नरेंद्र मोदी का कर्नाटक–गोवा दौरा शुरू: 28 नवम्बर 2025

आज, 28 नवंबर 2025, नरेंद्र मोदी (प्रधानमंत्री) अपने कर्नाटक–गोवा दौरे पर हैं। यह दौरा धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं धार्मिक–ऐतिहासिक पहलुओं से जुड़ा हुआ है।

यात्रा कार्यक्रम — 28 नवंबर 2025

सुबह करीब 11:30 बजे: प्रधानमंत्री कर्नाटक के उडुपी में Sri Krishna Matha का दौरा करेंगे। वहाँ वे शामिल होंगे Laksha Kantha Gita Parayana में — यह एक विशेष कार्यक्रम है जिसमें लगभग 1 लाख लोगों (छात्र, साधु, विद्वान और अन्य नागरिक) के साथ एक समान मंत्रोच्चारण (श्रीमद् भागवत गीता) किया जाएगा।

इसके साथ, वे मठ के सामने बने नए Suvarna Teertha Mantapa का उद्घाटन करेंगे; और साथ ही उस पवित्र खिड़की (Kanakana Kindi) के लिए तैयार “Kanaka Kavacha” को समर्पित करेंगे — यह वही खिड़की है जिससे भक्त संत Kanakadasa ने भगवान कृष्ण का दर्शन पाया था।

दोपहर / अपराह्न लगभग 3:15 बजे: प्रधानमंत्री गोवा के दक्षिणी हिस्से में स्थित Shree Samsthan Gokarn Partagali Jeevottam Math, Partagali (Canacona) पहुंचेंगे, जहां 550वीं-सालगिरह (Sardha Panchashatamanotsava) मनाई जा रही है।
यहाँ कार्यक्रमों में शामिल है — 77-फुट ऊँची कांस्य की भगवान Shri Ram की प्रतिमा का अनावरण; Ramayana Theme Park Garden का उद्घाटन; साथ ही एक विशेष डाक टिकट (postal stamp) और स्मृति सिक्का (commemorative coin) जारी करना। प्रधानमंत्री सभा को संबोधित भी करेंगे।

क्यों यह दौरा महत्वपूर्ण है

यह यात्रा धार्मिक-सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की तरफ़ एक बड़ा संकेत है — 800 से अधिक साल पुराने श्रीकृष्ण मठ और 550 साल पुराने Partagali Math जैसे प्राचीन धर्मिक संस्थानों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देना।
सामूहिक गीता-पाठ (Laksha Kantha Gita Parayana) जैसी पहल “सांप्रदायिक एकता, धार्मिक श्रद्धा और भारतीय संस्कृति” को बढ़ावा देने का प्रयास दिखाती है।
गोवा में श्रीराम की 77-फुट प्रतिमा और रामायण थीम पार्क जैसी पहलों से धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक पर्यटन और स्थानीय विकास की दिशा मिल सकती है।

संभावित सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनैतिक असर

धार्मिक त्योहार और आयोजन, विशेष रूप से ऐसे जो व्यापक जन-समूह को जोड़ते हैं, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती देते हैं — ऐसे आयोजन से केंद्र की नज़र में “धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत” को महत्व मिलता है।
गोवा जैसे राज्य में धार्मिक-पर्यटन की संभावनाओं को ताज़ा करना, स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन, धार्मिक पर्यटन और सामाजिक स्थिरता की दिशा में सहायक हो सकता है।
आगामी समय में, ऐसे दौरे और आयोजनों का असर राजनैतिक रूप से भी देखा जाएगा — जहाँ सरकार की सांस्कृतिक संवेदनशीलता, सामाजिक कार्यक्रमों और धार्मिक-लोकप्रिय पहलों पर जनता की प्रतिक्रिया मिलेगी।

