
कांग्रेस का राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन: VB-G RAM-G बिल के विरोध में सड़कों पर उतरेगा विपक्ष, संसद के भीतर-बाहर घमासान
नई दिल्ली।
कांग्रेस पार्टी ने आज VB-G RAM-G बिल के खिलाफ देशभर में व्यापक विरोध-प्रदर्शन का आह्वान किया है। पार्टी का कहना है कि यह विधेयक लोकतांत्रिक मूल्यों, संघीय ढांचे और आम नागरिकों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसी मुद्दे पर संसद के भीतर भी सियासी टकराव तेज हो गया है, जहां तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सहित कई विपक्षी दलों के सांसदों के साथ लगातार बहस और रणनीतिक बैठकों का दौर जारी है।
क्या है विरोध का आधार
कांग्रेस नेतृत्व का आरोप है कि VB-G RAM-G बिल को पर्याप्त संसदीय चर्चा और व्यापक परामर्श के बिना आगे बढ़ाया जा रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि विधेयक के प्रावधानों में कई अस्पष्टताएं हैं, जिनसे राज्यों के अधिकारों, सामाजिक न्याय और पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। कांग्रेस का दावा है कि सरकार ने हितधारकों—राज्य सरकारों, विशेषज्ञों और नागरिक संगठनों—की आपत्तियों को नजरअंदाज किया है।
कांग्रेस महासचिवों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि “यह केवल एक विधेयक का विरोध नहीं है, बल्कि संवैधानिक प्रक्रियाओं और जनहित की रक्षा का सवाल है।” पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक सरकार विधेयक को वापस लेकर विस्तृत चर्चा के लिए नहीं भेजती, तब तक विरोध जारी रहेगा।
देशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा
कांग्रेस ने अपने सभी प्रदेश और जिला इकाइयों को निर्देश दिए हैं कि वे आज शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन, रैलियां और ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित करें। राजधानी दिल्ली से लेकर राज्यों की राजधानियों और जिला मुख्यालयों तक पार्टी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरेंगे। कई जगहों पर महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस और एनएसयूआई की अलग-अलग गतिविधियां भी प्रस्तावित हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, विरोध कार्यक्रमों में संविधान की प्रस्तावना का पाठ, हस्ताक्षर अभियान और जनसंवाद कार्यक्रम शामिल होंगे, ताकि आम लोगों को विधेयक के संभावित प्रभावों के बारे में जागरूक किया जा सके। कांग्रेस ने कार्यकर्ताओं से अनुशासन बनाए रखने और कानून-व्यवस्था का पालन करने की अपील की है।
संसद में विपक्ष की एकजुटता
VB-G RAM-G बिल को लेकर संसद के भीतर विपक्षी एकता की कोशिशें तेज हो गई हैं। तृणमूल कांग्रेस के सांसदों के साथ कांग्रेस की लगातार बैठकें हो रही हैं, जिनमें साझा रणनीति, संशोधनों और सरकार पर दबाव बनाने के विकल्पों पर चर्चा की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी ने भी विधेयक के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई है और व्यापक बहस की मांग की है।
इसके अलावा, अन्य विपक्षी दलों—जैसे समाजवादी पार्टी, डीएमके, वाम दल और कुछ क्षेत्रीय दल—के साथ भी संपर्क बढ़ाया गया है। विपक्ष का लक्ष्य संसद में संख्या-बल के साथ-साथ नैरेटिव की लड़ाई भी जीतना है, ताकि सरकार को बैकफुट पर लाया जा सके।
सरकार का पक्ष
सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि VB-G RAM-G बिल का उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना और दीर्घकालिक सुधार लाना है। सत्तापक्ष के नेताओं का कहना है कि विधेयक के सभी प्रावधान संविधान के दायरे में हैं और इससे किसी के अधिकारों का हनन नहीं होगा। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि वह उचित मंच पर विपक्ष की आपत्तियों को सुनने के लिए तैयार है, लेकिन विधेयक को पूरी तरह वापस लेने का सवाल नहीं उठता।
राजनीतिक तापमान और संभावित असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमाएगा। यदि विरोध-प्रदर्शन व्यापक और शांतिपूर्ण रहता है, तो इससे सरकार पर दबाव बढ़ सकता है कि वह विधेयक पर और चर्चा करे या कुछ संशोधन स्वीकार करे। वहीं, यदि संसद में गतिरोध बढ़ता है, तो विधायी कार्यवाही प्रभावित होने की आशंका भी है।
राज्यों में कांग्रेस की सक्रियता से स्थानीय राजनीति पर भी असर पड़ सकता है। जिन राज्यों में विपक्षी गठबंधन मजबूत है, वहां संयुक्त प्रदर्शन सरकार के लिए चुनौती बन सकते हैं। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ दल इसे “विकास-विरोधी राजनीति” बताकर जवाबी अभियान चला सकता है।
नागरिक समाज और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
कई नागरिक संगठनों और नीति विशेषज्ञों ने भी विधेयक पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि किसी भी बड़े विधायी बदलाव से पहले व्यापक सार्वजनिक परामर्श जरूरी है। कुछ विशेषज्ञों ने यह सुझाव दिया है कि विधेयक को संसदीय समिति के पास भेजा जाए, ताकि सभी पहलुओं की गहन समीक्षा हो सके।
आगे क्या
आज के राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन के बाद कांग्रेस नेतृत्व अगले कदम पर फैसला करेगा। पार्टी संकेत दे चुकी है कि यदि सरकार ने रुख नहीं बदला, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जा सकता है। संसद के आगामी सत्रों में भी इस मुद्दे पर तीखी बहस और कार्यवाही की संभावना है।
कुल मिलाकर, VB-G RAM-G बिल ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। कांग्रेस का देशव्यापी विरोध और तृणमूल कांग्रेस सहित विपक्ष की सक्रिय भूमिका यह संकेत देती है कि यह मुद्दा केवल एक विधेयक तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापक राजनीतिक विमर्श का केंद्र बनेगा। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार संवाद का रास्ता चुनती है या टकराव की राजनीति और तेज होती है।
