आज विजय दिवस: 16 दिसंबर 1971 की ऐतिहासिक विजय को नमन 🇮🇳

16 दिसंबर… यह सिर्फ़ एक तारीख़ नहीं, बल्कि भारत के इतिहास का वह स्वर्णिम अध्याय है, जहाँ साहस, बलिदान और राष्ट्रीय स्वाभिमान ने एक नई दिशा तय की। आज विजय दिवस पर हम 1971 के उस ऐतिहासिक युद्ध को नमन करते हैं, जिसने न केवल भारत की सैन्य क्षमता को विश्व पटल पर स्थापित किया, बल्कि मानवता और न्याय की जीत का भी प्रतीक बना।

1971 का युद्ध केवल सीमाओं का संघर्ष नहीं था। यह युद्ध उन लाखों लोगों की पीड़ा की पुकार था, जो तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में अमानवीय अत्याचारों का शिकार हो रहे थे। शरणार्थियों का सैलाब भारत की ओर बढ़ रहा था, और उनके दर्द ने भारत की आत्मा को झकझोर दिया। तब भारत ने केवल एक पड़ोसी देश के रूप में नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों के रक्षक के रूप में खड़े होने का साहस दिखाया।

जब भारतीय सैनिकों ने मोर्चा संभाला, तो उनके हाथों में सिर्फ़ हथियार नहीं थे, बल्कि देशवासियों की उम्मीदें थीं। बर्फ़ीली रातें, कीचड़ से भरे मैदान, और हर पल मौत का साया—इन सबके बीच हमारे जवानों का हौसला अडिग रहा। वे जानते थे कि यह लड़ाई केवल जीत की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सम्मान और शांति की है।

16 दिसंबर 1971 को ढाका में हुआ आत्मसमर्पण इतिहास का ऐसा क्षण था, जिसने पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया। 93,000 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों का समर्पण—यह सिर्फ़ सैन्य विजय नहीं थी, यह भारत की रणनीतिक सूझबूझ, राजनीतिक नेतृत्व और सैनिकों के अदम्य साहस की संयुक्त सफलता थी। उसी दिन बांग्लादेश का जन्म हुआ, और एक नया राष्ट्र आशा के साथ दुनिया के मानचित्र पर उभरा।

इस विजय के पीछे अनगिनत कहानियाँ छिपी हैं—माँ की आँखों में आँसू, पिता का गर्व, पत्नी का इंतज़ार और बच्चों की मासूम दुआएँ। कई वीर सपूत लौटकर नहीं आए, लेकिन वे अमर हो गए। उनकी कुर्बानी आज भी तिरंगे की शान बनकर लहराती है।

विजय दिवस हमें याद दिलाता है कि शांति का मार्ग हमेशा आसान नहीं होता। कभी-कभी अन्याय के विरुद्ध खड़े होने के लिए साहसिक निर्णय लेने पड़ते हैं। यह दिन हमें यह भी सिखाता है कि राष्ट्र की असली ताक़त उसकी एकता, अनुशासन और नैतिक मूल्यों में निहित होती है।

आज जब हम विजय दिवस मना रहे हैं, तो यह केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए संकल्प लेने का दिन भी है। संकल्प—कि हम अपने सैनिकों के बलिदान को कभी व्यर्थ नहीं जाने देंगे। संकल्प—कि देश की एकता और अखंडता पर कोई आँच नहीं आने देंगे।

आइए, आज हम सब मिलकर उन वीरों को नमन करें, जिनकी बदौलत हम गर्व से कह सकते हैं—भारत विजयी था, भारत विजयी है, और भारत विजयी रहेगा।
जय हिंद।

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