गोवा में भव्य धार्मिक आयोजन और 77 फीट श्रीराम प्रतिमा

कर्नाटक के बाद प्रधानमंत्री गोवा पहुँचे, जहाँ वे श्री गोकरण पार्टगली जीवोत्तम मठ (कनकोना) में आयोजित 550वें वार्षिकोत्सव समारोह में भाग ले रहे हैं।
यहाँ प्रधानमंत्री ने:
77 फुट ऊंची भगवान श्रीराम की प्रतिमा का अनावरण
रामायण थीम गार्डन का उद्घाटन
स्मारक डाक टिकट और स्मृति सिक्का जारी किया

प्रधानमंत्री ने कहा:
“भगवान राम आस्था के साथ-साथ भारतीय संस्कृति के अनुशासन, सेवा और मर्यादा का जीवंत प्रतीक हैं।”
गोवा सरकार का दावा है कि इस परियोजना से राज्य के धार्मिक पर्यटन को एक नई पहचान मिलेगी।

पर्यटन और ब्लू इकॉनोमी पर ज़ोर

गोवा में प्रधानमंत्री ने समुद्री अर्थव्यवस्था यानी ब्लू इकॉनोमी को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि:
मछुआरों के लिए आधुनिक बंदरगाह सुविधाएँ
समुद्री पर्यटन
तटीय संरक्षण
सरकार की प्राथमिकता हैं।

इस दौरे से गोवा को एक अंतरराष्ट्रीय धार्मिक-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की नींव रखी जा रही है।

प्रतिक्रिया और बहस: समर्थन भी, सवाल भी
प्रधानमंत्री के इस दौरे को लेकर देशभर में मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं।

✅ समर्थन में आवाज़ें

कई धार्मिक संगठनों ने इसे “भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का प्रयास” बताया।
पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि इससे धार्मिक पर्यटन को नई उड़ान मिलेगी।
युवाओं के एक वर्ग ने गीता पाठ जैसे कार्यक्रमों को “मानसिक मजबूती और आत्म-विकास” से जोड़ा है।

❓ सवाल और आलोचना

वहीं विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए हैं:
क्या सरकार धार्मिक आयोजनों पर ज्यादा ध्यान दे रही है, लेकिन शिक्षा और महंगाई जैसे मुद्दों से ध्यान हटा रही है?
क्या सरकारी संसाधनों का धार्मिक कार्यक्रमों में प्रयोग उचित है?
क्या यह दौरा सांस्कृतिक कम और राजनीतिक ज़्यादा है?

विशेषज्ञों का कहना है कि:
“धर्म और राजनीति की सीमाएँ जब धुंधली होती हैं, तो जनसंवाद की परिभाषा बदल जाती है।”
हालांकि सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि यह दौरा “संस्कृति संरक्षण और पर्यटन विकास” का हिस्सा है।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन
दोनों राज्यों में प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए:
एसपीजी कमांडो
ड्रोन निगरानी
ट्रैफिक डायवर्जन

मेडिकल टीमों की तैनाती की गई है। प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है।

अर्थव्यवस्था और स्थानीय असर
विशेषज्ञ मानते हैं कि:
पर्यटन बढ़ेगा
स्थानीय रोजगार में वृद्धि होगी
होटल, टैक्सी, दुकानें, हस्तशिल्प उद्योग को फायदा होगा
यह दौरा छोटे व्यापारियों और स्थानीय व्यवसायों के लिए आर्थिक बूस्टर साबित हो सकता है।

निष्कर्ष

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कर्नाटक–गोवा दौरा राजनीति, धर्म, संस्कृति और विकास का संगम है। कोई इसे आध्यात्मिक पुनर्जागरण मान रहा है, तो कोई राजनीतिक रणनीति।
लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि इस दौरे ने पूरे देश का ध्यान दक्षिण भारत की संस्कृति और गोवा की धार्मिक पहचान की ओर खींचा है।

यदि सरकार धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ शिक्षा, रोजगार और महंगाई पर भी समान रूप से ध्यान देती है, तो यह यात्रा “सांस्कृतिक राष्ट्रवाद” के साथ “समावेशी विकास” की मिसाल बन सकती है।

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