विश्व शेयर बाजारों में जबरदस्त सुधार, भारतीय शेयर सूचकांक हरे निशान में खुलने की उम्मीद
फेडरल रिज़र्व की ब्याज दर कटौती से निवेशकों का भरोसा बढ़ा; वैश्विक बाजारों में रौनक लौटी

विश्व भर के शेयर बाजारों में बुधवार को आशावाद की नई लहर देखने को मिली, जब अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve (फेड) ने लंबे समय बाद ब्याज दरों में कटौती की घोषणा की। फेड की इस नीतिगत ढील ने वैश्विक निवेशकों की धारणा को उल्लेखनीय रूप से मजबूत किया है, जिसका सकारात्मक असर एशियाई, यूरोपीय और उभरते बाजारों पर भी तेजी से दिखाई दे रहा है। विश्लेषकों की मानें तो इसका सबसे सीधा लाभ भारतीय शेयर बाजार को मिलेगा, जो गुरुवार को हरे निशान में खुलने और मजबूत तेजी दिखाने की प्रबल संभावना रखते हैं।

फेडरल रिज़र्व की दर कटौती: क्यों महत्वपूर्ण है?

फेड ने अपनी दो-दिवसीय बैठक के बाद नीतिगत दरों में 25 आधार अंकों (0.25%) की कटौती की।
यह कटौती इसलिए अहम है क्योंकि:

  • पिछले कई महीनों से अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर महंगाई का दबाव था।
  • ऊंची ब्याज दरों ने वहां के उद्योग और रोजगार बाजार को ठंडा करना शुरू कर दिया था।
  • निवेशकों को आशंका थी कि यदि ब्याज दरें ऊंची बनी रहीं, तो वैश्विक मंदी की आशंका जन्म ले सकती है।

ऐसे में फेड की यह दर कटौती संकेत देती है कि केंद्रीय बैंक अब अर्थव्यवस्था को सहारा देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे वित्तीय बाजारों में जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ी है।

वैश्विक बाजारों की प्रतिक्रिया

अमेरिकी बाजार में शानदार रैली

फेड के ऐलान के तुरंत बाद:

  • Dow Jones में 1.8% की तेज़ बढ़त
  • S&P 500 में लगभग 2.2% की उछाल
  • Nasdaq में टेक शेयरों के नेतृत्व में 2.7% की बढ़त

टेक, बैंकिंग, ऑटो और कंज्यूमर-सेक्टर के शेयरों में बड़ी खरीदारी देखने को मिली।

एशियाई बाजारों में जोश

फेड की नीति ढील का असर गुरुवार सुबह एशियाई बाजारों में एक स्पष्ट लहर के रूप में दिखा:

  • जापान का निक्केई 1.5% ऊपर
  • हांगकांग का हैंगसेंग 2% तक चढ़ा
  • दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1% से अधिक बढ़त में
  • शंघाई कंपोजिट हल्की बढ़त के साथ स्थिर

एशिया के बाजारों को राहत इसलिए भी मिली क्योंकि सस्ते डॉलर और कम ब्याज दरें उभरते देशों की ओर फंड के प्रवाह को बढ़ाती हैं।

यूरोपीय बाजारों में संतुलित तेजी

यूरोप के बाजारों में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला:

  • FTSE 100 में 0.8% की मजबूती
  • DAX (जर्मनी) में 1.2% का उछाल
  • CAC 40 (फ्रांस) में लगभग 1% की बढ़त

यूरोपीय निवेशक भी मानते हैं कि फेड की नीति में नरमी से वैश्विक व्यापार और मांग को सहयोग मिलेगा, जिससे यूरोपीय निर्यात को समर्थन मिल सकता है।

भारतीय बाजार पर इसका सीधा असर

भारतीय निवेशक लंबे समय से फेड की सख्त मौद्रिक नीति से सावधान थे, क्योंकि:

  • मजबूत डॉलर की वजह से विदेशी निवेशक (FPI) भारत सहित उभरते बाजारों से पैसा निकाल रहे थे।
  • ऊंची ब्याज दरों से वैश्विक जोखिम-प्रवृत्ति घट रही थी।
  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में कमी से निफ्टी और सेंसेक्स में अस्थिरता बढ़ी थी।

लेकिन अब परिदृश्य बदल सकता है।

FPI प्रवाह बढ़ने की संभावना

कम ब्याज दरों का मतलब है कि:

