यूके बजट 2025: एक समीक्षा — टैक्स, पेंशन और अर्थव्यवस्था

आज, 26 नवम्बर 2025 को, यूके सरकार ने अपना सालाना बजट प्रस्तुत किया। यह बजट न सिर्फ अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति का प्रतिबिंब है, बल्कि आने वाले वर्षों की वित्तीय दिशा की रूपरेखा भी पेश करता है। इस बजट में टैक्स ब्रैकेट, पेंशन स्कीम और सार्वजनिक वित्त की मजबूती को लेकर कई संवेदनशील और विवादास्पद प्रस्ताव हैं — आइए गहराई से देखें कि ये परिवर्तन आम लोगों, पेंशनर्स और व्यवसायों पर कैसे असर डाल सकते हैं।

टैक्स में “चुप-चुप कर वृद्धि”: दरें नहीं, लेकिन झुकाव उतना ही है

बजट की सबसे चर्चा-बिंदु यह है कि सरकार ने आयकर (Income Tax) की मौज़ headline दरों को नहीं बढ़ाया — यानी बेसिक या हाई-रेट दरों में कोई सीधी वृद्धि नहीं हुई। ([The Guardian][1])

लेकिन इसके बजाय, सरकार ने टैक्स-थ्रेशोल्ड को और दो साल के लिए फ्रीज़ (स्थिर) करने का फैसला किया है। ([Sky News][2]) इसका मतलब सरल है: जब मजदूरी या महंगाई बढ़ेगी, तो अधिक लोग धीरे-धीरे उच्च टैक्स ब्रैकेट में चला जाएगा — इसे “फिस्कल ड्रैग” कहा जाता है। ([The Guardian][1])

सरकार ने यह कदम इसलिए चुना है कि उसे अपनी चुनावी वादों (जैसे “कामकाजी लोगों पर टैक्स बढ़ाना नहीं होगा”) का उल्लंघन न करना पड़े, और वैसे भी इस तरह की पार्ट-निर्धारित ग्रोथ टैक्स राजस्व को बढ़ाने के साधन के रूप में काम कर सकती है। ([The Guardian][3])

इनके अलावा, वैट (VAT) में व्यापक वृद्धि का विचार अब रद्द कर दिया गया है, क्योंकि इससे महंगाई में और इजाफा हो सकता था। ([The Guardian][1])

पेंशन में बड़ा फेरबदल: “सेलरी सैक्रिफाइस” पर सीमा, राहतों में कटौतियाँ

पेंशन स्कीम भी इस बजट का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। सबसे बड़ा प्रस्ताव है “सेलरी सैक्रिफाइस” (salary sacrifice) पेंशन योगदानों पर टैक्स-फ्री छूट की सीमित करना। लगभग £2,000 से ऊपर के योगदानों पर राष्ट्रीय बीमा (National Insurance) देना पड़ सकता है, जिससे ये स्कीम पहले जितनी आकर्षक नहीं रहेगी। ([Sky News][2])

इस से सरकार को अनुमानित £3–4 बिलियन का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है। ([Financial Times][4]) लेकिन इस निर्णय का असर पेंशन-सेविंग्स करने वालों, खासकर कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों पर हो सकता है — कई एक्सपर्ट्स और व्यापार समूहों ने इसकी आलोचना की है। ([Financial Times][4])

वहीं, कुछ अफवाहें थीं कि “पेंशन टैक्स-फ्री लम्प-सम” (जिसमें सेवानिवृत्ति के समय निकालने पर 25% रकम टैक्स-मुक्त होती है) को कम करने का प्रस्ताव है, लेकिन बजट में फिलहाल इस कदम की पुष्टि नहीं हुई है। ([Tax UK][5])

पढ़ी-लिखी रिपोर्टों के अनुसार, उच्च-आय वालों को मिलने वाली टैक्स-राहत को भी “फ्लैट रेट” में बदलने की संभावना है। यानी, फिलहाल के अलग-अलग टैक्स-राहत दरों की बजाय एक समान दर लागू हो सकती है, जिससे सरकार को बड़ा राजस्व मिल सके। ([MHA][6])

सामाजिक सुरक्षा और मजदूरों के लिए राहत भी — लेकिन सीमित

तो क्या यह बजट सिर्फ टैक्स बढ़ाने और पेंशन दबोचने तक सीमित है? जवाब नहीं — कुछ राहत-पैकेज भी दिए गए हैं, विशेष रूप से कामकाजी लोगों के लिए।

राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी (National Living Wage): अप्रैल 2025 से यह £11.44 प्रति घंटा से बढ़ाकर £12.21 कर दिया जाएगा। ऐसे में लगभग 3 मिलियन कामगारों को सालाना £1,400 तक का अतिरिक्त लाभ हो सकता है। ([GOV.UK][7])
केयरर्स (Carers): केयरर्स अलाउंस (Carer’s Allowance) के लिए “वर्किंग-घंटे की सीमाएँ” बदली जाएंगी — अब 16 घंटे प्रति सप्ताह तक की कमाई पर यह अलाउंस मिलेगा, जिससे 60,000 से अधिक केयरर्स को लाभ हो सकता है। ([GOV.UK][7])
पेंशनर समर्थन: राज्य-पेंशन (State Pension) में 4.1% की वृद्धि घोषित की गई है। ([GOV.UK][7]) यह कदम कई पेंशनर्स के लिए राहत का स्रोत हो सकता है, लेकिन साथ ही पेंशन-संयोजन नीति में बदलाव की आशंका है (जैसे पेंशन-संवर्धन लाभ में कटौती)।

