नवीकरणीय ऊर्जा में रिकॉर्ड वृद्धि — भारत ने FY 2025-26 की पहली छमाही में जोड़े 25 GW नई क्षमता

भारत ने वर्ष 2025-26 की पहली छमाही (अप्रैल–सितंबर) में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। देश ने कुल25 गीगावाट (GW) नई नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी, जिसमेंसौर ऊर्जा का सबसे बड़ा योगदान रहा। यह उपलब्धि न केवल भारत के ऊर्जा संक्रमण को गति देती है, बल्कि दुनिया के सामने देश को एक उभरती हुई हरित ऊर्जा महाशक्ति के रूप में स्थापित करती है।

यह रिकॉर्ड वृद्धि कई कारणों से महत्वपूर्ण है—भारत के जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, रोजगार के नए अवसर पैदा करने तथा स्वच्छ तकनीकों को बढ़ावा देने में इसका सीधा प्रभाव दिखता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह उपलब्धि क्यों उल्लेखनीय है और इसका देश के भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

  1. 25 GW नई क्षमता: क्या यह भारत के लिए नया मील का पत्थर है?

नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के अनुसार, FY 2025-26 की पहली छमाही में भारत ने25 GW स्वच्छ ऊर्जा की क्षमता जोड़ी। यह संख्या पिछले वर्षों की तुलना में काफी बड़ी है—आम तौर पर भारत सालभर में 15–20 GW क्षमता जोड़ता रहा है।

इस तेज़ वृद्धि के पीछे कई कारण हैं:

नीतिगत स्थिरता और सरकारी प्रोत्साहन
घरेलू स्तर पर सौर उपकरण निर्माण में बढ़ोतरी
निजी क्षेत्र का तेजी से बढ़ता निवेश
ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और बैटरी स्टोरेज पर ध्यान
हरित ऊर्जा के प्रति वैश्विक और घरेलू उद्योगों की बढ़ती मांग

इस उपलब्धि ने भारत को उन देशों की श्रेणी में पहुंचा दिया है जो बड़े पैमाने पर स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने में अग्रणी हैं—जैसे चीन, अमेरिका और यूरोप के शीर्ष राष्ट्र।

  1. सौर ऊर्जा का प्रमुख योगदान: क्यों ‘सोलर’ बना वृद्धि का इंजन?

25 GW में से सबसे बड़ा हिस्सासौर ऊर्जा परियोजनाओं का है। अनुमान है कि कुल क्षमता वृद्धि में से लगभग16–18 GW सौर ऊर्जा से आया है।

इसके कई कारण हैं:

(क) घटती सौर लागत

पिछले दशक में सौर पैनल की कीमतों में भारी गिरावट हुई है। 2025 में भारत ने घरेलू उत्पादन बढ़ाकर आयात-निर्भरता भी कम कर दी है।

(ख) बड़े पैमाने की परियोजनाएँ

राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और कर्नाटक में तेजी से बड़े सौर पार्क बन रहे हैं।

(ग) रूफटॉप सोलर की तेजी

प्रधामंत्री सूर्य घर कार्यक्रम के तहत घरों में सौर पैनल लगाने में तेजी आई है, जिससे लाखों परिवार बिजली बिल में बचत कर रहे हैं।

(घ) उद्योगों की मांग

कई बड़े उद्योग (जैसे IT, स्टील, सीमेंट) 100% ग्रीन एनर्जी के लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे सोलर PPAs की मांग बढ़ी।

  1. पवन ऊर्जा, हाइड्रो और अन्य स्रोत भी रहे मजबूत

हालांकि सौर ऊर्जा सबसे आगे रही, लेकिनपवन ऊर्जा ने भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की।

पवन ऊर्जा में 5–6 GW की वृद्धि

तमिलनाडु, गुजरात और महाराष्ट्र में नई परियोजनाएँ शुरू हुईं।
ऑफशोर विंड (समुद्री पवन ऊर्जा) पर भी प्रारंभिक निवेश बढ़ रहा है।

हाइड्रो और पंप-स्टोरेज परियोजनाएँ

हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में रन-ऑफ-द-रिवर परियोजनाएँ आगे बढ़ीं
ऊर्जा भंडारण (Battery + Pump Storage) के कारण हाइड्रो फिर से फोकस में आया

इन सभी स्रोतों ने मिलकर कुल वृद्धि को 25 GW तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

  1. यह उपलब्धि क्यों महत्वपूर्ण है?

