
Cyclone Ditwah से प्रभावित: दक्षिण तटीय राज्यों में हाई अलर्ट — तूफान Ditwah के कारण आंध्र प्रदेश व तमिलनाडु के तटीय इलाकों में सतर्कता जारी; आगाहियाँ जारी की गई हैं।
चक्रवाती तूफान Ditwah 26 नवंबर 2025 को बना था। यह 2025 के उत्तर भारतीय महासागर साइक्लोन सीज़न की एक सक्रिय प्रणाली थी। शुरू में यह एक कमजोर अवसाद (low) था, लेकिन धीरे-धीरे मजबूत होकर चक्रवात बन गया।
इस तूफान ने पहले पड़ोसी देश Sri Lanka में तबाही मचाई — भारी बारिश, बाढ़, भूस्खलन और अन्य आपदाओं के कारण सैकड़ों लोग मरे, काफी संख्या में लापता हुए या विस्थापित हुए। फिर Ditwah बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) में वापस आए और पूर्वी तटीय भारत — खासकर तमिलनाडु-पुडुचेरी तट एवं दक्षिणी आंध्र प्रदेश — की ओर बढ़ने लगा।
भारत में तूफान का नाम “Ditwah / दित्वाह / दितवाह” (अखबारों / एजेंसियों में थोड़े भिन्न रूप) चला। जैसा कि हम जानते हैं, पूर्व–तटीय राज्यों की भौगोलिक स्थितियों (तटीय ज़ोन, समुद्र के निकटवर्ती ज़िले, नदियों, डेल्टा भू भाग) की वजह से इन इलाकों को चक्रवात, उफान, तटीय बाढ़, और तेज़ हवाओं का ख़तरा अधिक रहता है। Ditwah ने उसी ख़तरे को पुनर्जीवित कर दिया।
तूफान का अनुमानित मार्ग और अलर्ट
- जैसा कि India Meteorological Department (IMD) की बुलेटिन में कहा गया है, Ditwah बंगाल की खाड़ी में दक्षिण-पश्चिम हिस्से में केन्द्रित था और उत्तर-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ रहा था। बीते 24 घंटे में इसकी गति लगभग 5 किमी/घंटा रही।
- IMD की चेतावनी के अनुसार, यह तूफान उत्तर तमिलनाडु–पुडुचेरी तटरेखा के समानांतर चलते हुए अगले 24 घंटे में तट से लगभग 25–50 किमी दूर रहने की संभावना थी; हालांकि “लैंडफॉल” (तट से टकराना) नहीं माना गया।
- इस दौरान, तमिलनाडु, पुडुचेरी और दक्षिणी आंध्र प्रदेश के लिए “रेड अलर्ट / ऑरेंज अलर्ट” जारी किया गया। तटीय जिलों के लिए समुद्र किनारे जाने, मछली पकड़ने, नावों आदि से बचने की सलाह दी गई।
- साथ ही, राहत-बचाव एजेंसियाँ जैसे NDMA / राज्य स्तरीय राहत दल सक्रिय कर दिए गए; तटीय जिलों में एनडीआरएफ / एसडीआरएफ की टीमें तैनात की गईं। तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में मौजूदा हालात
तमिलनाडु
- तमिलनाडु में, तूफान के कारण कई तटीय जिलों में भारी या अत्यधिक भारी बारिश हो चुकी है। कुछ जगहों पर बाढ़ जैसे हालात बन गए।
- चेतावनी के कारण कुछ तटीय इलाकों में समुद्री लहरों (हाई टाइड), तेज़ हवाओं, तथा उफनती समुद्री व लहरें की स्थिति बनी हुई है।
- प्रशासन की ओर से तटवर्ती इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पलायन करने, खतरे वाले किनारों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
- कई जिलों — जैसे नागपट्टिनम, रामनाथपुरम, कुड्डालोर, तिरुवारूर, तंजावुर, पुदुक्कोट्टई — को विशेष रूप से प्रभावित माना जा रहा है।
- प्रशासन ने राहत टीमें, गश्ती दल, लाइफगार्ड्स आदि तैनात कर दिये हैं, ताकि समुद्र किनारे या नदियों के पास लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
आंध्र प्रदेश (दक्षिण भाग) और पुदुचेरी
- आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों — विशेषकर दक्षिणी हिस्से — में भी भारी बारिश जारी होने की संभावना जताई गई है।
- तटीय इलाकों में समुद्री गतिविधियाँ और मछली पकड़ने वाली नौकाओं को बचाव संबंधी चेतावनियाँ दी गयी हैं; मछुआरों से समुद्र में जाने से परहेज़ करने को कहा गया है।
- प्रशासन और राहत कार्यों की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं — जिससे यदि बाढ़, तटीय जल उठाव या अन्य आपदा हुई, तो बचाव व राहत कार्य फौरन शुरू हो सके। सामाजिक, आर्थिक एवं मानव-संकट की संभावित चुनौतियाँ
- हिन्दी व क्षेत्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तमिलनाडु में कुछ स्थानों पर बाढ़ के कारण नागरिकों का विस्थापन हो चुका है — लोगों को सुरक्षित स्थानों (शेल्टर, स्कूल / सार्वजनिक भवन) में शिफ्ट किया जा रहा है।
- मछुआरों और तटीय कारोबार प्रभावित — समुद्र अशांत है, जहाज़/नाव से कार्य असंभव; इससे livelihood पर असर हो सकता है। यह एक दीर्घकालीन आर्थिक संकट की शुरुआत हो सकती है, खासकर उन वर्गों के लिए जो मासिक मजदूरी या मछली-व्यवसाय पर निर्भर हैं।
