगदान

मनमोहन सिंह को भारत की आर्थिक उदारीकरण की मुख्य कड़ी के रूप में याद किया जाता है। वे पहले फाइनेंस मिनिस्टर रहे जब भारत ने 1991 में बड़े आर्थिक सुधार लागू किये थे। विशेषज्ञ मानते हैं कि इन सुधारों ने भारत को वैश्विक आर्थिक मंच पर एक मजबूत प्रतियोगी राष्ट्र के रूप में स्थापित किया.

इसके अलावा, उनके नेतृत्व में सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम और महात्मा गाँधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) जैसे दूरगामी सुधार लागू हुए, जो भारतीय लोकतंत्र की पारदर्शिता और सामाजिक सुरक्षा को मजबूती देते हैं।

आज के कई लेखों में इस पक्ष पर जोर दिया गया है कि उनकी नीतियाँ और विकास-उन्मुख फैसले आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्पद हैं।

आम नागरिकों और युवा वर्ग की यादें

देश भर के आम नागरिक भी आज सोशल मीडिया और स्थानीय कार्यक्रमों में मनमोहन सिंह के बारे में अपने अनुभव और यादें साझा कर रहे हैं। उनकी सादगी, विनम्रता और निष्पक्ष निर्णय-क्षमता आज भी युवाओं के बीच प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।

कई लोगों ने अपनी यादों में बताया कि मनमोहन सिंह लोकप्रियतम प्रधानमंत्री नहीं मात्र राजनीतिक प्रतिष्ठा के लिए प्रसिद्ध रहे, बल्कि देश के हित में ठोस निर्णय लेने वाले नेता के रूप में इतिहास में अपनी पहचान बनायी।

वैश्विक नेताओं की प्रतिक्रियाएँ

हालांकि यह पहली पुण्यतिथि है, पिछले वर्ष उनके निधन पर कई वैश्विक नेताओं ने श्रद्धांजलि दी थी। अमेरिका, फ्रांस, रूस और अन्य देशों के वरिष्ठ राजनयिकों ने मनमोहन सिंह को एक महान राजनेता, अर्थशास्त्री और भारत-विश्व संबंधों के मजबूतकर्ता के रूप में याद किया।

अमेरिका के संयुक्त राज्य के विदेश मंत्री ने कहा था कि उन्होंने यू.एस.–भारत रणनीतिक साझेदारी को मजबूत किया, और फ्रांस तथा अन्य देशों ने उन्हें मित्र, दूरदर्शी और समर्पित नेता बताया।

पुण्यतिथि का भाव और समाज में असर

आज की पुण्यतिथि पर व्यापक रूप से चर्चाएँ हो रही हैं कि राजनीतिक मतभेदों के पार भी मनमोहन सिंह का सम्मान बरकरार है। उनकी सादगी, नीति-निर्माण की गहराई और जनहित के फैसले आज भी छात्रों, शोध-कर्ताओं और नीति-निर्माताओं के बीच विषय बने हुए हैं।

बहुत से सामाजिक समूहों ने आज चर्चा-सभा, रैलियाँ और विशेष कार्यक्रम आयोजित कर उनके जीवन, योगदान और भारत की विकास यात्रा में उनके योगदान को याद किया।

निष्कर्ष: एक यादगार विरासत

आज जो देश याद कर रहा है, वह केवल एक राजनेता या प्रधानमंत्री नहीं हैं; बल्कि एक ऐसे नेता को याद कर रहा है जिसने ज्ञान, शांति, संतुलित निर्णय-क्षमता और सामाजिक न्याय की भावना को अपने राजनीतिक जीवन का मूल बनाया।

उनकी धैर्यपूर्ण नेतृत्व शैली, आर्थिक सुधारों की दिशा में दृढ़ता, और सूक्ष्म लेकिन दूरदर्शी नीतिगत निर्णय आज भी देश की राजनीति और नीति-निर्माण में मिसाल के रूप में देखे जाते हैं।

आज की पुण्यतिथि उन मूल्यों को ताज़ा कर देती है, जो भारत को एक विकसित, समावेशी और सम्मानित लोकतंत्र के रूप में स्थापित कर रहे हैं।

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