दिल्ली में प्रदूषण पर बड़ा ऐक्शन: BS-6 से कम मानक वाली गाड़ियाँ बैन, बिना वैध PUC के पेट्रोल नहीं

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की लगातार गंभीर होती स्थिति को देखते हुए सरकार और प्रशासन ने आज से कड़े और व्यापक प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। इन उपायों के तहत BS-6 (भारत स्टेज-6) से कम उत्सर्जन मानक वाली गाड़ियों के दिल्ली में चलने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। साथ ही, जिन वाहनों के पास वैध PUC (Pollution Under Control) सर्टिफिकेट नहीं है, उन्हें पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं दिया जाएगा। यह निर्णय दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के खतरनाक स्तर, स्वास्थ्य जोखिम और सर्दियों में स्मॉग की आशंका को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

पृष्ठभूमि: क्यों जरूरी था यह फैसला

पिछले कुछ हफ्तों से दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) कई इलाकों में “बहुत खराब” से “गंभीर” श्रेणी में दर्ज किया गया। वाहनों से निकलने वाले धुएँ, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण गतिविधियाँ, कचरा-जलाना और पराली का संयुक्त प्रभाव प्रदूषण को बढ़ाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली के शहरी प्रदूषण में वाहन उत्सर्जन का बड़ा योगदान है—खासतौर पर पुराने और कम मानक वाले वाहनों का।

क्या है BS-6 मानक और क्यों अहम

BS-6 उत्सर्जन मानक 2020 से देशभर में लागू हैं। इसके तहत:
डीज़ल वाहनों में NOx और PM (नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर) का उत्सर्जन काफी कम होता है।
पेट्रोल वाहनों में सल्फर कंटेंट और अन्य प्रदूषक नियंत्रित रहते हैं।
आधुनिक कैटेलिटिक कन्वर्टर और इंजन टेक्नोलॉजी से धुआँ कम निकलता है।
BS-6 से कम मानक (BS-3, BS-4) वाली गाड़ियाँ अपेक्षाकृत अधिक प्रदूषण करती हैं, इसलिए इन्हें अस्थायी नहीं बल्कि तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया गया है।

नए नियमों का विस्तृत विवरण
1) BS-6 से कम मानक वाली गाड़ियाँ

दिल्ली की सड़कों पर प्रवेश और संचालन दोनों पर रोक।
बाहर से आने वाली ऐसी गाड़ियों को भी सीमाओं पर ही रोका जाएगा।
आवश्यक सेवाओं (एम्बुलेंस, दमकल, पुलिस) को अलग श्रेणी में रखा गया है।

2) बिना वैध PUC के पेट्रोल नहीं

सभी पेट्रोल पंपों को PUC सत्यापन अनिवार्य।
डिजिटल/क्यूआर-आधारित जांच और रियल-टाइम रिकॉर्डिंग की व्यवस्था।
नियम उल्लंघन पर वाहन मालिक के साथ-साथ पंप संचालक पर भी कार्रवाई।

3) निगरानी और प्रवर्तन

ट्रैफिक पुलिस, परिवहन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों की संयुक्त टीमें।
प्रमुख चौराहों, सीमाओं और पेट्रोल पंपों पर विशेष चेकिंग ड्राइव।
CCTV और ANPR कैमरों से नंबर प्लेट पहचान।

दंड और जुर्माने

प्रतिबंधित वाहन चलाने पर भारी जुर्माना, बार-बार उल्लंघन पर वाहन जब्ती तक की कार्रवाई।
बिना PUC ईंधन लेने/देने पर आर्थिक दंड और लाइसेंस संबंधी सख्ती।
नियम तोड़ने वाले व्यावसायिक वाहनों पर अतिरिक्त पेनल्टी।

आम जनता पर प्रभाव

इन फैसलों का सीधा असर पुराने वाहन मालिकों पर पड़ेगा। कई लोग वैकल्पिक व्यवस्था—BS-6 वाहन, CNG/इलेक्ट्रिक वाहन, या पब्लिक ट्रांसपोर्ट—की ओर रुख कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि यह असुविधा अस्थायी है, लेकिन स्वास्थ्य लाभ दीर्घकालिक होंगे।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट और वैकल्पिक उपाय

DTC और क्लस्टर बसों की संख्या और फ्रीक्वेंसी बढ़ाने के निर्देश।
मेट्रो सेवाओं में पीक-ऑवर अतिरिक्त ट्रेनें।
कार-पूलिंग, वर्क-फ्रॉम-होम और स्कूलों के समय में लचीलापन जैसे उपायों पर जोर।
इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तेज़ी से बढ़ाने की योजना।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय

डॉक्टरों और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, हृदय रोग, बच्चों में फेफड़ों के विकास पर असर जैसे जोखिम बढ़ते हैं। त्वरित प्रतिबंधों से PM2.5 और NOx में कमी आ सकती है, जिससे अस्पतालों पर बोझ घटेगा।

उद्योग और व्यापार की प्रतिक्रिया

कुछ उद्योग संगठनों ने संक्रमण काल की मांग की है, वहीं पेट्रोल पंप संघों ने PUC सत्यापन के लिए तकनीकी सहयोग और स्पष्ट SOP की जरूरत बताई है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि डिजिटल सिस्टम से प्रक्रियाएँ सरल होंगी।

आगे की रणनीति

निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, खुले में कचरा-जलाने पर शून्य सहनशीलता।
ग्रीन कवर बढ़ाने और सड़क-धुलाई जैसी तात्कालिक कार्रवाइयाँ।
पराली-प्रबंधन के लिए अंतर-राज्यीय समन्वय।
दीर्घकाल में EV नीति, सार्वजनिक परिवहन का विस्तार और शहरी नियोजन में सुधार।

निष्कर्ष

दिल्ली में लागू यह सख्त कदम प्रदूषण से निपटने की दिशा में निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। BS-6 से कम मानक वाली गाड़ियों पर प्रतिबंध और बिना PUC पेट्रोल न मिलने का नियम न केवल अनुशासन बढ़ाएगा, बल्कि स्वास्थ्य-सुरक्षा को प्राथमिकता देगा। सरकार का संदेश स्पष्ट है—स्वच्छ हवा के लिए कठोर फैसले जरूरी हैं। अब यह नागरिकों, उद्योग और प्रशासन—तीनों की साझा जिम्मेदारी है कि नियमों का पालन कर राजधानी को सांस लेने लायक बनाया जाए।

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