(1) भारत के 500 GW लक्ष्य की ओर तेज़ प्रगति

भारत ने 2030 तक500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता का लक्ष्य रखा है।
25 GW की वृद्धि इस लक्ष्य की प्राप्ति को और तेज़ करती है।

(2) कार्बन उत्सर्जन में कमी

हर 1 GW सौर ऊर्जा लगभग 1.5 मिलियन टन वार्षिक CO₂ उत्सर्जन कम करती है।
25 GW से इसका असर लाखों कारों के बराबर उत्सर्जन कम होने जैसा है।

(3) ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम

भारत कच्चे तेल और गैस के आयात पर काफी निर्भर है।
नवीकरणीय ऊर्जा इस निर्भरता को घटाती है और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाती है।

(4) ग्रामीण रोजगार और आर्थिक वृद्धि

सोलर और पवन परियोजनाएँ ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार बढ़ा रही हैं—

निर्माण कार्य
संचालन व रखरखाव
आपूर्ति श्रृंखला में नई नौकरियाँ

(5) निवेश में तेज़ उछाल

FY 2025-26 की पहली छमाही में नवीकरणीय क्षेत्र में घरेलू और विदेशी निवेश दोनों बढ़े—
कुल निवेश लगभग1.5–2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा माना जा रहा है।

  1. सरकार की रणनीतियाँ: भारत कैसे कर रहा है ऊर्जा संक्रमण?

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा के लिए कई नीतिगत कदम उठाए हैं।

(अ) ग्रीन हाइड्रोजन मिशन

यह मिशन भारत को ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के वैश्विक केंद्र में बदलने की दिशा में काम कर रहा है।

(ब) PLI स्कीम (Production Linked Incentive)

इसके तहत घरेलू सौर पैनल निर्माण तेज़ी से बढ़ा है।

(स) बैटरी स्टोरेज नीति

ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति के लिए बड़े पैमाने पर बैटरी स्टोरेज परियोजनाएँ शुरू हो रही हैं।

(द) ओपन एक्सेस और ग्रीन ओपन एक्सेस

उद्योग अब सीधे नवीकरणीय ऊर्जा खरीद सकते हैं, जिससे मांग बढ़ रही है।

(इ) नीलामी प्रक्रिया में तेजी

बड़ी परियोजनाओं के लिए पारदर्शी और सरल नीलामी की वजह से डेवलपर्स की रुचि बढ़ी है।

  1. चुनौतियाँ अभी भी बड़ी हैं

भले ही वृद्धि तेज़ है, लेकिन चुनौतियाँ अब भी सामने हैं:

ग्रिड इंटीग्रेशन और ट्रांसमिशन नेटवर्क की कमी
कुछ राज्यों में नीति अस्थिरता
घरेलू निर्माण की उच्च लागत
बैटरी स्टोरेज की महंगाई
पर्यावरणीय और सामाजिक स्वीकृति से जुड़े मुद्दे

इन चुनौतियों को दूर किए बिना दीर्घकालिक लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा।

  1. आगे की राह: FY 2025-26 के अंत तक क्या उम्मीद?

विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत पूरे वित्तीय वर्ष 2025-26 में40–45 GW नवीकरणीय क्षमता जोड़ सकता है।
यदि ऐसा होता है, तो यह भारत के ऊर्जा इतिहास कीसबसे बड़ी वर्षिक छलांग होगी।

सौर ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के साथ भारत एकहरित अर्थव्यवस्था की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।

निष्कर्ष

भारत द्वारा FY 2025-26 की पहली छमाही में 25 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह संकेत देता है कि देश अब नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र मेंस्थानीय उत्पादन, निजी निवेश, आधुनिक तकनीक और मजबूत नीतियों के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है।

यह उपलब्धि न केवल भारत के जलवायु लक्ष्यों और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करती है, बल्कि देश को वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा नेतृत्व की राह पर भी ले जाती है। आने वाले वर्षों में इस रफ्तार के साथ भारत निश्चित रूप से दुनिया के शीर्ष नवीकरणीय ऊर्जा राष्ट्रों में शामिल होगा।

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