
एथियोपिया ज्वालामुखी की राख बादल का उत्तर भारत की ओर बढ़ना: एक गंभीर चेतावनी
एथियोपिया के Hayli Gubbi ज्वालामुखी से निकली भारी राख अब भारत की ओर बढ़ रही है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि राख बादल आज रात तक गुजरात के तटीय इलाकों से होते हुए दिल्ली, पंजाब और हरियाणा तक पहुंच सकता है। यह स्थिति न सिर्फ उड्डयन क्षेत्र के लिए चुनौती है, बल्कि आम नागरिकों के स्वास्थ्य और मौसम प्रणाली पर भी असर डाल सकती है। भारत में ज्वालामुखीय राख का सीधा प्रभाव बहुत कम देखने को मिलता है, इसलिए यह घटना अपने आप में असामान्य और चिंता बढ़ाने वाली है। आइए समझते हैं इस राख बादल का मतलब, उसका असर और भारत ने इसके लिए कैसे तैयारी की है।
ज्वालामुखीय राख बादल: क्या है और यह क्यों खतरनाक माना जाता है?
ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान वायुमंडल में सूक्ष्म कणों, सल्फर डाइऑक्साइड, गैसों और धूल का मिश्रण निकलता है, जिसे “वॉल्केनिक ऐश” कहा जाता है। यह राख हमारे आम जीवन में देखी जाने वाली लकड़ी की राख नहीं होती, बल्कि बहुत ही महीन पत्थर और खनिज कण होते हैं, जो हवा में कई सौ किलोमीटर तक फैल सकते हैं।
इस राख बादल में मौजूद सूक्ष्म कण—
श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं
वातावरण की गुणवत्ता को कई गुना खराब कर सकते हैं
उड़ानों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं
मौसम के पैटर्न को प्रभावित कर सकते हैं
यह बादल मजबूत ऊपरी हवा (Jet Stream) के साथ बहुत तेज़ी से चल सकता है, जैसा कि अभी एथियोपिया से भारत की ओर होते हुए दिखाई दे रहा है।
राख बादल भारत की ओर कैसे पहुंचा?
एथियोपिया का Hayli Gubbi ज्वालामुखी हाल ही में तीव्र गतिविधि के साथ फटा, जिससे हजारों टन राख और गैसें वायुमंडल में पहुंच गईं। इसके बाद इस राख को पूर्वोत्तर दिशा की शक्तिशाली हवाओं ने अपने साथ खींच लिया। भारत इस समय उत्तर-पश्चिमी हवाओं के प्रभाव से गुजर रहा है, जो ठंडी हवा को मध्य और पश्चिम एशिया से लाती हैं। यही हवाएं इस राख को भी तेजी से भारतीय भूभाग की ओर धकेल रही हैं।
वर्तमान पूर्वानुमान के अनुसार:
गुजरात के कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्रों में सबसे पहले इसका असर देखा जा सकता है
रात तक यह राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली-NCR, पंजाब और उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों तक पहुंच सकता है
हवा की दिशा के हिसाब से कुछ राख हिमालयी तराई क्षेत्रों की ओर भी जा सकती है
हालांकि इसकी मात्रा भारत पहुंचते-पहुँचते काफी कम हो जाएगी, फिर भी हवा की गुणवत्ता और दृश्यता पर इसका प्रभाव संभव है।
उड्डयन पर बड़ा खतरा: DGCA का अलर्ट
ज्वालामुखीय राख का विमानन पर सबसे बड़ा प्रभाव पड़ता है। राख के सूक्ष्म कण विमान के इंजन में जाकर उसे क्षतिग्रस्त कर सकते हैं। पूर्व में दुनिया में कई बार विमान इंजन राख के कारण असफल हुए हैं।
इसी खतरे को देखते हुए भारत के DGCA (Directorate General of Civil Aviation) ने सभी एयरलाइनों को निर्देश दिए हैं:
प्रभावित क्षेत्रों के ऊपर उड़ान मार्गों को तुरंत बदला जाए
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को वैकल्पिक रूट का उपयोग करना होगा
पायलटों को राख बादल वाले क्षेत्र में जाने से पूरी तरह बचना होगा
रनवे पर कम दृश्यता के लिए एयरपोर्ट तैयार रहें
यदि हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो, तो विमानों की मेंटेनेंस जांच अनिवार्य होगी
दिल्ली, अहमदाबाद, जयपुर, चंडीगढ़ जैसे बड़े हवाई अड्डों को विशेष सतर्क रहने को कहा गया है।
उत्तर भारत के लोगों पर इसका क्या असर पड़ेगा?
