भारत व विदेश से बड़ी अंतरराष्ट्रीय और सुरक्षा से जुड़ी घटनाएं — देश और दुनियादारी से जुड़ी अन्य खबरों के बीच, विश्व-स्तर की घटनाओं पर भी ध्यान।

अंतरराष्ट्रीय और सुरक्षा घटनाएँ: देश–दुनिया का बड़ा अपडेट

दुनिया इस समय भू-राजनीतिक उथल-पुथल, सुरक्षा चुनौतियों, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और मानवीय संकटों के बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रही है। भारत भी इन परिवर्तनों से अछूता नहीं है—दक्षिण एशिया, इंडो-पैसिफ़िक, पश्चिम एशिया और वैश्विक राजनय में देश की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। नीचे बीते दिनों की कुछ सबसे अहम अंतरराष्ट्रीय और सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत है।

  1. इंडो–पैसिफ़िक में सामरिक तनाव बढ़ा — चीन की गतिविधियों पर वैश्विक सतर्कता

इंडो–पैसिफ़िक क्षेत्र में चीन द्वारा समुद्री दावों और सैन्य गश्त में बढ़ोतरी के बाद अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत जैसी देशों ने अपनी सुरक्षा रणनीति को और मजबूत किया है। दक्षिण चीन सागर में चीन के जहाजों की ‘आक्रामक नीतियों’ के बाद कई देशों ने संयुक्त निगरानी अभ्यास बढ़ाए हैं।
भारत की ओर से Andaman–Nicobar Command को सक्रिय रूप से मजबूत किया गया है ताकि हिंद महासागर में चीन की बढ़ती उपस्थिति का संतुलन किया जा सके।

यह क्षेत्र दुनिया का सबसे संवेदनशील भू-राजनीतिक क्षेत्र बन चुका है, जहाँ व्यापार, रणनीति और सैन्य शक्ति—तीनों की प्रतिस्पर्धा चरम पर है।

  1. रूस–यूक्रेन युद्ध: सर्दियों में लड़ाई तेज, ऊर्जा सुरक्षा पर असर

रूस–यूक्रेन संघर्ष अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश के साथ और अधिक गंभीर हो गया है। नई मिसाइल हमलों और ड्रोन युद्ध की वजह से यूक्रेन के ऊर्जा ढाँचे को भारी क्षति पहुँच रही है।
यूरोप की ऊर्जा सुरक्षा एक बार फिर संकट में है, और गैस की कीमतों में उछाल की आशंका जताई जा रही है।
भारत ने लगातार दोनों पक्षों के साथ संवाद बनाए रखते हुए “कूटनीतिक समाधान” का समर्थन किया है। वैश्विक स्तर पर हथियारों की खपत और सैन्य बजट में वृद्धि इस युद्ध का लंबा असर दिखाती है।

  1. पश्चिम एशिया में तनाव — इज़राइल–गाज़ा संघर्ष में नए मोड़

इज़राइल और गाज़ा के बीच जारी संघर्षों ने पश्चिम एशिया की सुरक्षा को फिर से अस्थिर किया है। मानवीय सहायता की कमी, अस्पतालों पर दबाव और सीमा विवादों ने स्थिति को और गंभीर बनाया है।
इज़राइल ने हाल ही में कई ‘सुरक्षा ऑपरेशन’ तेज किए हैं, जबकि संयुक्त राष्ट्र ने तत्काल युद्धविराम की अपील की है।
भारत ने मानवीय सहायता भेजने के साथ-साथ शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया है।

यह संघर्ष पूरे मध्य-पूर्व की स्थिरता के लिए चुनौती बना हुआ है, जहाँ तेल आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर प्रभाव पड़ सकता है।

  1. अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा चुनौती — ISIS-K की गतिविधियों में वृद्धि

अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान शासन के बीच ISIS-K की सक्रियता बढ़ने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है।
काबुल और प्रांतीय इलाकों में कई आतंकी हमले हुए, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि आतंकवाद का खतरा अभी समाप्त नहीं हुआ है।
भारत, जिसने अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के लिए मानवीय सहायता जारी रखी है, क्षेत्रीय सुरक्षा संवाद में भाग ले रहा है ताकि आतंकवादी नेटवर्क को रोकने की रणनीति विकसित की जा सके।

