
स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य की ओर एक बड़ा कदम — भारत की बढ़ती नवीकरणीय क्षमता और घटती जीवाश्म ईंधन निर्भरता
भारत ने पिछले एक दशक में वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में अपना एक मजबूत और निर्णायक स्थान बनाया है। विशेष रूप से स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में हुए बड़े विस्तार ने न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है, बल्कि जलवायु परिवर्तन से निपटने की वैश्विक लड़ाई में भी भारत की भूमिका को अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। हाल ही में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में तेज वृद्धि ने यह संकेत दिया है कि भारत अब स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की दिशा में पहले से कहीं अधिक तेजी और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ रहा है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि देश धीरधीरे लेकिन निश्चित रूप से जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) पर निर्भरता कम कर रहा है और भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक अधिक स्वच्छ, सुरक्षित और सतत ऊर्जा ढाँचा तैयार कर रहा है।
भारत की नवीकरणीय ऊर्जा में ऐतिहासिक वृद्धि
पिछले कुछ वर्षों में भारत में सौर (Solar), पवन (Wind), जल (Hydro), बायोमास (Biomass) और ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) जैसी ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान तेजी से बढ़ा है। सरकार ने ऊर्जा नीति को इस तरह दिशा दी है कि नवीकरणीय ऊर्जा न केवल एक विकल्प हो, बल्कि मुख्य ऊर्जा स्तंभ बन जाए।
विशेष रूप से सौर ऊर्जा में भारत की प्रगति उल्लेखनीय रही है। देश आज विश्व की टॉ5 सोलर इंस्टॉलेशन क्षमता वाले देशों में है। ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर पंप, छतों पर रूफटॉप सोलर पैनल, और विशाल सोलर पार्क—ये सभी कदम ऊर्जा परिवर्तन को धरातल पर वास्तविकता बना रहे हैं।
स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य की दिशा में भारत की रणनीति
भारत ने 2030 तक कुल ऊर्जा मिश्रण में नवीकरणीय ऊर्जा का हिस्सा 50% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। साथ ही, 500 GW नवीकरणीय क्षमता स्थापित करने का संकल्प भी लिया गया है। हाल के वर्षों में जो बढ़ोतरी देखी गई है, वह इन लक्ष्यों को सार्थक रूप से प्राप्त करने का संकेत देती है।
मुख्य रणनीतियाँ:
- बड़े पैमाने पर सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स
राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में विशाल सोलर पार्क विकसित किए जा रहे हैं।
इन प्रोजेक्ट्स का उद्देश्य है—कम लागत पर अधिक स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी का विस्तार
भारत में अब निजी कंपनियाँ भी स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं। अडानी, टाटा, रिलायंस जैसी बड़ी कंपनियों के ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स आने वाले वर्षों में भारत के ऊर्जा मानचित्र को बदल देंगे।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग (ISA और COP संकल्प)
भारत ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) की स्थापना करके दुनिया को सौर ऊर्जा को अपनाने में नेतृत्व प्रदान किया है। COP शिखर सम्मेलनों में भारत द्वारा लिए गए संकल्प वैश्विक ऊर्जा बाजार में नई दिशा दे रहे हैं।
- हरित हाइड्रोजन मिशन
नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत भारत 2030 तक ग्रीन हाइड्रोजन का वैश्विक हब बनने की तैयारी कर रहा है। इससे भारी उद्योगों में भी स्वच्छ ऊर्जा का प्रसार होगा।
जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता में लगातार कमी
यह वृद्धि यह दिखाती है कि भारत न केवल स्वच्छ ऊर्जा की ओर झुक रहा है, बल्कि कोयला और पेट्रोलियम पर निर्भरता में भी संरचनात्मक बदलाव ला रहा है।
- कोयले की खपत में गिरावट
कई बिजली संयंत्र अब धीरधीरे बंद हो रहे हैं या आधुनिकीकरण के तहत स्वच्छ विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं।
- इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा
सड़क परिवहन में EV अपनाने से पेट्रोडीजल की खपत में तेज कमी आएगी।
सरकार की FAMII योजना इस दिशा में फैसला बदलाव ला रही है।
- उद्योगों में ऊर्जा दक्षता कार्यक्रम
ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) के योजनाओं ने बड़े उद्योगों को ऊर्जा उपयोग में अधिक कुशल बनाया है। इससे भी जीवाश्म ईंधन पर दबाव कम हुआ है।
भारत के ऊर्जा परिवर्तन के आर्थिक और सामाजिक लाभ
- रोजगार सृजन
नवीकरणीय ऊर्जा उद्योग ने लाखों लोगों को रोजगार दिया है।
स्थापना, रखरखाव, विनिर्माण और अनुसंधान—हर स्तर पर अवसर बढ़ रहे हैं।
- लागत में कमी
सौर ऊर्जा की लागत अब पारंपरिक बिजली से भी कम हो गई है।
इससे उपभोक्ता और उद्योग दोनों को लाभ हो रहा है।
- प्रदूषण में कमी और स्वास्थ्य लाभ
स्वच्छ हवा और बेहतर पर्यावरण से लोगों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
- ऊर्जा सुरक्षा मजबूत
विदेशी तेल पर निर्भरता कम होने से भारत की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों मजबूत होंगे।
चुनौतियाँ जिन्हें पार करना जरूरी
भारत के सामने कुछ चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं—
- स्टोरेज तकनीक का अभाव
सौर और पवन ऊर्जा 24×7 उपलब्ध नहीं होती।
बैटरी स्टोरेज की बेहतर सुविधा जरूरी है।
- ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार
नवीकरणीय ऊर्जा को संभालने के लिए आधुनिक ग्रिड सिस्टम की आवश्यकता है।
- निवेश और वित्त पोषण
बड़े प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश की जरूरत होती है।
- भूमि उपलब्धता
विशाल सोलर पार्कों के लिए पर्यावरण और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए भूमि अधिग्रहण कठिन हो सकता है।
भविष्य की दिशा: भारत स्वच्छ ऊर्जा सुपरपावर बनने की ओर
भारत आने वाले वर्षों में स्वच्छ ऊर्जा का वैश्विक केंद्र बनने की क्षमता रखता है।
सरकार और निजी क्षेत्र के संयुक्त प्रयास, तकनीकी नवाचार, और अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलकर इस परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।
2030 तक भारत—
500 GW नवीकरणीय क्षमता
स्वच्छ ऊर्जा का 50% हिस्सा
ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में विश्व नेतृत्व
विशाल EV नेटवर्क
जैसे लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
निष्कर्ष
स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में भारत का बढ़ता कदम न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और रणनीतिक स्तर पर भी बहुत बड़ा परिवर्तन है। नवीकरणीय ऊर्जा की तेजी से बढ़ती क्षमता इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत अब जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक स्तर पर नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए तैयार है। यह वृद्धि न केवल भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को साकार कर रही है, बल्कि देश की जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करके एक उज्ज्वल, स्वच्छ और स्थायी भविष्य की नींव रख रही है।
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