प्रधानमंत्री मोदी का कार्यक्रम: पीएम मोदी आज ओमान के रक्षा उपप्रधानमंत्री के साथ आधिकारिक मुलाकात करेंगे

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज भारत-ओमान द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने के उद्देश्य से ओमान के रक्षा उपप्रधानमंत्री के साथ एक महत्वपूर्ण आधिकारिक मुलाकात करेंगे। यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब भारत खाड़ी क्षेत्र में अपने रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को और सुदृढ़ करने पर जोर दे रहा है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते लंबे समय से मजबूत रहे हैं और इस मुलाकात से सहयोग के नए आयाम खुलने की उम्मीद है।

भारत-ओमान संबंधों की पृष्ठभूमि

भारत और ओमान के संबंध सदियों पुराने हैं। समुद्री व्यापार, सांस्कृतिक संपर्क और आपसी विश्वास ने दोनों देशों को स्वाभाविक साझेदार बनाया है। ओमान खाड़ी क्षेत्र का एक ऐसा देश है जिसने भारत के साथ हमेशा संतुलित और मित्रतापूर्ण संबंध बनाए रखे हैं। आज भी बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक ओमान में कार्यरत हैं, जो दोनों देशों के बीच एक जीवंत सेतु का काम करते हैं।

राजनयिक स्तर पर भारत और ओमान नियमित रूप से उच्चस्तरीय संवाद करते रहे हैं। रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, निवेश और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है। प्रधानमंत्री मोदी की यह बैठक इसी निरंतर संवाद की कड़ी मानी जा रही है।

बैठक का एजेंडा और प्रमुख मुद्दे

सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और ओमान के रक्षा उपप्रधानमंत्री के बीच होने वाली बातचीत में कई अहम विषयों पर चर्चा होगी। इनमें प्रमुख रूप से रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी प्रयास, क्षेत्रीय स्थिरता और हिंद महासागर क्षेत्र में आपसी समन्वय शामिल हैं।

रक्षा सहयोग: दोनों देश संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और रक्षा उपकरणों के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर विचार कर सकते हैं।

समुद्री सुरक्षा: अरब सागर और हिंद महासागर में सुरक्षित नौवहन, समुद्री डकैती और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण जैसे विषयों पर विशेष जोर रहने की संभावना है।

आतंकवाद-रोधी सहयोग: वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनज़र खुफिया जानकारी साझा करने और आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त प्रयासों पर चर्चा हो सकती है।

आर्थिक और ऊर्जा सहयोग

हालांकि बैठक का मुख्य फोकस रक्षा और सुरक्षा से जुड़ा है, लेकिन आर्थिक और ऊर्जा सहयोग भी बातचीत का अहम हिस्सा रहेगा। ओमान ऊर्जा संसाधनों से समृद्ध देश है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। दोनों पक्ष तेल-गैस आपूर्ति, नवीकरणीय ऊर्जा और निवेश के नए अवसरों पर भी विचार कर सकते हैं।

भारत सरकार खाड़ी देशों के साथ आर्थिक साझेदारी को रणनीतिक दृष्टि से देखती है। ओमान में भारतीय कंपनियों की मौजूदगी और भारतीय प्रवासी समुदाय दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूती प्रदान करते हैं।

क्षेत्रीय और वैश्विक संदर्भ

यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में भू-राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। क्षेत्रीय स्थिरता, आपसी सहयोग और संवाद को बढ़ावा देना भारत की विदेश नीति की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। ओमान, अपने संतुलित कूटनीतिक रुख के कारण, क्षेत्र में शांति और संवाद का समर्थक रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी की इस बैठक को भारत की “पड़ोस प्रथम” और “विस्तारित पड़ोस” नीति के तहत भी देखा जा रहा है, जिसमें खाड़ी और पश्चिम एशिया के देशों के साथ मजबूत साझेदारी पर जोर दिया जाता है।

कूटनीतिक महत्व

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक केवल औपचारिक नहीं बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। रक्षा और सुरक्षा सहयोग के साथ-साथ यह मुलाकात भारत-ओमान संबंधों को राजनीतिक और कूटनीतिक मजबूती भी प्रदान करेगी। इससे दोनों देशों के बीच विश्वास और आपसी समझ को और बल मिलेगा।

भारतीय प्रवासी समुदाय के लिए संदेश

ओमान में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं। उच्चस्तरीय मुलाकातें अप्रत्यक्ष रूप से उनके हितों की सुरक्षा और कल्याण से भी जुड़ी होती हैं। दोनों देशों के नेतृत्व के बीच संवाद से प्रवासी समुदाय को स्थिर और सुरक्षित वातावरण मिलने की उम्मीद रहती है।

आगे की संभावनाएं

इस बैठक के बाद आने वाले समय में भारत और ओमान के बीच कुछ नए समझौते या संयुक्त पहलें सामने आ सकती हैं। रक्षा और सुरक्षा के अलावा व्यापार, शिक्षा, तकनीक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग को गति मिलने की संभावना है।

निष्कर्ष

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ओमान के रक्षा उपप्रधानमंत्री के बीच होने वाली आज की आधिकारिक मुलाकात भारत-ओमान संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यह बैठक न केवल द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करेगी, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा में भी सकारात्मक योगदान देगी। बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत और ओमान की यह साझेदारी दोनों देशों के साझा हितों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।

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