  • डॉलर की लागत कम होगी
  • फंड्स सस्ते मिलेंगे
  • उभरते बाजारों में उच्च रिटर्न की तलाश में निवेश बढ़ेगा

भारतीय अर्थव्यवस्था की बैलेंस्ड ग्रोथ, मजबूत कॉर्पोरेट आय और बेहतर जीडीपी अनुमानों के चलते भारत FPI के लिए पसंदीदा गंतव्य बन सकता है।

निफ्टी–सेंसेक्स के लिए आज की संभावित तस्वीर

फ़ेड की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय संकेतों की चमक को देखते हुए, आज भारतीय बाजार में:

  • सेंसेक्स में 400–600 अंकों की संभावित बढ़त
  • निफ्टी 150–200 अंक ऊपर खुल सकता है
  • बैंकिंग, आईटी, ऑटो एवं रियल-एस्टेट सेक्टर में तेजी की उम्मीद
  • डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत हो सकता है, जिससे आईटी और फार्मा शेयरों में सकारात्मक मूव दिखेगा

विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार शुरुआती घंटों में तेज उछाल दिखा सकता है, लेकिन सप्ताह के अंत तक रैली की स्थिरता अमेरिकी महंगाई आंकड़ों और घरेलू आर्थिक डेटा पर निर्भर करेगी।

कौन-से सेक्टर सबसे अधिक लाभान्वित होंगे?

  1. बैंकिंग और वित्तीय सेक्टर

फेड की दर कटौती से वैश्विक बॉन्ड यील्ड घटेगी, जिससे भारतीय बैंकों की वैल्यूएशन को सपोर्ट मिलेगा। स्टॉक जैसे:

  • HDFC Bank
  • ICICI Bank
  • SBI

में मजबूत खरीदारी की उम्मीद है।

  1. आईटी सेक्टर

कम ब्याज दरों से अमेरिका में कॉर्पोरेट खर्च बढ़ने की संभावना है। इसका फायदा:

  • TCS
  • Infosys
  • Wipro
  • HCL Tech

जैसी कंपनियों को मिलेगा।

  1. रियल-एस्टेट और कंज्यूमर सेक्टर

सस्ता कर्ज आवासीय मांग को बढ़ा सकता है। इसलिए:

  • DLF
  • Godrej Properties
  • Prestige

जैसे रियल-एस्टेट शेयरों में उत्साह दिख सकता है।

  1. मेटल और ऑटो सेक्टर

वैश्विक गतिविधि बढ़ने से कमोडिटी और ऑटो की मांग में सुधार हो सकता है। टाटा स्टील, JSW स्टील, मारुति और टाटा मोटर्स जैसे शेयरों में उछाल संभव है।

क्या जोखिम अभी भी मौजूद हैं?

फेड की दर कटौती भले बाजारों को राहत दे रही हो, लेकिन कुछ जोखिम बने हुए हैं:

  • अमेरिकी महंगाई अभी भी लक्ष्य से अधिक है
  • तेल की कीमतों में उछाल की आशंका
  • भू-राजनीतिक तनाव
  • डॉलर इंडेक्स में उतार-चढ़ाव

यदि फेड आने वाले महीनों में और दर कटौती नहीं करता, तो बाजार में अस्थिरता लौट सकती है।

निवेशकों के लिए रणनीतिक सलाह

  1. तेजी में खरीदारी करें, पर सीमित जोखिम के साथ
  2. डॉलर–रुपया पर नजर रखें
  3. आईटी, बैंकिंग और कंज्यूमर सेक्टर प्राथमिकता में रखें
  4. उच्च वैल्यूएशन वाले स्टॉक्स में सावधानी बरतें
  5. दीर्घकालिक निवेशक SIP जारी रखें

निष्कर्ष

फेडरल रिजर्व की ब्याज दर कटौती ने वैश्विक शेयर बाजारों को नई ऊर्जा दी है। अमेरिकी और एशियाई बाजारों की मजबूत शुरुआत से संकेत मिलते हैं कि आज भारतीय शेयर बाजार भी मजबूत तेजी के साथ खुल सकते हैं। निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ने से FPI प्रवाह में सुधार की संभावना भी दिखती है। हालांकि अल्पकालिक उतार–चढ़ाव से इंकार नहीं किया जा सकता, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से भारत का बाजार अब भी दुनिया के सबसे अधिक संभावनाशील बाजारों में गिना जाता है।

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