नरेंद्र मोदी का G20 विज़न: “Global South” नेतृत्व की दिशा में एक मजबूत कदम

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने G20 Leaders’ Summit में “Global South” को वैश्विक विकास और निर्णय निर्माण की मुख्यधारा में लाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे। उनका विज़न स्पष्ट है—दुनिया के विकासशील देशों की आवाज़ को मजबूत बनाना और वैश्विक नीतियों में उनकी वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित करना। मोदी के भाषण और प्रस्तावित साझेदारियाँ भारत की उभरती वैश्विक नेतृत्व क्षमता को दर्शाती हैं।

  1. Global South की नेतृत्व भूमिका पर जोर

नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन में कहा कि “Global South” केवल भौगोलिक पहचान नहीं है, बल्कि यह साझा चुनौतियों और आकांक्षाओं की सामूहिक आवाज़ है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि दुनिया की 75% आबादी विकासशील देशों में रहती है, इसलिए वैश्विक नीतियाँ उनके हितों को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए। जलवायु परिवर्तन, आर्थिक रिकवरी, डिजिटल विभाजन, ऊर्जा संकट और स्वास्थ्य ढांचे जैसी समस्याएँ सबसे ज़्यादा इसी क्षेत्र को प्रभावित करती हैं।

  1. त्रिपक्षीय तकनीकी उद्यमिता साझेदारी: भारत–ऑस्ट्रेलिया–कनाडा मॉडल

मोदी द्वारा पेश किया गया एक बड़ा प्रस्ताव था तकनीक और उद्यमिता में त्रिपक्षीय साझेदारी, जिसमें भारत, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा मिलकर एक नवाचार आधारित सहयोग मॉडल विकसित करेंगे। इस पहल का उद्देश्य है—

स्टार्टअप इकोसिस्टम को मज़बूत करना
एआई, साइबर सुरक्षा, और ग्रीन टेक्नोलॉजी में अनुसंधान साझा करना
छात्रों और नवप्रवर्तकों के लिए क्रॉस बॉर्डर अवसर बढ़ाना
तीनों देशों के MSMEs को डिजिटल बाज़ार से जोड़ना

यह साझेदारी “Global South” देशों के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल है, क्योंकि उनकी आर्थिक प्रगति में तकनीक और नवाचार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

  1. दवा आतंकवाद गठजोड़ (Narco Terror Nexus) पर वैश्विक एक्शन

मोदी ने सम्मेलन में दवा आतंकवाद गठजोड़ को मानव सभ्यता के लिए बढ़ते खतरे के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि ड्रग माफिया, संगठित अपराध और आतंकवादी नेटवर्क का गठजोड़ कई देशों की सामाजिक आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर रहा है।
उन्होंने वैश्विक स्तर पर निम्न कदमों की सिफारिश की—

सीमा पार ड्रग तस्करी पर सामूहिक निगरानी
आतंकी फंडिंग की डिजिटल ट्रैकिंग
खुफिया जानकारी का रियल टाइम साझा तंत्र
कड़े अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुपक्षीय कार्रवाइयाँ

भारत की यह पहल “Global South” देशों की सुरक्षा और युवा पीढ़ी को नशे की बढ़ती समस्या से बचाने के लिए महत्वपूर्ण है।

  1. समावेशी विकास और मानव केंद्रित वैश्वीकरण

मोदी के प्रस्तावों की मूल भावना यह है कि वैश्वीकरण तभी सार्थक है जब वह मानव केंद्रित हो—यानी हर देश को समान अवसर मिले। उन्होंने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) जैसे UPI, CoWIN और आधार आधारित सेवाओं को दूसरे देशों तक पहुंचाने की पेशकश की, ताकि विकासशील राष्ट्र भी लाभान्वित हों।

  1. भारत का उभरता वैश्विक नेतृत्व

G20 Leaders’ Summit में मोदी के प्रस्ताव दर्शाते हैं कि भारत केवल एक हिस्सा नहीं, बल्कि वैश्विक एजेंडा सेट करने वाला राष्ट्र बन चुका है।
चाहे यह तकनीकी सहयोग हो, जलवायु न्याय का मुद्दा, सुरक्षा चुनौतियों पर कार्रवाई या विकासशील देशों की आवाज़ बुलंद करना—भारत निरंतर “Global South” का प्रतिनिधि बनकर उभर रहा है।

निष्कर्ष:
नरेंद्र मोदी द्वारा G20 में रखे गए प्रस्ताव एक मजबूत संदेश देते हैं कि भारत वैश्विक नेतृत्व की नई परिभाषा लिख रहा है। “Global South” के हितों को केंद्र में रखकर बनाई गई ये पहलें दुनिया में एक संतुलित, सुरक्षित और समावेशी भविष्य का मार्ग प्रशस्त करती हैं।

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