  1. अमेरिका–चीन संबंधों में उतार-चढ़ाव — तकनीकी व भू-रणनीतिक टकराव जारी

अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, टेक्नोलॉजी और सैन्य प्रभाव को लेकर प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई है।
AI, चिप तकनीक, 5G नेटवर्क और क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्रों में दोनों देश अपने प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
हाल ही में दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय वार्ता हुई, लेकिन ताइवान मुद्दे को लेकर मतभेद अब भी तीव्र हैं।

यह गतिरोध वैश्विक आपूर्ति शृंखला और व्यापार पर गहरा असर डाल सकता है।

  1. भारत की सुरक्षा रणनीति — सीमा प्रबंधन और रक्षा तैयारी पर फोकस

लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में चीन से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत लगातार अपनी सुरक्षा तैनाती मजबूत कर रहा है।
नई तकनीकें जैसे—

  • ड्रोन सर्विलांस
  • AI आधारित सीमा निगरानी
  • पर्वतीय युद्धक तैयारी
    —को प्राथमिकता दी जा रही है।

इसके अतिरिक्त, भारत ने कई देशों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाया है, जिनमें फ्रांस, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया प्रमुख हैं।

  1. भारत–जापान रक्षा संवाद — इंडो–पैसिफ़िक साझेदारी और मजबूत

भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय रक्षा वार्ता में इंडो-पैसिफ़िक क्षेत्र में मुक्त नौवहन, साइबर सुरक्षा और सैन्य सहयोग पर महत्वपूर्ण समझौते हुए।
दोनों देश Quad के सदस्य भी हैं और रणनीतिक स्तर पर सहयोग को और गहरा करने का फैसला किया है।

  1. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की माँग तेज

भारत समेत कई देशों ने संयुक्त राष्ट्र के ढांचे में सुधार की माँग को फिर उठाया है।
भारत का तर्क है कि विश्व राजनीति बदल चुकी है और UNSC में स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने का समय आ गया है।
कई अफ्रीकी देशों ने भी अपने प्रतिनिधित्व की मांग उठाई है।
वर्तमान अस्थिर वैश्विक परिदृश्य में UNSC सुधार की चर्चा और तेज हो गई है।

  1. साइबर सुरक्षा पर वैश्विक खतरा — AI आधारित साइबर हमलों में उछाल

विश्वभर की सुरक्षा एजेंसियों ने चेतावनी जारी की है कि AI-चालित साइबर हमले तेजी से बढ़ रहे हैं।
डेटा चोरी, बैंकिंग धोखाधड़ी, युद्धक ड्रोन सिस्टम और महत्वपूर्ण अवसंरचना पर हमलों का खतरा बढ़ गया है।
भारत ने भी अपनी राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति को अपडेट किया है।
CERT-In ने डिजिटल लेनदेन और सरकारी डेटा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

  1. WHO और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा — महामारी तैयारी पर जोर

WHO के अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हालिया बैठकों में “भविष्य की महामारी की तैयारी” पर वैश्विक सहमति मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
भारत पारंपरिक चिकित्सा, वैक्सीन निर्माण, और डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना के क्षेत्र में अपनी नेतृत्व भूमिका को आगे बढ़ा रहा है।

वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा अब राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा बन चुकी है।

समापन: दुनिया बदल रही है — सुरक्षा और कूटनीति नए दौर में

आज वैश्विक राजनीति केवल सैन्य शक्ति पर आधारित नहीं है—

  • आर्थिक स्थिरता
  • तकनीकी क्षमता
  • साइबर सुरक्षा
  • ऊर्जा सुरक्षा
  • जलवायु परिवर्तन
  • मानवीय संवेदनाएँ

—इन सभी का मिश्रण नई विश्व व्यवस्था को परिभाषित कर रहा है।

भारत की भूमिका इस बदलते परिदृश्य में बेहद महत्वपूर्ण है।
कूटनीति, सुरक्षा और वैश्विक साझेदारियाँ—तीनों मोर्चों पर भारत की सक्रियता विश्व-स्तर पर उसके प्रभाव को मजबूत कर रही है।

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