Union Cabinet का बड़ा फैसला: देश में Rare Earth Permanent Magnet निर्माण के लिए ₹7,280 करोड़ की नई योजना
भारत सरकार ने आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई मजबूती देते हुए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। Union Cabinet ने देश में Rare Earth Permanent Magnet (REPM) के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ₹7,280 करोड़ की योजना को मंजूरी दे दी है। यह योजना न केवल भारत की औद्योगिक क्षमता को नया आयाम देगी, बल्कि रणनीतिक क्षेत्रों में विदेशी निर्भरता को भी कम करेगी।
Rare Earth Permanent Magnets तकनीकी दुनिया की रीढ़ माने जाते हैं। इलेक्ट्रिक वाहन, पवन ऊर्जा, रक्षा उपकरण, मोबाइल फोन, सेमीकंडक्टर, मेडिकल उपकरण और अंतरिक्ष तकनीक में इनकी बड़ी भूमिका है। ऐसे में सरकार की यह योजना भारत के औद्योगिक भविष्य को मजबूत पंख देने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

Rare Earth Permanent Magnet क्या होते हैं?

Rare Earth Permanent Magnets विशेष प्रकार के चुंबक होते हैं, जिनमें नीओडिमियम (Neodymium), प्रसेओडियम (Praseodymium), डिस्प्रोसियम (Dysprosium) और टर्बियम (Terbium) जैसे दुर्लभ तत्वों का प्रयोग किया जाता है। ये चुंबक अपनी असाधारण चुंबकीय शक्ति के लिए जाने जाते हैं और छोटी जगह में भी अधिक ऊर्जा उत्पन्न करने में सक्षम होते हैं।

आज के आधुनिक उपकरणों जैसे:

इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटर
विंड टर्बाइन
स्मार्टफोन
लैपटॉप
मिसाइल सिस्टम
उपग्रह तकनीक
मेडिकल स्कैनिंग मशीन

सब REPM पर निर्भर हैं।

योजना की मुख्य विशेषताएं

सरकार द्वारा स्वीकृत ₹7,280 करोड़ की योजना एक बहुआयामी रणनीति है। इसके तहत:

  1. घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन

देश में निजी और सरकारी कंपनियों को Rare Earth Magnet निर्माण के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा।

  1. Production Linked Incentive (PLI) मॉडल

योजना PLI ढांचे पर आधारित होगी, यानी उत्पादन बढ़ाने पर कंपनियों को वित्तीय प्रोत्साहन मिलेगा।

  1. नई विनिर्माण यूनिटों की स्थापना

Rare Earth के refining और magnet निर्माण के लिए नई फैक्ट्रियां स्थापित की जाएंगी।

  1. MSME और स्टार्टअप को सहयोग

स्टार्टअप्स और छोटे उद्योगों को तकनीकी सहायता और आसान ऋण मिलेगा।

  1. रिसर्च और डेवलपमेंट पर ज़ोर

देशी तकनीक विकसित करने पर विशेष फंडिंग होगी।

क्यों जरूरी है यह योजना?

  1. चीन पर निर्भरता कम करने के लिए

वर्तमान में Rare Earth Magnet उत्पादन में चीन का वैश्विक दबदबा है। भारत भी बड़ी मात्रा में चीन से आयात करता है। यह योजना उस निर्भरता को समाप्त करने की दिशा में एक प्रयास है।

  1. राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल

रक्षा उपकरणों में REPM का व्यापक उपयोग होता है। आत्मनिर्भरता से भारत अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं में आत्मनिर्भर बन सकेगा।

  1. ग्रीन एनर्जी मिशन को बढ़ावा

भारत का इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति और सौर ऊर्जा लक्ष्यों का भविष्य REPM पर आधारित है। आत्मनिर्भर उत्पादन इन लक्ष्यों को तेज करेगा।

  1. रोजगार के अवसर

नई इकाइयों के खुलने से हज़ारों युवाओं के लिए रोजगार के द्वार खुलेंगे।

भारत के पास कितना Rare Earth संसाधन है?

भारत के पास दुनिया के कुल Rare Earth भंडार का लगभग 5% हिस्सा मौजूद है। ओडिशा, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में इसकी अच्छी संभावनाएं हैं।

इसके बावजूद अब तक इसका व्यावसायिक उपयोग बहुत सीमित रहा है। यह योजना इसी कमजोरी को ताकत में बदलने का अवसर है।

उद्योग जगत पर प्रभाव

इस योजना से भारत में:

इलेक्ट्रिक वाहन की लागत घटेगी
इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं सस्ती होंगी
रक्षा उत्पादन स्वदेशी होगा
भारत ग्लोबल मैगनेट सप्लाई चेन में प्रमुख भूमिका निभाएगा

इसके साथ ही Make in India अभियान को नई गति मिलेगी।

ग्लोबल स्ट्रैटेजी में भारत की नई भूमिका

Rare Earth तत्वों को लेकर वैश्विक राजनीति भी तेज़ हो रही है। अमेरिका, जापान और यूरोप भी चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। भारत की यह योजना वैश्विक मंच पर उसे एक नया रणनीतिक खिलाड़ी बना सकती है।

संभावित चुनौतियां

हालाँकि योजना बहुत महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसके सामने कुछ चुनौतियां भी हैं:

पर्यावरणीय प्रभाव की चिंता
खनन तकनीक में सुधार की आवश्यकता
कुशल कार्यबल की कमी
वैश्विक प्रतिस्पर्धा

इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार को नीति, तकनीक और शिक्षा क्षेत्रों में समन्वित प्रयास करने होंगे।

निष्कर्ष

₹7,280 करोड़ की यह योजना भारत के Rare Earth सेक्टर को नई पहचान देने जा रही है। यह फैसला केवल एक औद्योगिक योजना नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी संप्रभुता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

यदि इसे सही तरीके से लागू किया जाता है, तो आने वाले वर्षों में भारत:

टेक्नोलॉजी क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा
वैश्विक सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा
युवाओं के लिए रोजगार का केंद्र बनेगा
हरित और डिजिटल भविष्य की नींव रखेगा

Union Cabinet की यह योजना भारत के आर्थिक और रणनीतिक भविष्य को नई ऊंचाइयों की ओर ले जाने वाली सिद्ध होगी।

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