शेयर बाजार में भारी गिरावट— शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 472 अंक टूटा, निफ्टी भी लाल निशान में खुला

नई दिल्ली। घरेलू शेयर बाजार में आज सुबह के कारोबार की शुरुआत कमजोर रही। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स खुलते ही 472 अंकों की गिरावट के साथ फिसल गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी-50 भी लाल निशान में कारोबार करता दिखा। बाजार में शुरुआती घंटे में ही निवेशकों के बीच सतर्कता और घबराहट का माहौल देखा गया, जिसकी वजह से व्यापक स्तर पर बिकवाली का दबाव बना रहा।

शुरुआती कारोबार का हाल

सुबह के सत्र में बैंकिंग, आईटी, धातु, ऑटो और फार्मा जैसे प्रमुख सेक्टर्स में कमजोरी देखने को मिली। बड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली के चलते सेंसेक्स के अधिकतर घटक लाल निशान में रहे। निफ्टी-50 भी शुरुआती कारोबार में सपाट से कमजोर रुझान के साथ खुला और कुछ ही मिनटों में इसमें और गिरावट दर्ज की गई। मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों पर भी दबाव बना रहा, जिससे बाजार की चौड़ाई (market breadth) नकारात्मक बनी रही।

गिरावट के प्रमुख कारण

विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक संकेतों की कमजोरी, विदेशी बाजारों में उतार-चढ़ाव, कच्चे तेल की कीमतों में हलचल और निवेशकों की जोखिम लेने की घटती प्रवृत्ति जैसे कारक इस गिरावट के पीछे प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा:

  1. वैश्विक बाजारों का दबाव: एशियाई और अमेरिकी बाजारों में हालिया उतार-चढ़ाव का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा। विदेशी संकेत कमजोर रहने से घरेलू निवेशकों में भरोसा कुछ हद तक डगमगाया।
  2. डॉलर में मजबूती: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अन्य मुद्राओं में आई कमजोरी का सीधा प्रभाव उभरते बाजारों पर पड़ा, जिससे पूंजी निकासी की आशंका बढ़ी।
  3. कच्चे तेल की कीमतें: कच्चे तेल में उतार-चढ़ाव से आयात बिल और महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ीं, जिसका असर ऑटो और पेंट जैसे सेक्टर्स पर देखने को मिला।
  4. ब्याज दरों की आशंका: वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों के रुख को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। यदि दरों में सख्ती का दौर लंबा चलता है तो इक्विटी मार्केट पर दबाव बढ़ सकता है।
  5. मुनाफावसूली: हालिया तेजी के बाद निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली भी की, जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ा।

सेक्टरवार प्रदर्शन

  • बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं: निजी और सरकारी बैंकों के शेयर दबाव में रहे। एनबीएफसी कंपनियों में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई।
  • आईटी सेक्टर: आईटी शेयरों में विदेशी संकेतों के चलते कमजोरी रही। अमेरिका और यूरोप से मांग को लेकर चिंताओं का असर इस सेक्टर पर स्पष्ट दिखा।
  • धातु: वैश्विक कमोडिटी बाजारों में कमजोर रुझान का असर धातु कंपनियों पर पड़ा।
  • ऑटो: कच्चे माल की लागत और मांग को लेकर अनिश्चितता से ऑटो शेयर फिसले।
  • फार्मा: कुछ फार्मा शेयरों में बचाव की प्रवृत्ति दिखी, लेकिन कुल मिलाकर यह सेक्टर भी दबाव में रहा।

निवेशकों की रणनीति

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय में निवेशकों को जल्दबाजी में कोई फैसला लेने से बचना चाहिए। अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बीच दीर्घकालिक निवेशकों को मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर नजर बनाए रखनी चाहिए। साथ ही, पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखना और जोखिम प्रबंधन के नियमों का पालन करना जरूरी है।

विशेषज्ञों के मुताबिक:

  • गिरावट के दौरान गुणवत्ता वाले शेयरों में चरणबद्ध निवेश किया जा सकता है।
  • केवल अफवाह या भावनाओं में आकर खरीद-बिक्री से बचें।
  • सेक्टरल संतुलन बनाए रखें और अत्यधिक जोखिम वाले शेयरों से दूरी रखें।
  • नकदी का कुछ हिस्सा सुरक्षित रखना भी समझदारी हो सकती है, ताकि सही मौके पर निवेश किया जा सके।

विदेशी निवेशकों की भूमिका

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का मूड भी बाजार की दिशा निर्धारण में अहम भूमिका निभाता है। बीते दिनों एफआईआई की ओर से बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ी। यदि एफआईआई का रुख सकारात्मक होता है तो बाजार में तेजी लौटने की उम्मीद भी बन सकती है।

आगे का रुख

आने वाले सत्रों में वैश्विक संकेत, कच्चे तेल के दाम, डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंकों के बयान बाजार की दिशा तय करेंगे। घरेलू स्तर पर कंपनियों के तिमाही नतीजे और आर्थिक आंकड़े निवेशकों का भरोसा बढ़ा या घटा सकते हैं।

शेयर बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, लेकिन दीर्घकाल में भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है। ऐसे में, बाजार में आई गिरावट को अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है—बशर्ते निवेश सोच-समझकर और रणनीति के साथ किया जाए।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, आज की गिरावट ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। सेंसेक्स और निफ्टी की कमजोरी ने एक बार फिर यह याद दिलाया कि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया है। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे घबराहट में आकर निर्णय न लें, बल्कि धैर्य और विवेक के साथ अपने निवेश की समीक्षा करें। आने वाले दिनों में वैश्विक और घरेलू घटनाक्रम यह तय करेंगे कि बाजार किस दिशा में आगे बढ़ता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *