
राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में बड़ी कार्रवाई: नौसेना से संवेदनशील जानकारी लीक केस में तीसरा आरोपी गिरफ्तार, तेलंगाना में NIA ने पूर्व नक्सली को हिरासत में लिया
नई दिल्ली/हैदराबाद।
देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े दो अहम मामलों में जांच एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक ओर भारतीय नौसेना से संवेदनशील जानकारी लीक करने के मामले में तीसरे आरोपी को गिरफ्तार किया है, वहीं दूसरी ओर तेलंगाना में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक पूर्व नक्सली को हिरासत में लिया है। दोनों ही मामलों को सुरक्षा एजेंसियां आंतरिक सुरक्षा के लिहाज़ से अत्यंत गंभीर मान रही हैं और इनके दूरगामी प्रभावों को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है।
नौसेना से संवेदनशील जानकारी लीक मामला: तीसरा आरोपी गिरफ्त में
भारतीय नौसेना से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां कथित रूप से बाहरी तत्वों तक पहुंचाने के मामले में सुरक्षा एजेंसियों को एक और बड़ी सफलता मिली है। जांच एजेंसी ने इस केस में तीसरे आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने नौसेना की रणनीतिक तैनाती, संचार प्रणाली और कुछ गोपनीय तकनीकी सूचनाएं अवैध रूप से साझा कीं।
सूत्रों के अनुसार, यह गिरफ्तारी पहले से गिरफ्तार दो आरोपियों से हुई पूछताछ और डिजिटल सबूतों के आधार पर की गई। जांच में सामने आया कि आरोपी लंबे समय से एजेंसियों की निगरानी में था और वह कथित तौर पर विदेशी संपर्कों के माध्यम से संवेदनशील जानकारी साझा कर रहा था।
कैसे सामने आया मामला?
यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब खुफिया एजेंसियों को कुछ संदिग्ध डिजिटल संचार और वित्तीय लेन-देन की जानकारी मिली। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले कि नौसेना से संबंधित कुछ गोपनीय जानकारियां अनधिकृत माध्यमों से बाहर जा रही हैं। इसके बाद बहु-एजेंसी जांच शुरू की गई, जिसमें साइबर फॉरेंसिक, वित्तीय ट्रैकिंग और मानव खुफिया (HUMINT) इनपुट्स का इस्तेमाल किया गया।
आरोपी की भूमिका
जांच एजेंसियों के अनुसार, तीसरा आरोपी इस नेटवर्क में एक “लिंक” की भूमिका निभा रहा था। वह न केवल जानकारी जुटाने में शामिल था, बल्कि उसे सुरक्षित तरीके से आगे पहुंचाने की जिम्मेदारी भी उसी पर थी। प्रारंभिक पूछताछ में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म और छद्म पहचान (फेक प्रोफाइल) का इस्तेमाल किया।
कानूनी कार्रवाई
तीसरे आरोपी को संबंधित धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है, जिनमें आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (Official Secrets Act) और भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराएं शामिल हैं। उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से जांच एजेंसी को आगे की पूछताछ के लिए रिमांड मिली है। एजेंसियों का कहना है कि इस नेटवर्क के और भी तार जुड़े हो सकते हैं, जिनकी जांच जारी है।
तेलंगाना में NIA की कार्रवाई: पूर्व नक्सली हिरासत में
इसी बीच, देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े एक अन्य मामले में NIA ने तेलंगाना में एक पूर्व नक्सली को हिरासत में लिया है। एजेंसी को शक है कि यह व्यक्ति भले ही सक्रिय नक्सली गतिविधियों से बाहर आ चुका हो, लेकिन उसका संपर्क अब भी प्रतिबंधित संगठनों और भूमिगत नेटवर्क से बना हुआ है।
हिरासत का कारण
NIA के अधिकारियों के अनुसार, पूर्व नक्सली पर आरोप है कि वह युवाओं को उग्रवादी विचारधारा की ओर आकर्षित करने, लॉजिस्टिक सपोर्ट देने और कुछ संदिग्ध गतिविधियों में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था। उसके खिलाफ पुख्ता खुफिया इनपुट मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई।
पूछताछ में क्या सामने आया?
प्रारंभिक पूछताछ में एजेंसी को कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं, जिनमें नक्सली नेटवर्क की वर्तमान रणनीति, फंडिंग चैनल और शहरी इलाकों में संभावित स्लीपर सेल्स से जुड़े संकेत शामिल हैं। हालांकि, NIA ने इस संबंध में आधिकारिक तौर पर सीमित जानकारी ही साझा की है, ताकि जांच प्रभावित न हो।
कानूनी प्रक्रिया
हिरासत में लिए गए व्यक्ति से गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) सहित अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत पूछताछ की जा रही है। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि क्या उसका संबंध हाल के किसी उग्रवादी षड्यंत्र से है या नहीं।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से दोनों मामलों का महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि ये दोनों घटनाएं भारत की बहु-स्तरीय सुरक्षा चुनौतियों को दर्शाती हैं। एक ओर जहां सैन्य और रणनीतिक सूचनाओं की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है, वहीं दूसरी ओर आंतरिक उग्रवाद और उसके शहरी नेटवर्क भी चिंता का विषय बने हुए हैं।
पूर्व सैन्य अधिकारियों के अनुसार, “संवेदनशील जानकारी का लीक होना किसी भी देश की रक्षा क्षमताओं को कमजोर कर सकता है। ऐसे मामलों में त्वरित और कठोर कार्रवाई बेहद जरूरी है।” वहीं आंतरिक सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि नक्सलवाद भले ही कई इलाकों में कमजोर पड़ा हो, लेकिन उसका वैचारिक और नेटवर्क आधारित खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
सरकार और एजेंसियों की प्रतिक्रिया
सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई जा रही है। रक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय दोनों ही स्तरों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल को और मजबूत किया जा रहा है। साइबर सुरक्षा, कर्मियों की पृष्ठभूमि जांच (वेरिफिकेशन) और संवेदनशील संस्थानों में निगरानी तंत्र को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
NIA और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय भी बढ़ाया गया है, ताकि किसी भी संभावित खतरे की पहचान समय रहते की जा सके।
आगे की राह
नौसेना से जुड़ी जानकारी लीक केस में जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या यह किसी बड़े जासूसी नेटवर्क का हिस्सा था या फिर सीमित दायरे में की गई गतिविधि। वहीं तेलंगाना के मामले में यह जांच अहम होगी कि पूर्व नक्सली की गतिविधियां कितनी व्यापक थीं और क्या इससे किसी बड़े हमले या साजिश को रोका जा सका।
कुल मिलाकर, ये दोनों कार्रवाइयां यह संकेत देती हैं कि सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं और देश की संप्रभुता व आंतरिक स्थिरता से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में इन मामलों से जुड़े और खुलासे होने की संभावना है, जिन पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।
