महाराष्ट्र में AI-संचालित पुलिस सिस्टम: 1100 थानों में विस्तृत ऐतिहासिक कदम

महाराष्ट्र सरकार ने अपने पुलिस बल मेंAI-आधारित अत्याधुनिक पुलिसिंग प्लेटफॉर्म “MahaCrimeOS AI” को राज्य के सभी1100 पुलिस थानों में तैनात करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यह पहल डिजिटल प्रौद्योगिकी के ज़रिए अपराध नियंत्रण और साइबर अपराध की जांच को तेज़, प्रभावी और स्मार्ट बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

AI सिस्टम का उद्देश्य और कार्यप्रणाली

“MahaCrimeOS AI” एककृत्रिम बुद्धिमत्ता-समर्थित साइबर अपराध जांच मंच है, जिसे Microsoft India Development Center (IDC), महाराष्ट्र सरकार के विशेष प्रयोजन वाहनMARVEL और हैदराबाद स्थित साइबर सुरक्षा कंपनीCyberEye के साथ साझेदारी में विकसित किया गया है।
इस सिस्टम का उद्देश्य है:

  • साइबर अपराध कीतेज़ और सटीक पहचान करना,
  • जांच प्रक्रिया मेंसमय कम करना,
  • ऑफ़लाइन प्रक्रियाओं कोऑटोमेटिक और डिजिटल बनाना,
  • मामलों केडेटा विश्लेषण को आसान बनाना।

यह AI प्लेटफॉर्म:

  • डिजिटल साक्ष्य, स्क्रीनशॉट, URLs, मोबाइल नंबर और अन्य डिजिटल डेटा को बहुत जल्दी प्रक्रियात करता है,
  • बहुभाषी दस्तावेज़ों (हिंदी, अंग्रेज़ी, मराठी) को समझकर सटीक फाइलिंग देता है,
  • अधिकारी कोAI सहायक के रूप में “कॉपिलॉट” सहायता प्रदान करता है।

राज्य-व्यापी रोलआउट: 1100 थानों में विस्तार

इस AI प्रणाली का सफल परीक्षण पहले नागपुर जिले के 23 थानों में किया गया था, जहाँ इसे अप्रैल 2025 से लागू किया जा रहा था। परीक्षण के दौरान, पुलिस अधिकारियों ने देखा कि मामलों कीप्रक्रिया और जांच समय रूप से काफी त्वरित हुई — जिन्हें पहले महीनों में पूरा करना होता था, वे अब कुछ सप्ताहों और दिनों में हो रहे थे।

12 दिसंबर 2025 कोमाइक्रोसॉफ्ट AI टूर 2025 के दौरान मुख्यमंत्रीदेवेन्द्र फडणवीस, Microsoft केसीईओ सत्य नडेला और पुलिस प्रतिनिधियों ने घोषणा की कि इस AI-आधारित प्लेटफॉर्म को अब राज्य के सभी 1100 पुलिस थानों में लागू किया जाएगा। ([AajTak][5])

मुख्यमंत्री ने कहा,

हमारा उद्देश्य है कि एआई का उपयोग नैतिक, ज़िम्मेदारी से जनता के भले के लिए किया जाए। इससे न केवल अपराध नियंत्रण बेहतर होगा, बल्कि नागरिकों को भी अधिक सुरक्षित महसूस होगा।

AI प्लेटफॉर्म के प्रमुख लाभ

  1. तेज़ और स्मार्ट जांच

MahaCrimeOS AI की मदद से पुलिस अफसर:

  • केसफाइल तुरंत तैयार कर सकते हैं,
  • डेटा एकत्र करने में लगने वाला समय घटा सकते हैं,
  • जटिल डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण करना सीख सकते हैं।
    उदाहरण के तौर पर, एक नागपुर निवासी नीतू वाई के साइबर फ्रॉड केस में, शिकायत दर्ज करने और जांच प्रक्रिया को पूरा होने में समय काफी कम लगा। इसकी वजह थी AI-आधारित ऑटोमैटिक डाटा प्रोसेसिंग और डिजिटल वर्कफ़्लोज़।
  1. बहुभाषा समर्थन