भारत में आम तौर पर ज्वालामुखीय राख का अनुभव नहीं होता, इसलिए अधिकांश लोग इसके खतरों से अनजान हैं। हालांकि यह राख भारत पहुंचते-पहुंचते हल्की होगी, फिर भी इसके दुष्प्रभाव निम्न प्रकार हो सकते हैं:
- वायु गुणवत्ता में गिरावट
AQI में हल्की से मध्यम गिरावट के संकेत हैं। राख में मौजूद SO₂ और अन्य गैसें हवा को अत्यधिक प्रदूषित बना सकती हैं।
दमा और सांस संबंधी मरीजों को दिक्कत
आंख और गले में जलन
सिरदर्द और थकान
- दृश्यता कम होना
उत्तर-पश्चिमी भारत के कई इलाकों में धुंध जैसे हालात बन सकते हैं।
हाईवे, रेलवे और एयरपोर्ट की दृश्यता प्रभावित हो सकती है।
- मौसम में बदलाव
राख बादल सूरज की रोशनी को कुछ समय तक रोक सकता है।
सुबह-शाम हल्की धुंध
तापमान में सामान्य से थोड़ी गिरावट
- पानी और कृषि पर प्रभाव
यदि राख का असर कुछ घंटों से अधिक रहा तो इससे फसल पर पतली परत जम सकती है।
हालांकि खतरा अभी कम बताया जा रहा है, लेकिन किसान समुदाय को सावधान रहने की सलाह दी गई है।
सरकार और एजेंसियां क्या तैयारी कर रही हैं?
भारत मौसम विभाग (IMD), DGCA, पर्यावरण मंत्रालय और NDRF मिलकर वास्तविक समय में स्थिति पर नजर रख रहे हैं।
उपग्रहों से राख की दिशा और घनत्व को मॉनिटर किया जा रहा है
राज्यों को हेल्थ और पर्यावरण एडवाइजरी भेजी गई है
दिल्ली और पंजाब सरकारें प्रदूषण नियंत्रण उपायों के लिए अलर्ट पर हैं
अस्पतालों को OPD में सांस संबंधी मरीजों के लिए तैयारी रखने को कहा गया है
लोगों के लिए सावधानियां
- शाम से रात तक बाहर कम निकलें
विशेषकर जिनको अस्थमा, एलर्जी या बुजुर्ग हैं।
- N95 मास्क उपयोग करें
राख के सूक्ष्म कण बहुत हल्के होते हैं, सामान्य मास्क इन्हें रोक नहीं पाते।
- पानी खूब पिएं और घर में एयर प्यूरीफायर चलाएं
यह शरीर को शुद्ध रखने में मदद करेगा।
- गाड़ी चलाते समय धीमी गति रखें
कम दृश्यता की स्थिति बन सकती है।
- बच्चों और गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी
ये वर्ग हवा की गुणवत्ता से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
क्या यह घटना लंबे समय तक प्रभाव डालेगी?
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह राख बादल भारत में केवल 12–24 घंटे ही प्रभाव डाल सकता है।
भारत पहुंचते-पहुंचते राख काफी हल्की हो जाएगी, इसलिए यह किसी लंबे पर्यावरणीय संकट का कारण नहीं बनेगी।
हालांकि अगले 48 घंटे तक इसकी दिशा और घनत्व पर नजर रखना जरूरी होगा।
निष्कर्ष
एथियोपिया के ज्वालामुखी से निकली राख का भारत तक पहुंचना एक असामान्य और ध्यान देने योग्य घटना है। यह हमें यह भी समझाता है कि पृथ्वी की पर्यावरणीय घटनाएं अब स्थानीय नहीं रहीं, बल्कि वैश्विक असर डाल सकती हैं।
उत्तर भारत के लोगों को डरने की जरूरत नहीं है, पर सावधानी ज़रूर रखनी चाहिए।
सरकारी एजेंसियां सक्रिय हैं और विमानन व स्वास्थ्य विभाग पहले से अलर्ट मोड में हैं।
यह घटना आने वाले दिनों में जलवायु परिवर्तन, वैश्विक प्रदूषण और वातावरणीय घटनाओं की जटिलता पर चर्चा को एक नया आयाम दे सकती है।
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