
वेनेज़ुएला: विपक्षी नेता का “सीक्रेट मिशन” और लोकतंत्र की राह
कराकस/ओस्लो, 12 दिसंबर 2025।
वेनेज़ुएला की प्रमुख विपक्षी नेता मारिया कोरिना माचाडो का देश से गोपनीय और जोखिमपूर्ण निकास (secret mission) अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर रहा है। 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार जीतने वाली माचाडो ने लगभग एक साल तक चुपके में छिपकर रहने के बाद देश छोड़ा और नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में पुरस्कार प्राप्त किया। यह कदम न केवल वेनेज़ुएला के राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर रहा है, बल्कि वैश्विक शक्ति समीकरण में अमेरिका और रूस‑चीन के बीच संघर्ष भी बढ़ा रहा है।
- कौन हैं मारिया कोरिना माचाडो?
मारिया कोरिना माचाडो वेनेज़ुएला की प्रमुख विपक्षी नेता और लोकतंत्र समर्थक राजनीतिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने 2023 में विपक्षी बलों के बीच सबसे व्यापक समर्थन प्राप्त किया, लेकिन उन्हें निकोलस मादुरो की सरकार द्वारा 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा लेने से रोक दिया गया। उनीं नोबेल शांति पुरस्कार 2025 में “लोकतंत्र और शांतिपूर्ण राजनीतिक बदलाव के लिए उनके संघर्ष” के लिए सम्मानित किया गया।
माडुरो सरकार के तहत वेनेज़ुएला में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर नियंत्रण और विपक्ष पर भारी प्रतिबंधों का आरोप है, जिस कारण माचाडो और उनके समर्थकों को गिरफ्तारियों और नजरबंदी का सामना करना पड़ा।
- “सीक्रेट मिशन” का सच
2025 के अंत में माचाडो अचानक सार्वजनिक रूप से ओस्लो में दिखाई दीं, जहाँ उन्होंने नोबेल शांति पुरस्कार कार्यक्रम के दौरान अपने समर्थकों को संबोधित किया। लेकिन इससे पहले उनका वेनेज़ुएला से गोपनीय निकास एक आश्चर्य और विवाद दोनों रहा।
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गोपनीय निकास की कहानी:
माचाडो लगभग 11 महीनों तक छिपी रहीं, ताकि वे मादुरो प्रशासन की गिरफ्त से बच सकें।
उनके देश से निकलने के लिए एक गुप्त और जटिल योजना बनाई गई, जिसमें समुद्र और जमीन दोनों मार्गों का प्रयोग हुआ।
रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने कर्कश मौसम और रात के अंधेरे का फायदा उठाकर काराकस के पास से एक छोटी नाव में यात्रा की, बिना किसी रोशनी के समुद्र पार किया और फिर Curaçao पहुँची।
इसके बाद उन्हें एक निजी विमान के जरिए ओस्लो भेजा गया, जहाँ उनके परिवार और समर्थकों ने स्वागत किया।
कुछ मीडिया कवरेज के मुताबिक यह मिशन अमेरिकी और निजी सहयोग के माध्यम से संभव हुआ, और इसमें एक पूर्व अमेरिकी विशेष ऑप्स सदस्य और निजी बचाव कंपनी की भूमिका भी सामने आई। हालांकि, निर्णायक रूप से पुष्टि नहीं हुई कि यह अमेरिकी सरकार की प्रत्यक्ष कार्रवाई थी या निजी स्तर पर हुई सहायता।
- अमेरिका, मादुरो और अंतरराष्ट्रीय तनाव
माचाडो के निकास को केवल एक “व्यक्तिगत पलायन” नहीं माना जा रहा है बल्कि यह भूराजनीतिक संघर्ष का हिस्सा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने मादुरो सरकार के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं, जिसमें तेल टैंकरों की जब्ती, प्रतिबंध और सैन्य गतिविधियाँ भी शामिल हैं।
कुछ रिपोर्टों में अमेरिकी द यानी ट्रंप प्रशासन की गुप्त मानवीय और राजनीतिक रणनीतियाँ का ज़िक्र भी है, जिसमें मादुरो के पायलट को धोखे में लाकर विमान हाइजैक करवाने की योजना तक बताई गई है — हालांकि वह असफल रही।
मादुरो का कहना है कि ये सब विदेशी हस्तक्षेप और सत्ता बदलने की कोशिशें हैं, जो वेनेज़ुएला की संप्रभुता के खिलाफ हैं। उन्होंने कई बार अमेरिका की सैन्य धमकियों और अनुच्छेदों की कड़ी निंदा की है।
- नोबेल पुरस्कार और राजनीतिक प्रभाव
माचाडो का नोबेल शांति पुरस्कार जीतना भी विवाद के केंद्र में है। कई विश्लेषक इसे मादुरो शासन के खिलाफ वैश्विक प्रतिक्रिया का प्रतीक मानते हैं, जबकि कुछ इसे पश्चिमी देशों द्वारा लोकतंत्र समर्थक बयानबाज़ी के रूप में देखते हैं।
माचाडो ने पुरस्कार समारोह में कहा कि यह सम्मान “वेनेज़ुएला के पीड़ित लोगों” और लोकतंत्र के समर्थन में है। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही अपने देश वापस आएंगी और लोकतांत्रिक बदलाव के लिए संघर्ष जारी रखेंगी।
- मादुरो शासन का जवाब
मादुरो झुकने को तैयार नहीं है। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की यह कोशिशें उनके शासन को कमजोर करने के लिए हैं। उन्होंने कई बार अमेरिका और उसके समर्थकों को “वैश्विक साजिश” का आरोप लगाया है।
सरकार समर्थकों ने माचाडो की निकासी और नोबेल पुरस्कार को राजनीतिक प्रपोगैंडा बताया है, और देश में विपक्ष की गतिविधियों पर प्रतिबंधों को जारी रखा है।
- भविष्य की राह
मारिया कोरिना माचाडो की गोपनीय निकासी ने वेनेज़ुएला की राजनीति को नई दिशा दी है। यह न केवल देश के भीतर लोकतंत्र की बहस को तेज़ करेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मादुरो शासन के भविष्य पर पुनर्विचार करने पर मजबूर करेगा।
विश्लेषक मानते हैं कि अब वैश्विक दबाव, आर्थिक प्रतिबंध और घरेलू असंतोष मादुरो की स्थिति कमजोर कर सकता है, लेकिन इसके साथ ही राजनीतिक अस्थिरता और संघर्ष का जोखिम भी बढ़ता है।
इस बीच, माचाडो का कहना है कि वह अपने देश वापस लौटने की योजना बना रही हैं — लेकिन सुरक्षित और *लोकतांत्रिक बदलाव के साथ ही’।