यह सिस्टम दस्तावेज़ों को अंग्रेज़ी, हिंदी और मराठी में समझ सकता है, जिससे पुलिस अधिकारियों को अलग-अलग भाषाओं में शिकायतों और सबूतों का विश्लेषण करने में आसानी होती है।

  1. ऑटोमेटेड वर्कफ़्लो और रिपोर्टिंग

AI-सिस्टम:

  • मोबाइल नंबर, URLs, बैंक विवरण आदि को पैटर्न में जोड़ता है,
  • संबंधित कानूनी फ़्रेमवर्क के आधार पर आगे की कार्रवाई सुझाता है,
  • डेटा को डिजिटल रूप से संग्रहित रखता है।
  1. अधिक आत्म-विश्वास और क्षमता

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इससे उनकी कार्य क्षमता बढ़ी है और वे जटिल मामलों का सामना आत्म-विश्वास के साथ कर पा रहे हैं। AI उन्हें कार्रवाई के लिये मार्गदर्शन और सुझाव देता है, जिससे वे बेहतर निर्णय ले सकते हैं।

तकनीकी आधार और साझेदारी

  • Microsoft Azure OpenAI Service और Microsoft Foundry तकनीक का उपयोग करता है,
  • AI सहायक उपकरण, ऑटोमेटेड वर्कफ़्लो, और क्लाउड सुरक्षा के साथ जुड़ा है,
  • जांच प्रोटोकॉल को मानकीकृत और पुलिसों के काम को डिजिटल रूप देता है।

सरकारी विशेष प्रयोजन वाहनMARVEL (Maharashtra Advanced Research and Vigilance for Enforcement of Reformed Laws) को AI समाधानों को कानून प्रवर्तन में तेजी से लागू करने के लिये बनाया गया है।

साइबर अपराध और सामाजिक प्रभाव

महाराष्ट्र सहित भारत में साइबर अपराध लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2024 में लाखों साइबर अपराध की घटनाएँ दर्ज की गईं, जिनसे भारी आर्थिक और सामाजिक नुकसान हुआ।
इन चुनौतियों से निपटने के लिये AI-आधारित जांच प्लेटफॉर्म:

  • शिकायतों को जल्दी दर्ज करता है,
  • फर्जी वेबसाइटों और फ्रॉड नेटवर्क का पता लगाता है,
  • अपराधियों को ट्रैक करने में मदद करता है।
    इससे आम नागरिकों को कुछ मामलों मेंतेज़ राहत और समर्थन भी मिला है, जैसे शिकायतों का निराकरण और पुलिस की प्रतिक्रिया में सुधार।

सीमा और चुनौतियाँ

हालाँकि यह तकनीक बहुत उपयोगी है, इसके साथ कुछ चुनौतियाँ भी जुड़ी हैं:

  • सत्यापन और गोपनीयता सुनिश्चित करना एक बड़ा प्रश्न है;
  • AI आधारित निर्णयों के लिए स्पष्ट मानकों की आवश्यकता है;
  • अधिकारियों के लिये तकनीकी प्रशिक्षण महत्वपूर्ण है।

राज्य सरकार का कहना है कि वेनैतिक और जिम्मेदार AI के उपयोग की दिशा में स्पष्ट नियमों और दिशानिर्देश विकसित कर रहे हैं ताकि नागरिकों के अधिकार सुरक्षित रहें और पुलिसिंग में विश्वास बढ़े।

भविष्य की दिशा

महाराष्ट्र की इस पहल को पूरे देश मेंडिजिटल पुलिसिंग के मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
विशेष रूप से:

  • अन्य राज्य भी AI-आधारित प्लेटफॉर्म अपनाने की सोच रहे हैं,
  • पुलिसिंग में AI-सहायता को व्यापक रूप से मान्यता मिल रही है।

यह कदमडिजिटल इंडिया और सुरक्षित समाज के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है।

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