
दिल्ली-NCR में घना कोहरा और बिगड़ा AQI: जनजीवन अस्त-व्यस्त, उड़ानें-यातायात प्रभावित
दिल्ली-एनसीआर में आज सुबह से ही घने कोहरे और बेहद खराब वायु गुणवत्ता (AQI) ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया। सर्द मौसम, कम दृश्यता और प्रदूषण के घातक स्तर ने आम नागरिकों से लेकर परिवहन व्यवस्था तक पर व्यापक असर डाला। राजधानी दिल्ली सहित नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और आसपास के इलाकों में कोहरे की मोटी चादर छाई रही, जिससे सड़क, रेल और हवाई यातायात प्रभावित हुआ। इसी बीच दिल्ली एयरपोर्ट पर पायलट-पैसेंजर विवाद भी सुर्खियों में रहा, जिसने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया।
घना कोहरा: दृश्यता में भारी गिरावट
सुबह के समय कई इलाकों में दृश्यता 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई। इंडिया गेट, राजपथ, आईटीओ, अक्षरधाम, द्वारका एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और एनएच-48 जैसे प्रमुख मार्गों पर वाहन रेंगते नजर आए। ट्रैफिक पुलिस को जगह-जगह अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा। स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र, दफ्तर जाने वाले कर्मचारी और दैनिक यात्री घंटों जाम में फंसे रहे। कई जगहों पर सड़क हादसों की भी खबरें आईं, हालांकि बड़े हादसों से बचाव के लिए पुलिस और प्रशासन ने सतर्कता बरती।
वायु गुणवत्ता बेहद खराब
कोहरे के साथ-साथ प्रदूषण का स्तर भी गंभीर बना रहा। AQI कई इलाकों में ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किया गया। PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कणों की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच गई, जो सांस संबंधी बीमारियों, आंखों में जलन, गले में खराश और सिरदर्द जैसी समस्याएं पैदा कर सकती हैं। डॉक्टरों ने बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को घर के अंदर रहने, मास्क पहनने और अनावश्यक बाहरी गतिविधियों से बचने की सलाह दी।
उड़ानों पर असर, एयरपोर्ट पर अफरातफरी
घने कोहरे का सबसे बड़ा असर इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर देखा गया। कम दृश्यता के कारण कई उड़ानों में देरी हुई, कुछ को डायवर्ट किया गया और कुछ उड़ानें रद्द भी करनी पड़ीं। यात्रियों को घंटों तक टर्मिनल पर इंतजार करना पड़ा। इसी दौरान एक उड़ान में देरी को लेकर पायलट और यात्रियों के बीच तीखी बहस का मामला सामने आया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। यात्रियों ने समय पर सूचना न मिलने और असुविधा का आरोप लगाया, जबकि एयरलाइन और पायलट पक्ष ने सुरक्षा कारणों से देरी को जरूरी बताया। एयरपोर्ट प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए अतिरिक्त स्टाफ तैनात किया और यात्रियों से संयम बरतने की अपील की।
रेल और सड़क यातायात भी प्रभावित
कोहरे का असर रेल सेवाओं पर भी पड़ा। उत्तर रेलवे की कई लंबी दूरी की ट्रेनें देरी से चलीं। कुछ ट्रेनों को आंशिक रूप से रद्द या री-शेड्यूल किया गया। रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ बढ़ गई और पूछताछ काउंटरों पर लंबी कतारें दिखीं। सड़क यातायात में भी बस सेवाओं की गति धीमी रही। दिल्ली परिवहन निगम (DTC) और निजी बस ऑपरेटरों ने ड्राइवरों को सावधानी बरतने और फॉग लाइट्स का उपयोग करने के निर्देश दिए।
प्रशासनिक कदम और प्रतिबंध
बिगड़ती वायु गुणवत्ता को देखते हुए प्रशासन ने प्रदूषण नियंत्रण उपायों को सख्ती से लागू किया। निर्माण कार्यों पर निगरानी बढ़ाई गई, धूल नियंत्रण के लिए पानी का छिड़काव किया गया और खुले में कचरा जलाने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई। वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने विशेष जांच अभियान चलाया। स्कूलों को एहतियातन ऑनलाइन कक्षाएं चलाने की सलाह दी गई, हालांकि अंतिम फैसला स्थानीय परिस्थितियों पर छोड़ा गया।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि इस तरह का मौसम और प्रदूषण मिलकर ‘साइलेंट किलर’ साबित हो सकता है। लंबे समय तक खराब AQI में रहने से फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। अस्पतालों में सांस संबंधी शिकायतों वाले मरीजों की संख्या में इजाफा देखा गया। विशेषज्ञों ने एन-95 मास्क के इस्तेमाल, घर के अंदर एयर प्यूरीफायर चलाने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी।
मौसम विभाग का पूर्वानुमान
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत में ठंडी हवाओं की कमी और नमी के कारण अगले कुछ दिनों तक सुबह और रात में घना कोहरा बने रहने की संभावना है। हल्की हवा चलने या पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से स्थिति में कुछ सुधार हो सकता है, लेकिन तब तक नागरिकों को सतर्क रहने की जरूरत है। विभाग ने वाहन चालकों को धीमी गति से चलने, सुरक्षित दूरी बनाए रखने और फॉग लाइट्स का उपयोग करने की सलाह दी है।
नागरिकों की प्रतिक्रिया
घने कोहरे और प्रदूषण से परेशान नागरिकों ने सोशल मीडिया पर प्रशासन से ठोस और दीर्घकालिक समाधान की मांग की। लोगों का कहना है कि हर साल सर्दियों में यही हाल होता है और अस्थायी उपायों से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलता। पर्यावरण विशेषज्ञों ने भी प्रदूषण के मूल कारणों—वाहन उत्सर्जन, निर्माण धूल, औद्योगिक प्रदूषण और पराली जलाने—पर प्रभावी नियंत्रण की जरूरत पर जोर दिया।
निष्कर्ष
दिल्ली-एनसीआर में घना कोहरा और बिगड़ा AQI एक बार फिर यह याद दिलाता है कि पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य आपस में गहराई से जुड़े हैं। जब तक प्रदूषण नियंत्रण के लिए दीर्घकालिक और सख्त नीतियां लागू नहीं होतीं, तब तक हर सर्दी में ऐसे हालात बनते रहेंगे। फिलहाल, नागरिकों, प्रशासन और परिवहन एजेंसियों—तीनों को मिलकर सावधानी और सहयोग के साथ इस चुनौती का सामना करना होगा, ताकि जान-माल का नुकसान कम से कम हो और जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य हो सके।
