श्रीलंका में बाढ़-भूस्खलन: 47 लोगों की मौत, राहत और बचाव कार्य जारी
श्रीलंका वर्तमान में एक बड़े प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा है। 2025 के अंत में आए Cyclone Ditwah (चक्रवात दितवाह) के कारण देश के कई हिस्सों में दशकों में एक सबसे भयंकर बाढ़-और-भूस्खलन (लैंडस्लाइड) की स्थिति पैदा हो गई है।
तबाही — जान-माल व जनजीवन पर असर
अभी तक कुल 47 लोगों की मौत हो चुकी है। )
इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं, और सैकड़ों घर, रास्ते, पुल और सड़कें बाढ़ और मलबे के कारण क्षतिग्रस्त हुए या अव्यवस्थित हुए हैं।
प्रभावित हुए लोगों की कुल संख्या ऊँचे स्तर पर अनुमानित है — लगभग 5,893 व्यक्ति 1,729 घरों से इस आपदा से प्रभावित हुए हैं।
प्रभावित जिलों में सबसे अधिक तबाही Badulla और Nuwara Eliya जैसे पहाड़ी एवं चाय-बगानों वाले इलाके रहे, जहाँ भूस्खलन की घटनाएं सबसे अधिक हुईं।
राहत और बचाव — सरकार एवं प्रशासन की कार्रवाई
आपदा की गंभीरता को देखते हुए, श्रीलंकाई प्रशासन ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया। भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में बचाव दल, सेना, पुलिस तथा अन्य आपदा प्रबंधन एजेंसियाँ सक्रिय हैं। ([Anadolu Ajansı][2])
कई स्थानों पर लोग हेलिकॉप्टरों व नावों द्वारा सुरक्षित इलाकों में ले जाए जा रहे हैं — विशेष रूप से उन लोगों को जो बाढ़ या भूस्खलन के कारण फँस गए थे।
प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी शरण-केंद्र बनाए गए हैं। बाढ़ और मलबे से प्रभावित घरों में रहने वाले लोग इन सुविधाओं में शरण ले रहे हैं।
साथ ही, प्रशासन ने जनसमूह से अपील की है कि वे सरकारी चेतावनियों को गंभीरता से लें, जोखिम-क्षेत्रों में न जाएँ और जल्द-से-जल्द सुरक्षित स्थानों पर चले जाएँ।
Indian High Commission in Sri Lanka (भारत के उच्चायोग, कोलंबो) ने भी प्रभावितों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए श्रीलंकाई जनता के साथ एकता जताई है।
मौजूदा चुनौतियाँ और भविष्य की चिंताएँ
भारी बारिश और भूस्खलन अभी जारी है — कई इलाके अभी भी अस्थिर हैं। ऐसे में आगे और तबाही की आशंका बनी हुई है।
बाढ़ और मलबे से नुकसान बहुत व्यापक है — जलमार्ग बंद, मुख्य सड़कों व रेलवे पटरियों पर मलबा, पुल टूटे — जिससे राहत कार्यों और लोगों के आवाजाही में दिक्कत हो रही है।
अस्थायी शरण-केंद्रों में रहने वाले लोगों के लिए चILogistics, भोजन, जल, दवाई आदि की आपूर्ति और स्वास्थ्य सुरक्षा एक बड़ा चुनौती है।
जागरूकता की जरूरत — जोखिम-क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पुनः विस्थापन, राहत और पुनर्वास के लिए पर्याप्त जानकारी और साधन उपलब्ध कराने होंगे।
अंतरराष्ट्रीय/क्षेत्रीय प्रभाव — भारत सहित पड़ोसी देशों को भी सावधानी
चूंकि यह आपदा प्राकृतिक है और क्षेत्रीय जलवायु परिवर्तन से जुड़ी हुई है, इसलिए पड़ोसी देशों सहित क्षेत्रीय स्तर पर भी आपदाओं की जोखिम बढ़ी है — इससे भारत जैसे पड़ोसी देश में भी सतर्कता जरूरी हो जाती है।
भारत के उच्चायोग द्वारा संवेदना और सहायता की पेशकश दिखाती है कि मानवीय स्तर पर सहयोग और एकता की भावना ज़रूरी है — विशेषकर प्राकृतिक आपदाओं में।
निष्कर्ष
श्रीलंका में वर्तमान बाढ़–भूस्खलन (बाढ़ और लैंडस्लाइड) की आपदा अत्यंत गंभीर स्वरूप ले चुकी है — 47 से अधिक लोगों की मौत, दर्जनों लापता और सामाजिक-आर्थिक व्यापक तबाही। राहत-बचाव दलों की अथक मेहनत के बावजूद, बड़े पैमाने पर राहत, पुनर्वास तथा पुनर्निर्माण की आवश्यकता है। स्थिति अभी नियंत्रण में दिख रही है, लेकिन भविष्य के लिए सतर्कता, पुनर्वास योजनाएं, और संवेदनशीलता बेहद महत्वपूर्ण हो गए हैं।