संपत्ति, पूंजी लाभ और अन्य टैक्स: धनी और मालिकों की जेब में सेंध

बजट में उन क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया गया है जिनसे अधिक संपन्न वर्गों से राजस्व जुटाया जा सके:

कैपिटल गेन्स टैक्स (CGT): ग्राहकों के लिए CGT दर बढ़ाई जा रही है। ([GOV.UK][7])
इन्हेरिटेंस टैक्स (विरासत कर): खासकर संपत्ति और पेंशन प्राप्तियों पर नया झुकाव दिखता है। ([The Guardian][1])
“मैन्शन टैक्स”: उच्च-मूल्य वाले घरों (जैसे £2 मिलियन से ऊपर) पर पुनर्मूल्यांकन के बाद अतिरिक्त टैक्स लगाने की संभावना है। ([The Guardian][1])

इन उपायों का मकसद सिर्फ राजस्व जुटाना ही नहीं है, बल्कि टैक्स सिस्टम को “न्याय संगत” बनाना भी बताया जा रहा है — कि जो अधिक संपत्ति रखते हैं, उन्हें उनकी हिस्सेदारी का आर्थिक बोझ उठाना चाहिए।

आलोचनाएँ और चिंताएँ

हालाँकि बजट में कुछ राहत देने की बात कही गई है, लेकिन आलोचनाएँ — खासकर पेंशन-सेविंग स्कीम पर — तेज़ हैं:

  1. पेंशन बचत पर कटौती: पेंशन-सेविंग में टैक्स-मुक्त योगदानों को सीमित करना कई लोगों के लिए भविष्य में सेवानिवृत्ति को जोखिम में डाल सकता है। सामाजिक सुरक्षा विशेषज्ञों और वित्तीय सलाहकारों ने चेतावनी दी है कि इससे लंबे समय में पेंशन का “रिटर्न” घट सकता है। ([Financial Times][4])
  2. “फिस्कल ड्रैग” का असर: टैक्स-थ्रेशोल्ड रोकने से आम लोगों के मासिक वेतन में सीधे तो बढ़ोतरी नहीं दिखेगी, लेकिन वज़न बढ़ेगा क्योंकि महंगाई और वेतन वृद्धि के चलते अधिक लोग उच्च टैक्स ब्रैकेट में पहुँच जाएंगे। यह न केवल परिवारों पर वित्तीय दबाव डालेगा, बल्कि कई गृहस्थों की बचत क्षमताओं को भी सीमित कर सकता है।
  3. पेंशनर्स का संकट: कुछ विश्लेषकों का कहना है कि पेंशनर्स इस बजट के शाब्दिक “लाभ” से वंचित रह सकते हैं — टैक्स-थ्रेशोल्ड फ्रीज़ और पेंशन लाभों में संभावित कटौती उनकी स्थिति को कमजोर बना सकते हैं।
  4. व्यापार और रोजगार पर प्रभाव: खासकर छोटे व्यवसायों को अपनी पेंशन-व्यवस्थाओं में बदलाव का सामना करना पड़ सकता है, जिससे वे कर्मचारियों के पेंशन योगदानों को सीमित करने या अन्य कर्मचारी लाभ खत्म करने पर विचार करें। निष्कर्ष: संतुलन लेकिन सत्ता दबाव

इस बजट की अहमियत इसलिए है क्योंकि यह सरकार की राजनीतिक प्रतिबद्धताओं (जैसे “कामकाजी लोगों पर टैक्स न बढ़ाएँ”) और आर्थिक हकीकत (महंगाई, ऋण, सार्वजनिक व्यय) के बीच एक नाजुक संतुलन को दर्शाता है। हेडलाइन टैक्स दरों में सीधे बढ़ोतरी नहीं हुई, लेकिन बजट की नीतियाँ — जैसा कि “फ्रोजन थ्रेशोल्ड्स”, पेंशन योगदानों की नई सीमाएँ, और संपत्ति-कर सुधार — दिखाती हैं कि सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए कैसे पीछे-पीछे कदम उठा रही है।

कामकाजी वर्ग और मध्यम-वर्गीय परिवारों के लिए यह बजट मिलाजुला संदेश देता है: कुछ राहत योजनाएं हैं, लेकिन दीर्घकालीन वित्तीय दबाव बने रह सकते हैं, खासकर अगर वे पेंशन-सेविंग पर निर्भर हैं। वहीं, उच्च-आय और संपत्ति वाले लोगों पर कर बोझ बढ़ने की संभावना अधिक है।

पेंशनर्स के लिए यह बजट खास चुनौतीपूर्ण हो सकता है — हालांकि कुछ मदद है, पर टैक्स नियमों में बदलाव उनकी वित्तीय सुरक्षा को खतरे में डाल सकते हैं।

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