ग्वालियर में 101वां तानसेन संगीत समारोह शुरू
— शास्त्रीय संगीत की परंपरा, साधना और सम्मान का भव्य संगम

ग्वालियर से शास्त्रीय संगीत प्रेमियों के लिए गौरवपूर्ण खबर सामने आई है। मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले ग्वालियर में ऐतिहासिक 101वां तानसेन संगीत समारोह भव्यता के साथ आरंभ हो गया है। तानसेन की समाधि स्थल के समीप आयोजित यह प्रतिष्ठित आयोजन न केवल भारतीय शास्त्रीय संगीत की महान परंपरा को जीवंत रखता है, बल्कि नई पीढ़ी को संगीत की साधना, अनुशासन और विरासत से जोड़ने का कार्य भी करता है।

परंपरा और इतिहास का प्रतीक

तानसेन संगीत समारोह देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित शास्त्रीय संगीत आयोजनों में से एक है। इसकी शुरुआत वर्ष 1932 में हुई थी और तब से यह आयोजन हर वर्ष ग्वालियर में लगातार आयोजित किया जा रहा है। तानसेन, जो सम्राट अकबर के नवरत्नों में से एक थे, भारतीय शास्त्रीय संगीत के महानतम संगीतज्ञों में गिने जाते हैं। उनके नाम पर आयोजित यह समारोह शास्त्रीय गायन और वादन की विभिन्न शैलियों—हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत, ध्रुपद, खयाल, ठुमरी और वाद्य संगीत—को मंच प्रदान करता है।

101वें संस्करण का आयोजन अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो इस बात का प्रमाण है कि भारतीय संगीत परंपरा समय के साथ और अधिक समृद्ध हुई है।

उद्घाटन समारोह की भव्यता

समारोह का उद्घाटन दीप प्रज्वलन और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया गया। उद्घाटन अवसर पर प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री, प्रशासनिक अधिकारी, संगीत जगत की प्रतिष्ठित हस्तियां और देश-विदेश से आए संगीत प्रेमी उपस्थित रहे। समारोह स्थल को पारंपरिक कला और संस्कृति की झलक दर्शाने वाली सजावट से सजाया गया, जिसमें मध्य भारतीय स्थापत्य और लोक कलाओं का सुंदर समन्वय देखने को मिला।

उद्घाटन भाषण में वक्ताओं ने तानसेन की संगीत साधना, ग्वालियर घराने की भूमिका और भारतीय शास्त्रीय संगीत की वैश्विक पहचान पर विस्तार से प्रकाश डाला।

कलाकारों को मिला सम्मान

101वें तानसेन संगीत समारोह का एक प्रमुख आकर्षण रहा प्रतिष्ठित कलाकारों का सम्मान। शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में आजीवन योगदान देने वाले वरिष्ठ कलाकारों को विशेष सम्मान प्रदान किया गया। इनमें गायन, वादन और संगीत शिक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कलाकार शामिल रहे।

सम्मान समारोह के दौरान वक्ताओं ने कहा कि ऐसे आयोजनों से न केवल कलाकारों का मनोबल बढ़ता है, बल्कि युवा कलाकारों को भी प्रेरणा मिलती है कि वे संगीत को केवल पेशा नहीं, बल्कि साधना के रूप में अपनाएं।

संगीत प्रस्तुतियों की शुरुआत

समारोह के पहले दिन ही शास्त्रीय संगीत की उच्च कोटि की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। ध्रुपद गायन से लेकर खयाल और वाद्य संगीत तक, हर प्रस्तुति में रागों की गहराई और भावों की समृद्धि स्पष्ट रूप से दिखाई दी। तानसेन की समाधि के समीप जब रागों की स्वर लहरियां गूंजती हैं, तो वातावरण आध्यात्मिक अनुभूति से भर जाता है।

संगीत विशेषज्ञों का कहना है कि तानसेन समारोह की विशेषता यह है कि यहां प्रस्तुति देने वाले कलाकार मंच को केवल प्रदर्शन का स्थान नहीं, बल्कि साधना का केंद्र मानते हैं।

ग्वालियर और संगीत का अटूट संबंध

ग्वालियर का नाम भारतीय शास्त्रीय संगीत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है। ग्वालियर घराना खयाल गायन की सबसे प्राचीन और प्रभावशाली परंपराओं में से एक माना जाता है। तानसेन संगीत समारोह इस परंपरा को आगे बढ़ाने का सशक्त माध्यम है।

हर वर्ष इस आयोजन के दौरान ग्वालियर में देशभर से संगीत साधक, विद्यार्थी और शोधार्थी एकत्र होते हैं। इससे शहर में सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलती है।

युवा कलाकारों के लिए मंच

इस वर्ष के समारोह में युवा और उभरते कलाकारों को भी विशेष अवसर दिया गया है। आयोजकों के अनुसार, परंपरा और नवाचार के संतुलन को बनाए रखना इस आयोजन की प्राथमिकता है। वरिष्ठ कलाकारों के साथ-साथ युवा कलाकारों की प्रस्तुतियां यह संदेश देती हैं कि शास्त्रीय संगीत जीवंत है और निरंतर विकसित हो रहा है।

प्रशासन और संस्कृति विभाग की भूमिका

मध्य प्रदेश सरकार और संस्कृति विभाग द्वारा इस आयोजन को सफल बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। सुरक्षा, यातायात, आवास और ध्वनि व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि कलाकारों और श्रोताओं दोनों को एक सहज और गरिमामय अनुभव मिल सके।

अधिकारियों का कहना है कि 101वां संस्करण होने के कारण इस वर्ष आयोजन को और अधिक भव्य और यादगार बनाने का प्रयास किया गया है।

श्रोताओं में उत्साह

समारोह के पहले दिन से ही श्रोताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोग देर रात तक संगीत का आनंद लेते नजर आए। कई श्रोता ऐसे भी हैं जो हर वर्ष तानसेन समारोह में शामिल होने ग्वालियर आते हैं। उनके लिए यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव है।

भारतीय संस्कृति की जीवंत झलक

तानसेन संगीत समारोह केवल संगीत का आयोजन नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिकता की जीवंत झलक प्रस्तुत करता है। 101वें संस्करण के साथ यह आयोजन एक नए शतक में प्रवेश कर चुका है, जो आने वाले वर्षों में भी संगीत साधकों और प्रेमियों को उसी श्रद्धा और गरिमा के साथ आकर्षित करता रहेगा।

निष्कर्षतः, ग्वालियर में शुरू हुआ 101वां तानसेन संगीत समारोह भारतीय शास्त्रीय संगीत की अमूल्य विरासत का उत्सव है। कलाकारों का सम्मान, उच्च कोटि की प्रस्तुतियां और ऐतिहासिक वातावरण—ये सभी मिलकर इस आयोजन को एक अविस्मरणीय सांस्कृतिक पर्व बना रहे हैं।

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