दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर
राजधानी में भारी स्मॉग और AQI “सेवियर-प्लस” श्रेणी में पहुँच गया, स्वास्थ्य चेतावनी जारी।

दिल्ली–NCR में वायु प्रदूषण ‘गंभीर’ स्तर पर, जनजीवन बुरी तरह प्रभावित

दिल्ली–राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में एक बार फिर वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुँच गया है। ठंड के मौसम की शुरुआत के साथ ही हवा में ज़हरीले कणों की मात्रा तेज़ी से बढ़ गई है, जिससे आम लोगों का सांस लेना तक मुश्किल हो गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, दिल्ली के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 के पार दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो इसका सीधा असर बच्चों, बुज़ुर्गों और पहले से बीमार लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा।

प्रदूषण के बढ़ने के प्रमुख कारण

दिल्ली–NCR में वायु प्रदूषण के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। सर्दियों में तापमान गिरने के साथ हवा की गति कम हो जाती है, जिससे प्रदूषक कण वातावरण में लंबे समय तक बने रहते हैं। इसके अलावा, पराली जलाने की घटनाएँ, वाहनों से निकलने वाला धुआँ, निर्माण कार्यों से उड़ती धूल और औद्योगिक उत्सर्जन भी प्रदूषण को बढ़ावा देते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि नवंबर–दिसंबर के महीनों में ‘तापीय उलटाव’ (Thermal Inversion) की स्थिति बन जाती है, जिसमें प्रदूषित हवा ऊपर नहीं जा पाती और शहर के ऊपर ही जमा हो जाती है।

AQI का खतरनाक स्तर

दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों जैसे आनंद विहार, जहांगीरपुरी, बवाना, रोहिणी और मुंडका में AQI 450 से ऊपर दर्ज किया गया। यह स्तर स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, इस स्तर पर सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, सिरदर्द और गले में खराश जैसी समस्याएँ आम हो जाती हैं। लंबे समय तक ऐसे माहौल में रहने से फेफड़ों और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।

स्वास्थ्य पर गहरा असर

वायु प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुज़ुर्गों पर देखा जा रहा है। अस्पतालों में सांस की बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या में इज़ाफा हुआ है। अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और एलर्जी के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि खुले में व्यायाम करने से बचें और ज़रूरत पड़ने पर ही घर से बाहर निकलें। मास्क का इस्तेमाल करना और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी बताया गया है।

स्कूलों और दफ्तरों पर प्रभाव

गंभीर प्रदूषण को देखते हुए कई बार स्कूलों को बंद करने या ऑनलाइन कक्षाएँ चलाने का फैसला लिया जाता है। बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए अभिभावक भी उन्हें बाहर खेलने से रोक रहे हैं। वहीं, दफ्तर जाने वाले लोगों को भी लंबी दूरी तय करने में परेशानी हो रही है। दृश्यता कम होने के कारण सड़क और हवाई यातायात पर भी असर पड़ा है।

सरकार और प्रशासन के कदम

दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार ने प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। ‘ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान’ (GRAP) के तहत निर्माण कार्यों पर रोक, भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध और डीज़ल जनरेटर के उपयोग पर नियंत्रण जैसे उपाय लागू किए गए हैं। इसके अलावा, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने और वाहनों की संख्या कम करने के लिए ऑड-ईवन योजना पर भी विचार किया जाता है। सरकार का दावा है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर और कड़े कदम उठाए जाएंगे।

विशेषज्ञों की राय

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान केवल अस्थायी प्रतिबंधों से संभव नहीं है। इसके लिए दीर्घकालिक नीतियों की जरूरत है, जैसे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना, इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ाना, हरित क्षेत्र (ग्रीन कवर) में इज़ाफा करना और पराली प्रबंधन के लिए किसानों को बेहतर विकल्प देना। विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि जब तक पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय नहीं होगा, तब तक दिल्ली की हवा पूरी तरह साफ नहीं हो सकती।

आम जनता की भूमिका

प्रदूषण को कम करने में आम नागरिकों की भी अहम भूमिका है। निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल, कार-पूलिंग, कचरा न जलाना और ऊर्जा की बचत जैसे छोटे कदम भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं। इसके अलावा, लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक होना और नियमों का पालन करना जरूरी है।

भविष्य की चिंता

दिल्ली–NCR में हर साल सर्दियों के मौसम में वायु प्रदूषण गंभीर रूप ले लेता है। यह केवल एक मौसमी समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य और पर्यावरण संकट है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में हालात और भी बिगड़ सकते हैं। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि स्वच्छ हवा हर नागरिक का अधिकार है और इसके लिए सरकार, उद्योग और आम जनता—तीनों को मिलकर प्रयास करने होंगे।

निष्कर्ष

दिल्ली–NCR में वायु प्रदूषण का गंभीर स्तर पर पहुँचना एक बार फिर चेतावनी है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना कितना जरूरी है। जब तक हम प्रदूषण के मूल कारणों को नहीं समझेंगे और उनके समाधान के लिए सामूहिक प्रयास नहीं करेंगे, तब तक यह समस्या बार-बार सामने आती रहेगी। साफ हवा के बिना स्वस्थ जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती, इसलिए अब समय आ गया है कि प्रदूषण के खिलाफ निर्णायक कदम उठाए जाएँ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *