
देशभर में रोजगार सुधार के लिए घोषित लेबर कोडों पर FIEO की प्रतिक्रिया: सामाजिक समावेश और महिला-श्रम भागीदारी को मिलेगा बढ़ावा
भारत में श्रम कानूनों में व्यापक सुधार की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा घोषित किए गए चार लेबर कोडों को लेकर उद्योग जगत में लगातार सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में Federation of Indian Export Organisations (FIEO) ने इन लेबर कोडों को रोजगार-सुधार के लिहाज़ से ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा है कि इससे न केवल सामाजिक समावेश को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि महिला-श्रम भागीदारी (Women Workforce Participation) में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। FIEO का मानना है कि ये सुधार भारत की निर्यात क्षमता, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और समावेशी विकास—तीनों को एक साथ गति देंगे।
चार लेबर कोड: सुधारों की बुनियाद
केंद्र सरकार ने देश में श्रम कानूनों को सरल, स्पष्ट और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से कुल चार लेबर कोड लागू किए हैं—
- वेतन संहिता (Code on Wages)
- औद्योगिक संबंध संहिता (Industrial Relations Code)
- सामाजिक सुरक्षा संहिता (Code on Social Security)
- व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यस्थल परिस्थितियां संहिता (Occupational Safety, Health and Working Conditions Code)
इन कोडों ने 29 पुराने, जटिल और बिखरे हुए कानूनों को समेटकर एक एकीकृत ढांचा तैयार किया है, जिससे नियोक्ता और कर्मचारी—दोनों के लिए नियम समझना आसान हुआ है।
FIEO का दृष्टिकोण: समावेशन बनाम उत्पादकता
FIEO ने अपने बयान में कहा कि लेबर कोड केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि एक सामाजिक रूपांतरण की दिशा में कदम हैं। संगठन के अनुसार, नए ढांचे ने असंगठित क्षेत्र, गिग वर्कर्स और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों जैसे वर्गों को पहली बार व्यापक सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने का मार्ग प्रशस्त किया है। इससे श्रमिकों में आर्थिक सुरक्षा का भाव बढ़ेगा और वे अधिक उत्पादक तथा स्थायी रूप से कार्यबल से जुड़े रहेंगे।
FIEO का मानना है कि जब श्रमिकों को बीमा, पेंशन और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसी सुविधाएं मिलेंगी, तो देश में मानव पूंजी की गुणवत्ता में सुधार होगा, जिसका सीधा लाभ निर्यात उद्योगों को मिलेगा।
महिला-श्रम भागीदारी में संभावित उछाल
भारत में महिला-श्रम भागीदारी लंबे समय से चिंता का विषय रही है। FIEO के अनुसार, नए लेबर कोडों में कई ऐसे प्रावधान हैं जो महिलाओं के लिए अधिक सुरक्षित, लचीला और सम्मानजनक कार्य-पर्यावरण तैयार करते हैं—
महिलाओं को रात्रिकालीन पाली में कार्य की अनुमति, बशर्ते सुरक्षा के पर्याप्त इंतज़ाम हों।
मातृत्व लाभ, समान वेतन और कार्यस्थल पर उत्पीड़न से संरक्षण जैसे नियमों का सख्ती से पालन।
ई-रजिस्ट्रेशन और डिजिटल अनुपालन प्रणाली, जिससे महिलाओं के लिए शिकायत दर्ज करना और अधिकारों की मांग आसान होगी।
इन सुधारों से विशेष रूप से टेक्सटाइल, फार्मा, आईटीईएस और फूड प्रोसेसिंग जैसे निर्यात-उन्मुख क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।
निर्यात क्षेत्र को प्रत्यक्ष लाभ
FIEO ने इस बात पर ज़ोर दिया कि श्रम सुधारों से भारत का निर्यात क्षेत्र अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा। बेहतर श्रम-नियम, कुशल व संतुष्ट कार्यबल और श्रम विवादों में कमी—ये सभी कारक उत्पादन लागत घटाने और गुणवत्ता बढ़ाने में सहायक होंगे। इससे “मेक इन इंडिया” और “वोकल फॉर लोकल” जैसी पहलों को भी नई ऊर्जा मिलेगी।
चुनौतियां और आगे की राह
हालांकि FIEO ने लेबर कोडों की खुलकर सराहना की है, लेकिन उसने यह भी स्वीकार किया है कि जमीनी क्रियान्वयन सबसे बड़ी चुनौती होगी। राज्यों द्वारा अधिसूचनाएं जारी करने, श्रमिकों व नियोक्ताओं को जागरूक करने और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की ज़रूरत है।
FIEO का सुझाव है कि—
राज्य सरकारें त्वरित अधिसूचना जारी करें
श्रमिक प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान तेज़ हों
उद्योग-संघों व ट्रेड यूनियनों के बीच नियमित संवाद हो
ताकि लेबर कोड केवल कागज़ों तक सीमित न रहकर वास्तविक बदलाव ला सकें।
निष्कर्ष
FIEO की दृष्टि में, नए लेबर कोड भारत के श्रम ढांचे को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप ढालने का प्रयास हैं। सामाजिक समावेश, महिला-श्रम भागीदारी और निर्यात प्रतिस्पर्धा—तीनों को एक साथ मज़बूत करने की क्षमता इन सुधारों में अंतर्निहित है। अगर केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इन्हें प्रभावी ढंग से लागू करती हैं, तो भारत न केवल आर्थिक रूप से मजबूत होगा, बल्कि एक अधिक न्यायपूर्ण और समावेशी कार्य-संस्कृति की ओर भी अग्रसर होगा।
इन सुधारों का वास्तविक फल तभी मिलेगा, जब नीतियां ज़मीन पर दिखें, श्रमिकों तक लाभ पहुंचे और उद्योगों को पारदर्शी व सुगम वातावरण मिले। FIEO की सकारात्मक प्रतिक्रिया इस बात का संकेत है कि भारत का निर्यात समुदाय भी इन सुधारों को अवसर के रूप में देख रहा है—एक ऐसे अवसर के रूप में, जो देश को वैश्विक मंच पर और अधिक सशक्त बना सकता है।