- कृषि एवं फ़सल संभावित प्रभावित — यदि उच्च जल स्तर, तटीय बाढ़ या जल-जमाव हुआ, तो तटीय और नदी किनारे बसे खेतों में फसलें डूब सकती हैं। इससे न सिर्फ फ़सल नष्ट हो सकती है बल्कि भविष्य में खाद्य सुरक्षा व किसानों की आमदनी जोखिम में होगी।
- बुनियादी संरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) खतरे में — सड़कों, पुलों, नदियों पर बने बाँधों / डैमों, तटीय बाड़ों (sea-walls), जल निकासी व्यवस्था आदि को नुकसान का खतरा है। इससे ट्रैफिक, परिवहन, बिजली-पानी, संचार, बाजार आदि प्रभावित हो सकते हैं।
- जन-स्वास्थ्य व आपदा प्रबंधन — जल-जमाव, बाढ़, गंदे पानी व समुद्री लहरों का खतरा रहने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ — जैसे वाटरबोर्न रोग, त्वचा/स्वास्थ्य अस्वस्थता, बचाव-राहत में देरी आदि — उत्पन्न हो सकती हैं। प्रशासनिक कदम, राहत एवं बचाव — तैयारियाँ
- तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और पुदुचेरी में रेड / ऑरेंज अलर्ट जारी। तटीय इलाकों को सबसे उच्च प्राथमिकता दी गयी।
- तटीय जिलों में राहत-बचाव दल (एनडीआरएफ / एसडीआरएफ / राज्य आपदा प्रबंधन दल) सक्रिय — समुद्र किनारे, बाढ़ ग्रस्त इलाकों, नदियों के पास विशेष निगरानी व बचाव-कार्य।
- आवश्यक हो तो स्थानीय प्रशासन ने तटीय इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों — स्कूल, शेल्टर, सरकारी भवन — में स्थानांतरित करने, साझा आश्रय देने की योजना। समुद्र किनारे और संवेदनशील क्षेत्रों में लोग जाने से बचने की चेतावनी।
- परिवहन में व्यवधान — कई फ्लाइटें रद्द, रेल सेवाओं में बदलाव; यात्रियों व आम लोग दोनों को सूचना व सहयोग जारी।
- आपदा-प्रबंधन इकाइयों द्वारा लोगों के लिए हेल्प-लाइन, बचाव-किट / राहत-सामग्री, त्वरित रेस्क्यू व मेडिकल व्यवस्था की तैयारियाँ। संभावित आगे की चुनौतियाँ और सावधानियाँ
- हालांकि तूफान थोड़ा कमजोर हुआ है; IMD की रिपोर्ट कहती है कि Ditwah “deep depression” में बदल गया है, लेकिन फिर भी भारी वर्षा, तेज हवाएं और समुद्री उफान के कारण तटीय इलाकों में स्थानीय बाढ़, जल-जमाव, सड़कों व जल-निकासी प्रणालियों का क्षति संभव है।
- समुद्री पर्यटन, मछली-व्यवसाय, तटीय नौकायन, जहाज़/नावों का संचालन — ये सब फिलहाल जोखिम में हैं। मछुआरों, नाविकों, तटीय मजदूरों को स्थिति स्पष्ट हो जाने तक समुद्र से दूर रहने की सलाह।
- कृषि एवं फसलें — यदि बाढ़ या जल-उठाव हुआ, तो तटीय व डेल्टा क्षेत्रों में फसलों को भारी नुकसान हो सकता है; सरकार / राज्य / केंद्र को त्वरित राहत पैकेज, मुआवज़ा, पुनर्वास आदि की योजना बनानी होगी।
- बुनियादी सुविधाओं की बहाली — सड़क, बिजली, पानी, संचार, आवास आदि प्रभावित हो सकते हैं। इससे रहने, आवागमन व आर्थिक गतिविधियों में व्यवधान हो सकता है।
- राहत-बचाव एवं पुनर्वास — प्रभावित परिवारों को अस्थायी आवास, भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं, आर्थिक सहायता इत्यादि की आवश्यकता पड़ेगी। राहत एजेंसियों, प्रशासन और नागरिकों को सतर्क रहना होगा। निष्कर्ष
चक्रवाती तूफान Ditwah, जिसने पहले श्रीलंका में ज़बरदस्त तबाही मचाई, अब भारत के दक्षिणी तटीय राज्यों — तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश व पुडुचेरी — के तटीय इलाकों के लिए एक भयावह प्राकृतिक चुनौती बनकर सामने आया है। हालांकि IMD और राज्य प्रशासन ने समय रहते रेड / ऑरेंज अलर्ट जारी कर, राहत-बचाव दलों को सक्रिय कर, लोगों को सतर्क किया — फिर भी यह तूफान निश्चित रूप से सामाजिक, आर्थिक, पर्यावरणीय और बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) स्तर पर भारी प्रभाव डालने में सक्षम है।
निश्चित रूप से, अगले 48–72 घंटे इस दृष्टि से निर्णायक होंगे कि बाढ़, समुद्री उफान, जल-जमाव, तटीय जलवृद्धि (sea-surge) आदि का व्यापक असर दिखाई देगा या नहीं। इसलिए जनता, प्रशासन, राहत व बचाव एजेंसियों को मिलकर — सतर्क रहकर, समय-समय पर सूचनाओं पर ध्यान देकर, और सुरक्षित स्थानों पर रहने की रणनीति अपनाकर — इस आपदा का सामना करना चाहिए।
इस बीच, सरकार व राज्य प्रशासन को कृषक, मछुआरे, तटीय मजदूर, और कम आमदनी वाले परिवारों को विशेष मदद, पुनर्वास, मुआवज़ा व राहत देने की योजना तत्काल तैयार करनी चाहिए — ताकि आपदा के दाग जल्दी भर सकें।
