
सुप्रीम कोर्ट में उन्नाव रेप केस
जिसमें कोर्ट की सुनवाई, मुख्य बहसें, सीबीआई की दलीलें, पीड़िता की प्रतिक्रिया, राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य सहित पूरे परिप्रेक्ष्य को समझाया गया है:
सुप्रीम कोर्ट में उन्नाव रेप केस की सुनवाई जारी — न्यायिक जंग और सामाजिक प्रतिक्रिया
भारत के सर्वोच्च न्यायालय में आज (29 दिसंबर 2025) उत्तर प्रदेश के उन्नाव रेप केस की सुनवाई गंभीरता से जारी है। यह सुनवाई उस दिल्ली हाई कोर्ट के विवादित फैसले को चुनौती देने के लिए सीबीआई की ओर से दायर याचिका पर हो रही है, जिसमें 2017 के उन्नाव रेप मामले में दोषी पाए गए पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को उम्रकैद की सजा को सस्पेंड कर जमानत मंजूर कर दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस आदेश पर फिलहाल रोक (स्टे) लगा दी है और मामले की अगली सुनवाई की तिथि तय की है।
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- केस की पृष्ठभूमि
2017 में उत्तर प्रदेश के उन्नाव में एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार का मामला सामने आया था, जिसमें तब के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर अपराध के साथ ही पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत का भी आरोप लगाया गया था। घटना के बाद देश भर में भारी विरोध और न्याय की मांग उठी थी। कोर्ट ने 2019 में सेंगर को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी।
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इस आपराधिक मामले की संवेदनशीलता और राजनीतिक साये के कारण यह वर्षों तक समाज और न्यायपालिका दोनों के बीच गहन विचार का विषय रहा है।
- दिल्ली हाई कोर्ट का विवादित आदेश
23 दिसंबर 2025 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने सेंगर की सजा पर पेंडिंग अपील को देखते हुए उनका आजीवन कारावास निलंबित कर जमानत दे दी थी। इस फैसले के तहत जेल से रिहाई की अनुमति दी गई थी, हालांकि कुछ शर्तों के साथ। इसके बाद पीड़िता, महिला कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज में भारी आक्रोश और व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था।
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पीड़िता ने न्यायालय के बाहर प्रदर्शन किए और सुरक्षा की मांग की, यह कहते हुए कि उनके बच्चों की सुरक्षा को खतरा महसूस हो रहा है। विरोध के स्वर तेज़ हुए और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया।
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- सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और मुख्य दलीलें
सुप्रीम कोर्ट की बेंच — प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में — सीबीआई की याचिका पर सुनवाई कर रही है। सीबीआई का मुख्य तर्क है कि हाई कोर्ट ने पब्लिक सर्वेंट (जन सेवक) की परिभाषा और गंभीर बलात्कार जैसे अपराध की गम्भीरता को गलत तरीके से समझा। सीबीआई के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में दलील दी कि जब कोई व्यक्ति प्रभावशाली स्थिति में नाबालिग के साथ पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट करता है तो यह “गंभीर अपराध” की श्रेणी में आता है और इसके लिए कड़ी सजा ज़रूरी है।
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सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी और सेंगर को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने उनसे जवाब देने के लिए समय भी दिया है, ताकि अगली सुनवाई में दलीलें और भी स्पष्ट रूप से सामने रखी जा सकें।
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कोर्ट ने कहा कि सामान्य सिद्धांत यह है कि यदि कोई व्यक्ति पहले से कोई अलग मामलों में जेल में है, तो उसकी आज़ादी वापस नहीं ली जाती, लेकिन यहाँ स्थिति विशेष है क्योंकि सेंगर अन्य मामले में पहले से ही जेल में है — इसलिए रोक का निर्णय लिया गया है।
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- पीड़िता और समाज की प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के लिए पीड़िता स्वयं सुबह अदालत पहुंची। सुनवाई से पहले उनकी हालत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बाद में वे कोर्ट के लिए उपस्थित रहीं। उनकी मां ने न्याय पाने की तीव्र मांग की और कहा कि उन्हें सजा के साथ सुरक्षा भी मिलनी चाहिए।
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सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिक समूहों ने भी उच्च न्यायालय के फैसले का विरोध किया। महिला कार्यकर्ता योगिता भयाना सहित अन्य लोगों ने कहा कि इस प्रकार के फैसले देश की बेटियों के मनोबल को तोड़ते हैं।
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- सुप्रीम कोर्ट के बाहर तनावपूर्ण माहौल
न्यायालय परिसर के बाहर सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी और प्रदर्शनकारियों ने न्याय की मांग को लेकर विरोध जताया। कुछ प्रदर्शनकारियों में तनाव भी देखा गया और पुलिस को स्थिति को नियंत्रित करना पड़ा। विरोध के दौरान पीड़िता की मां भावुक होकर नज़र आईं।
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वहीं, राजनीतिक दलों के नेता भी इस मुद्दे पर राय दे रहे हैं। कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने कहा है कि इस मामले में कड़ा न्याय होना चाहिए और दोषी को कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए।
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- कानूनी और सामाजिक महत्व
उन्नाव रेप केस केवल एक व्यक्तिगत अपराध मामला नहीं रहा है — यह भारतीय न्यायपालिका, महिलाओं की सुरक्षा, जनाधिकार और राजनीतिक प्रभाव जैसे व्यापक मुद्दों का प्रतीक बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर भविष्य में बलात्कार और यौन अपराधों के मामलों की सुनवाई पर एक मिसाल कायम कर सकता है।
विशेषकर यह मामला पब्लिक सर्वेंट की परिभाषा, न्यायिक विवेक और संवेदनशील मामलों में न्यायपालिका के रुख पर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। कोर्ट की अंतिम राय इससे जुड़े कानूनी सिद्धांतों को और स्पष्ट कर सकती है, जो न केवल इस मामले बल्कि अन्य यौन अपराधों के मुकदमों में भी मार्गदर्शक होगी।
- आगे की प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाई है और मामले की सुनवाई जारी है। अगला दौर कोर्ट में दोनों पक्षों द्वारा पेश किए गए तर्कों के आधार पर आगे बढ़ेगा — जिसमें सीबीआई की अपील, सेंगर की प्रतिक्रिया, और न्यायपालिका के दृष्टिकोण पर निर्णय आएगा। कोर्ट ने सजा संबंधी निर्णय को अंतिम रूप से तय करने से पहले संबंधित पक्षों को सुनने का निर्णय लिया है।
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निष्कर्ष:
उन्नाव रेप केस आज सुप्रीम कोर्ट में न केवल एक न्यायिक प्रक्रिया है, बल्कि यह भारतीय समाज, कानूनी व्यवस्था और पीड़ितों के अधिकारों के बीच एक महत्वपूर्ण संग्राम का रूप ले चुका है। कोर्ट का अंतिम फैसला न सिर्फ इस मामले के भविष्य को निर्धारित करेगा, बल्कि समान प्रकार के अन्य संवेदनशील मामलों में दिशा-निर्देश और न्याय के मानदंडों को भी आकार देगा।
